हॉकी- भारत के वर्ल्ड कप जीतने के कुछ ख़ास कारण जानिए

  • आदेश कुमार गुप्त
  • बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप

रविवार को भारतीय हॉकी टीम ने लखनऊ के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में खेले गए पुरुषों के जूनियर विश्व कप हॉकी टूर्नामेंट को अपने नाम किया.

फाइनल में भारत ने यूरोप की बेहतरीन टीमों में से एक बेल्जियम को 2-1 से मात दी.

टूर्नामेंट जीतने के बाद आत्मविश्वास से भरे भारत के सिमरनजीत सिंह ने कहा कि अब पूरी दुनिया को पता चल गया होगा कि भारतीय हॉकी सही राह पर आ गई है.

सवाल ये पूछा जा रहा है कि इस जीत से उत्साहित होकर क्या आठ बार की ओलंपिक और एक बार की विश्व चैंपियन रही सीनियर हॉकी टीम भी फिर चमकेगी.

साल 2008 में तो भारतीय हॉकी टीम बीजिंग ओलंपिक में जगह तक नहीं बना सकी थी.

इसी साल रियो में हुए ओलंपिक खेलों में भी भारतीय हॉकी टीम का अभियान क्वार्टर फाइनल में ही बेल्जियम से 3-1 से हार के साथ ही समाप्त हो गया था.

अब जूनियर टीम ने आखिरकार बेल्जियम को हराकर भारत को दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का अवसर दिया.

भारतीय टीम की जीत इसलिए दमदार मानी जाएगी क्योंकि भारत ने सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया जैसी दमदार टीम को पेनल्टी शूट आऊट में 4-2 से हराया था.

इतना ही नहीं भारत ने क्वार्टर फाइनल में स्पेन को भी 2-1 से मात दी.

साल 1980 के मॉस्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के सदस्य रहे एम के कौशिक कहते हैं कि यह जीत बहुत ज़रूरी थी.

जूनियर टीम ने फाइनल में बेल्जियम को हर क्षेत्र में मात दी. चाहे वह गेंद पर नियत्रंण हो, कब्ज़ा हो, रणनीति हो, डिफेंस हो या अटैक हो.

लीग मैचों में भारत ने कनाडा को 4-0 से, इंग्लैंड को 5-3 से और दक्षिण अफ्रीका को 2-1 से हराया. टीम के कोच हरेन्दर सिंह का भी टीम की तैयारियों में बड़ा योगदान रहा.

उन्होंने पिछले एक महीने से सभी खिलाड़ियों को मोबाइल फोन से दूर रहने को कहा. सबसे बड़ी बात ये रही कि पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम किसी एक विशेष खिलाड़ी पर निर्भर नहीं रही.

गुरजंत, मनदीप, सिमरनजीत सिंह, हरप्रीत, वरुण, परविंदर, अजित, अरमान क़ुरैशी सबने मौक़ा मिलने पर गोल किया.

कोच हरेन्दर ने अपने अनुभव के दम पर टीम के खिलाड़ियों की फिटनेस पर पूरा ध्यान दिया.

उल्लेखनीय है कि जूनियर विश्व कप पूरे 70 मिनट के खेल के आधार पर खेला गया ना कि दूसरे टूर्नामेंट की तरह चार 15-15 मिनट के चार क्वार्टर में.

इसके अलावा सीनियर टीम के कप्तान गोलकीपर पी श्रीजेश की जूनियर टीम के गोलकीपर विकास दहिया को दी सलाह भी काम आई.

श्रीजेश ने उन्हें हिदायत दी थी कि पेनल्टी शूट आऊट में गेंद पर गिरना मत.

इस टीम के प्रदर्शन को लेकर भारत के पूर्व ओलंपियन और चयनकर्ता हरबिंदर सिंह का मानना है कि अब इसी टीम से कई खिलाड़ी सीनियर टीम को मिलेंगे.

जूनियर एशिया कप जीतने के बाद विश्व स्तर पर इतना बड़ा टूर्नामेंट जीतने से लगता तो है कि भारतीय हॉकी के दिन फिरने वाले हैं.

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