हिजाब के ख़िलाफ़ झंडा बुलंद करना मक़सद नहीं: हिना

  • प्रभात पांडेय
  • बीबीसी संवाददाता
हिना सिद्धू
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भारत की महिला निशानेबाज़ हिना सिद्धू ईरान में खेल मुक़ाबलों में हिजाब पहनने की शर्त से इनकार के बाद सुर्खियों में हैं.

इसके बाद हिना सिद्धू की चर्चा हिंदुस्तान से लेकर ईरान तक हो रही है. हर कोई हिना से जानना चाहता है कि एशियन एयर गन शूटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा न लेने का फ़ैसला आखिर उन्होंने क्यों लिया.

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बीबीसी के साथ बातचीत में हिना ने तफ़सील से बताया, ''मैं चैम्पियनशिप के लिए चुनी गई. हमें ई-मेल के जरिए प्रतिस्पर्धा के लिए चुने जाने की खबर दी गई थी. मैंने जवाब दे दिया था कि मैं इसमें भाग नहीं लेना चाहती."

वे बताती हैं, ''पहली वजह तो यह थी कि इसमें भाग लेना मेरे प्लान में नहीं था. मुझे अपने खेल पर ध्यान देना था. और दूसरी वजह यह थी कि इसमें भाग लेने वाले खिलाड़ियों पर हिजाब पहनने की शर्त थी. इसे लेकर मैं सहज नहीं थी. इसलिए मैंने उन्हें इनकार कर दिया था."

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हिना के इनकार करने के बाद क्या टूर्नामेंट के आयोजकों या अधिकारियों ने उनसे बात करने की कोशिश की, और नियमों में लचीलापन दिखाने की कोई पेशकश हुई?

हिना ने बताया, "ऐसा कुछ नहीं हुआ. शूटिंग प्रतिस्पर्धाएं इंडिविजुअल स्पोर्ट्स की श्रेणी में आती हैं. यह खिलाड़ी का निजी निर्णय होता है कि सिलेक्ट होने के बाद इसमें भाग ले, या न ले. अमूमन खिलाड़ी ऐसा कम ही करते हैं."

दो साल पहले भी ईरान में आयोजित इसी प्रतिस्पर्धा में भाग लेने से हिना ने इनकार कर दिया था.

हिना बताती हैं, "खेल फेडरेशन ने तब भी मेरा समर्थन किया था. लेकिन यह मामला खेल फेडरेशन या उसके अधिकारियों से परे है. यह तो उनके देश का कानून है. खेल पदाधिकारी इस सिलसिले में ज्यादा कुछ कर नहीं सकते थे. यह कुछ ऐसा है जिसका हर किसी को पालन करना पड़ता है."

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इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर हिना की खूब तारीफ हो रही है. कई लोग उनके समर्थन में भी आए हैं. यहां तक कि ईरान के सोशल मीडिया पर भी महिलाओं और यहां तक कि पुरुषों ने भी हिना के पक्ष में आवाज बुलंद की है.

उन्होंने बताया, "लोगों ने मेरा काफी समर्थन किया है. पर इस मामले में मुझे किसी तरह के समर्थन की ज़रूरत नहीं है. मैंने जो किया है, वह एक कुदरती सी बात थी. इस मामले को इतना तूल देने की जरूरत नहीं थी. मुझे तो इस बात पर हैरानी हो रही है कि दो साल पहले भी मैंने मना किया था, तब किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया."

वे कहती हैं, "मेरे लिए यह एक सामान्य सी बात है. मुझे किसी चीज़ पर अगर यक़ीन नहीं है तो मुझे इसका हिस्सा नहीं बनना है. मुझे लगता है कि वहां के लोग भी शायद बदलाव चाहते होंगे. लेकिन यह उनका अधिकार है कि वे अपनी सरकार या सिस्टम से बदलाव की मांग करें. लेकिन मेरा मक़सद न तो ईरान को बदलना है और न हिजाब के खिलाफ झंडा बुलंद करना है."

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हिना के समर्थन में उठ रही आवाजों के बीच क्या किसी ने उनके इस कदम का विरोध भी किया?

हिना कहती हैं, "मेरा विरोध तो किसी ने नहीं किया. हां, कुछ लोग ज़रूर ये मानते हैं कि इसमें क्या बड़ी बात है. सिर ढंक कर, अपना जो काम करना है, वह करना है. लेकिन यह उनका नज़रिया है."

उनका कहना है, "ऐसा भी नहीं है कि ईरान कोई जाता नहीं है. लोग ईरान जाते हैं और इस बात को क़बूल करके जाते हैं. यह भी मुमकिन है कि लोग इसे एन्जॉय करके आते होंगे. यक़ीनन मैं उन लोगों में से नहीं हूं, इसलिए मैंने चैम्पियनशिप में भाग न लेने का फैसला किया."

ईरान की महिला खिलाड़ियों के हिजाब पहनने पर हिना निजी तौर पर क्या सोचती हैं? क्या खिलाड़ियों पर इस तरह की कोई रोक होनी चाहिए या नहीं?

वह कहती हैं, "ईरान की ज़मीनी हक़क़ीत के बारे में मुझे ज़्यादा इल्म नहीं है कि वहां की महिलाएं क्या चाहती हैं. लेकिन कोई इससे सहज नहीं है तो उन्हें इसके खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए."

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लेकिन यह सवाल भी है कि क्या हिजाब पहनने की शर्त से इनकार करने वाली हिना अकेली हैं? इस टूर्नामेंट में क्या किसी और महिला खिलाड़ी ने हिस्सा नहीं लिया?

हिना ने बताया, "दो साल पहले भी तीन महिला खिलाड़ियों ने इसमें हिस्सा लिया था और सभी लड़कियों ने सभी नियमों का पालन किया था. अब भी मेरे मना करने के बाद दूसरे खिलाड़ी प्रतिस्पर्द्धा के लिए जा रहे हैं. और वे भी नियमों का पालन करेंगे. लेकिन यह उनका निजी फ़ैसला है."

उनके मुताबिक़ हिजाब पहनने या इससे इनकार करने के आधार पर किसी के बारे में कोई राय नहीं बनानी चाहिए, क्योंकि यह किसी की निजी पसंद-नापसंद का मामला है.

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