राज्यों का चुनावी गणित
 
राज्यों का चुनावी गणित
 

राज्यों के समीकरण

राज्यों के समीकरण

 

लोकतंत्र के महापर्व की तैयारियाँ परवान चढ़ रही हैं. बिसातें बिछ चुकी हैं और मोहरे धीरे-धीरे सामने आने लगे हैं.

16 अप्रैल से पाँच चरणों में होने वाले लोकसभा चुनाव अगली सरकार तय करेंगे और 16 मई की शाम तक परिणाम सामने आने के बाद तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी.

नेताओं के दावे तो हमेशा अपने पक्ष में होते हैं लेकिन इस बार ये तय है कि किसी पार्टी या गठबंधन के पक्ष में कोई लहर जैसी चीज नहीं दिखाई दे रही. इसलिए नतीजे चौंकाने वाले हों, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

गठबंधन सरकारों के मौजूदा युग में क्षेत्रीय क्षत्रपों की भूमिका बेहद अहम हो गई है और इस बार भी यही दिखाई दे रहा है.

केंद्र में किसकी सरकार बनेगी ये इस पर निर्भर करेगा कि कुछ ख़ास राज्यों में क्षेत्रीय दलों का कैसा प्रदर्शन रहा और सारे पुराने प्रतिबद्धताओं को पीछे छोड़ वो किसके पाले (गठबंधन) में जाएंगे.

बदली तस्वीर

इस लिहाज़ से चुनाव पूर्व गठबंधन के आधार पर तुलना करें तो इस बार तस्वीर बदली हुई है. ममता, जयललिता, चंद्रबाबू नायडू राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का साथ छोड़ चुके हैं. उड़ीसा में बीजू जनता दल से भी गठजोड़ ख़त्म हो चुका है.

वहीं कांग्रेस ने अपने पाले में कई दलों को शामिल करने में सफलता पाई है जिनमें तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी शामिल है.

वाम दलों की अगुआई में तीसरा मोर्चा भी ज़ोर लगा रहा है और इसका राजनीतिक भविष्य पूरी तरह इसमें शामिल क्षेत्रीय दलों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा.

इसलिए हम आगे बारी-बारी से अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक तस्वीर आपके सामने रख रहे हैं जो सरकार गठन की दिशा तय करेंगे.

प्रस्तुति: बीबीसी संवाददाता आलोक कुमार
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