भारतीय टेस्ट क्रिकेट की वो पांच ख़ास पारियां

  • 1 नवंबर 2017
वीवीएस लक्ष्मण इमेज कॉपीरइट Getty Images

भारतीय टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में जिन कुछ क्रिकेटरों को हमेशा याद किया जाएगा उनमें 'वेरी वेरी स्पेशल' लक्ष्मण का नाम खास है.

उन्हें उनकी स्टाइलिश क्रिकेट के साथ ही ऐतिहासिक 281 रनों की पारी की वजह से याद किया जाता रहेगा.

हैदराबाद से आने वाले क्रिकेट की इस शानदार प्रतिभा के आगे ईडन गार्डन में मजबूत ऑस्ट्रेलियाई टीम नतमस्तक होने को मजबूर हो गई.

साल 2001 में 11-15 मार्च को कोलकाता के ईडन गार्डन में खेले गए इस टेस्ट मैच की पहली पारी में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 274 रनों की बढ़त लेने के बाद भारतीय टीम को फॉलोऑन के लिए बुलाया.

कप्तान स्टीव वॉ को उम्मीद थी की भारतीय टीम जो पहली पारी में 171 रन बनाकर आउट हो गई उसे आसानी से आउट कर देंगे.

वो मैच जिसमें लक्ष्मण बने थे 'हनुमान'

इमेज कॉपीरइट Getty Images

ग्लैडियेटर जैसा प्रदर्शन

पहली पारी में 59 रन जड़ने के कारण लक्ष्मण को दूसरी पारी में तीसरे नंबर पर भेजा गया. कलाई के जादूगर ने इसके बाद ग्लैडियेटर जैसा प्रदर्शन किया. शेन वार्न की गेंदों को मैदान के चारों ओर मारते रहे और राहुल द्रविड़ (180) के साथ 376 रनों की साझेदारी की और भारत का स्कोर 600 के पार पहुंचाया.

लक्ष्मण ने 281 की विशाल पारी खेली. तब ये किसी भी भारतीय बल्लेबाज़ का टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर भी था. भारत ने अंतिम दिन पारी घोषित की और फॉलोऑन के लिए उतारे जाने के बावजूद मैच ऑस्ट्रेलियाई टीम को 171 रन से रौंदते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की.

लेग स्पिनर शेन वार्न उस पारी को याद करते हुए कहा था, "मैं फ़ुटमार्क पर गेंद फेंक रहा था लेकिन लक्ष्मण उसे कवर या मिड विकेट पर लगातार मारे जा रहे थे. उन्हें गेंदबाज़ी करना बहुत कठिन था."

ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज बल्लेबाज रिकी पोंटिग ने भी कहा था, "लेग साइड पर उनकी बल्लेबाज़ी हममें से कईयों को हैरान कर रही थी. लग नहीं रहा था कि उन्हें आउट कर सकेंगे, हम लगभग दो दिनों तक गेंदबाज़ी करते रहे."

जब लक्ष्मण रेखा नहीं पार कर सके कंगारू

इमेज कॉपीरइट Getty Images

डेब्यू पारी में ही दिया था दस्तक

वीवीएस लक्ष्मण ने अपने करियर की पहली पारी में ही आने वाले दिनों के संकेत दे दिए थे. नवंबर 1996 में दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ अहमदाबाद टेस्ट की पहली पारी में 21 रनों से पिछड़ने के बाद मैच संतुलन में दिख रहा था.

लेकिन तेज़ गेंदबाज़ों और स्पिनरों को विकेट से बहुत मदद मिल रही थी और भारतीय टीम ने लड़खड़ाती हुई शुरुआत की. 38 रनों पर तीन विकेट गंवाने के बाद मैदान पर वीवीएस लक्ष्मण ने डेब्यू किया.

