राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के लिए क्या है उनके टीचर की सलाह

  • रोहित घोष
  • कानपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
रामनाथ कोविंद

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नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को उनके कानपुर के डीसी लॉ कॉलेज के अध्यापक सुमन निगम ने एक सुझाव दिया है. निगम चाहते हैं कि उनके शिष्य सबसे पहले गौ रक्षा के नाम पर होने वाली कथित हत्याओं पर लगाम लगाएं.

साथ ही निगम का यह भी कहना है कि कोविंद को सरकार को वैसे सुझाव देने चाहिए जिससे सबका भला हो.

जाति, धर्म से ऊपर उठ कर काम करें कोविंद

सुमन निगम ने निगम ने बीबीसी से कहा, "इसके अलावा इस सरकार के कई और फ़ैसले देश के लिए ठीक नहीं है. एक ताज़ा उदाहरण है जीएसटी. ग़रीब आदमी, जैसे सब्ज़ी बेचने वाला भी इसके दायरे में आ गया है. कोविंद को सरकार को अच्छे सुझाव देने चाहिए जिससे सबका भला हो. मुझे उम्मीद है कोविंद जाति, धर्म से ऊपर उठ कर वैसे क़दम उठाएंगे जिससे हर आदमी सुखी होगा."

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रामनाथ कोविंद को क़ानून पढ़ाने वाले शिक्षक सुमन निगम

कोविंद ने स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई कानपुर से की है. उन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज से बी. कॉम की डिग्री हासिल की. उसके बाद जुलाई, 1966 में उन्होंने डीसी लॉ कॉलेज में दाख़िला लिया.

कॉलेज में भीड़ से बिल्कुल अलग थे कोविंद

निगम कहते हैं, "उन दिनों लॉ की पढ़ाई दो साल की होती थी. मैं उस दौरान कोविंद का अध्यापक था."

निगम 88 साल के हैं और कानपुर के सिविल लाइन्स मोहल्ले में रहते हैं. ज़्यादा उम्र की वजह से बहुत ज़्यादा लोगों से मिलते नहीं हैं.

निगम के अनुसार कॉलेज में सैकड़ों छात्र थे. वे किसी को भी नहीं पहचानते थे. लेकिन एक छोटी सी घटना की वजह से वो कोविंद को पहचानने लगे.

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निगम कहते हैं, "हुआ यूं की अटेंडेंस का जो रजिस्टर था उसमे कोविंद की जगह गोविन्द चढ़ गया था. और वह काफी दिनों तक रहा. फिर एक दिन ये बात सामने आई. भूल सुधार किया गया. और रजिस्टर में गोविन्द को कोविंद किया गया. उसके बाद से कोविंद मेरी नज़रों में आ गए."

कॉलेज के बाद कोविंद से संपर्क नहीं रहा

उनके अनुसार कोविंद लॉ कॉलेज में शुरू से ही दूसरे छात्रों से अलग थे और उनमे पढ़ाई के प्रति लगन बहुत ज़्यादा थी.

निगम ने कहा, "मैं क्लास में लेक्चर दिया करता था. डिक्टेट नहीं करता था. कोविंद के अलावा कोई दूसरा छात्र उन नोट्स को अपनी कॉपी में लिखता नहीं था. कोविंद रोज कॉलेज आया करते थे. कॉलेज की लाइब्रेरी में लाइब्रेरियन से महंगी किताबें देने के लिए मिन्नतें करते थे. और फिर वह उन किताबों से नोट्स बनाया करते थे."

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रामनाथ कोविंद के कॉलेज के दिनों में उपस्थिति रजिस्टर के एक अंश की तस्वीर

लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद निगम और कोविंद के बीच संपर्क नहीं रहा.

सरकार की छवि ठीक करें कोविंद

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जब कोविंद बिहार के राज्यपाल बने तो निगम को ध्यान आया की वो उन्हीं के छात्र थे.

वे कहते हैं, "भारतीय जनता पार्टी में कुछ ग़लत लोग आ गए हैं, और भारतीय जनता पार्टी की ही सरकार है. उन ग़लत लोगों की वजह से कुछ ग़लत निर्णय लिए गए हैं जिससे सरकार की छवि ख़राब हो रही है. कोविंद को ये सब ठीक करना चाहिए."

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