विराट खेलने वाले हैं अपना 50वां टेस्ट

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Image caption विराट कोहली

भारत और इंग्लैंड के बीच विशाखापत्तनम में गुरुवार से दूसरा टेस्ट मैच खेला जाएगा. यह भारत के कप्तान विराट कोहली का 50वां टेस्ट मैच है.

विराट कोहली अभी तक 49 टेस्ट मैच में 13 शतक और 12 अर्धशतक की मदद से 3643 बना चुके हैं.

उनके पांच यादगार टेस्ट मैचो को चुनना बेहद मुश्किल है लेकिन ये वो टेस्ट मैच है जिन्हे आसानी से भुलाया नही जा सकता.

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1. एक कप्तान और बल्लेबाज़ के रूप में विराट कोहली बेहद कामयाब क्रिकेटर हैं. अगर पिछले टेस्ट मैच की ही बात करे तो उन्होंने ऐसे समय में विकेट पर टिकने का दमख़म दिखाया, जब इंग्लैंड के गेंदबाज़ भारत पर हावी हो चुके थे.

जीत के लिए 310 रनो के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत के 6 विकेट 132 रन पर गिर चुके थे. ऐसे में विराट ने कप्तान की पारी खेलते हुए 129 मिनट विकेट पर बिताते हुए 98 गेंदो पर नाबाद 49 रन बनाए.

उन्होंने रवींद्र जडेजा के साथ सातंवे विकेट के लिए नाबाद 40 रन जोड़े. इससे भी बड़ी बात कि उन्होंने रवींद्र जडेजा के साथ विकेट पर 10 ओवर बिताए. विराट ने माना कि पहली बार वह किसी टेस्ट मैच को ड्रॉ कराने के लिए खेले.

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Image caption विराट कोहली

2. विराट ने अपने टेस्ट करियर की शुरूआत साल 2011 में किंग्सटन जमैका में वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ की थी. महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत 63 रन से जीता लेकिन विराट कोहली पहली पारी में चार और दूसरी पारी में 15 रन बना सके.

लेकिन इसी वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ उन्होंने अपने टेस्ट करियर का पहला दोहरा शतक जमाया. उन्होंने इसी साल वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ चार टेस्ट मैचो की सिरीज़ के पहले टेस्ट मैच में एंटीगा में पहली पारी में पूरे 200 रन बनाए.

यह उनके टेस्ट करियर का पहला दूसरा शतक था. भारत यह टेस्ट मैच एक पारी और 92 रन से जीता.

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3. विराट कोहली का पहला टेस्ट शतक भी बेहद यादगार हैं. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ साल 2012 में एडीलेड में चौथे टेस्ट मैच की पहली पारी में 116 रन बनाए.

भारत यह टेस्ट मैच 298 रन से और टेस्ट सिरीज़ 4-0 से हारा. लेकिन विराट कोहली की इस पारी ने उन्हे क्रिकेट विशेषज्ञों की नज़र में ला खड़ा किया.

इस सिरीज़ के बाद उनका नसीब चमका जबकि वीवीएस लक्ष्मण, राहुल द्रविड़, वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर का टेस्ट करियर इसके बाद लगभग डूब गया. राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण ने तो इस सिरीज़ के बाद टेस्ट क्रिकेट को अलविदा ही कह दिया.

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Image caption वीवीएस लक्ष्मण

4. विराट को टेस्ट मैचो में कप्तानी करने का पहला अवसर तब मिला जब साल 2014 में ऑस्ट्रेलियाई दौरे में भारत के नियमित कप्तान धोनी पहले टेस्ट मैच से पहले चोटिल हो गए. एडीलेड एक बार फिर कोहली के लिए विराट साबित हुआ.

उन्होंने कप्तान के रूप में पहले ही टेस्ट मैच की पहली पारी में 115 रनों की शतकीय पारी खेली. ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाले वह भारत के चौथे खिलाड़ी बने जिन्होंने कप्तानी का भार संभालने के साथ ही टेस्ट मैच में शतक जड़ा.

लेकिन एडीलेड में अभी तो और भी बहुत कुछ होना था. ऑस्ट्रेलिया के कप्तान माइकल क्लार्क ने अपनी दूसरी पारी 5 विकेट पर 290 रन के स्कोर पर समाप्त घोषित की और भारत के सामने जीत के लिए 364 रनों का लक्ष्य रखा.

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विराट कोहली ने चुनौती स्वीकार की और सलामी बल्लेबाज़ मुरली विजय के साथ मिलकर तीसरे विकेट के लिए 185 रन भी जोड़े. मुरली विजय 99 रन बनाकर आउट हुए.

ख़ुद विराट कोहली ने दूसरी पारी में भी शतक बनाते हुए 141 रन बनाए लेकिन भारत 48 रन से हार गया. भारतीय टीम 315 रन ही बना सकी.

इस हार के बावजूद ऑस्ट्रेलिया तक के क्रिकेट समीक्षको ने विराट कोहली के लड़ाकू प्रवृति की बेहद सराहना की. विराट इसे अपना सबसे बेहतरीन टेस्ट मैच मानते हैं.

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Image caption विराट कोहली

5. ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर विराट कोहली के टेस्ट करियर की स्क्रिप्ट का एक नया पन्ना और लिखा जाना बाकी था. हुआ यह कि तीसरा टेस्ट मैच मैलबर्न में खेला गया जिसके बाद महेंद्र सिंह धोनी ने अचानक टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया.

नतीजे में तनाव की स्थिति में विराट कोहली को कप्तान बनाया गया. विराट ने इस बार भी ज़िम्मेदारी का भार उठाया और पहली पारी में 147 रन बनाकर भारत को 475 रन बनाने में मदद की.

इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने 7 विकेट पर 572 रन बनाकर अपनी पहली पारी घोषित की थी. दूसरी पारी में भारत जीत के लिए 349 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 7 विकेट खोकर 252 रन बना सका और मैच ड्रॉ रहा.

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विराट कोहली ने 123 मिनट विकेट पर बिताकर 46 रन बनाए और टीम को ढहने और हार से बचाया. ऑस्ट्रेलिया ने चार टेस्ट मैचो की सिरीज़ 2-0 से जीती लेकिन इसी सिरीज़ से एक नए विराट कोहली का अवतार हुआ.

विराट कोहली वैसे तो न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ भी पिछली सिरीज़ के इंदौर टेस्ट मैच में 211 रन बनाकर अपने टेस्ट करियर की सबसे ज्यादा रनों की पारी खेल चुके हैं.

लेकिन उनके बल्ले से इंग्लैंड के ख़िलाफ यादगार पारियों का अभी भी इंतज़ार है. वह इंग्लैंड के ख़िलाफ अभी तक केवल एक शतक लगा सके हैं.

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