सामने ऐलेन डोनाल्ड, पैट सिम्कॉक्स और पॉल एडम्स जैसे गेंदबाज़ कहर बरपा रहे थे लेकिन लक्ष्मण ने विकेट का एक छोर संभाल लिया. उन्होंने 190 गेंदों का सामना किया और 51 रन बनाए.

इस दौरान उन्होंने अनिल कुंबले (30) के साथ अच्छी साझेदारी निभाई. लक्ष्मण की इस जुझारू पारी की बदौलत भारत ने दक्षिण अफ्रीका के सामने 170 रनों का लक्ष्य रखा.

इसके बाद जवागल श्रीनाथ और अनिल कुंबले ने भी विकेट का बखूबी फ़ायदा उठाया, जिससे दक्षिण अफ़्रीका लक्ष्य से 64 रन पहले ही ऑल आउट हो गया.

पहले मैच में खेली गई इस पारी ने ही इस दिग्गज क्रिकेटर की झलक दे दी थी.

वो ऐतिहासिक टेस्ट और लक्ष्मण का कमाल

इमेज कॉपीरइट Getty Images

साल 2010 लक्ष्मण के नाम

इस साल वीवीएस लक्ष्मण ने ऐसी कई यादगार पारियां खेलीं जिसने टीम को जीत दिलाने में अहम क़िरदार निभाए. चार अलग अलग महीनों में उनकी शानदार बल्लेबाज़ी की बदौलत भारत ने श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों को हराया.

वहीं न्यूजीलैंड के ख़िलाफ़ एक बेहद यादगार ड्रॉ कराने में क़ामयाब हुए.

कोलंबो टेस्ट में बने शतकवीर

अगस्त में लक्ष्मण ने कोलंबो टेस्ट में स्पिन गेंदबाज़ी के ख़िलाफ़ उत्कृष्ट बल्लेबाज़ी का नमूना पेश किया. चौथी पारी में भारत को जीत के लिए 257 रन चाहिए थे लेकिन श्रीलंकाई सूरज रणदीव की ऑफ़ स्पिन के आगे भारतीय के शीर्ष बल्लेबाज़ एक के बाद एक फेल हुए जा रहे थे.

मैच के अंतिम दिन की शुरुआत में भारतीय टीम का स्कोर तीन विकेट पर 53 रन था. तेंदुलकर और नाइटवाच मैन ईशांत शर्मा क्रीज़ पर थे. ईशांत के आउट होते ही लक्ष्मण आए. इन दोनों ने अच्छी बल्लेबाज़ी की. तेंदुलकर अर्धशतक बना कर आउट हुए. इसके बाद लक्ष्मण ने यादगार शतक जड़ा और टीम को जीत दिलाई.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

पीठ दर्द के बावजूद कंगारुओं को हराया

दो महीने बाद अक्तूबर में मोहाली में एक बार फ़िर ऑस्ट्रेलियाई टीम सामने थी और फ़िर वैसा ही मंजर.

जीत के लिए 216 रन के आगे 124 रन बनाने तक भारत के आठ विकेट गिर चुके थे. पीठ की चोट के कारण लक्ष्मण ने पहली पारी में 10वें नंबर पर बल्लेबाज़ी की थी.

लेकिन इस चोट के बावजूद लक्ष्मण ने कमान संभाला और दूसरे छोर पर ईशांत शर्मा के साथ ऑस्ट्रेलिया पर अपने चिर परिचित अंदाज़ में जवाबी हमला कर दिया.

ईशांत भी बहुत संयमित रहे. लेकिन जब जीत के लिए केवल 11 रन चाहिए थे तो ईशांत आउट हो गए. लक्ष्मण ने नाबाद 73 रन बनाए और भारत को एक विकेट से यादगार जीत दिलाई.

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा के बाद

15/5 की स्थिति से मैच बचाया

इसके बाद नवंबर में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ अहमदाबाद टेस्ट ड्रॉ की ओर बढ़ रहा था. दोनों टीमों के पास नतीज़े को बदलने के लिए कुछ खास नहीं थे.

चौथे दिन तक दोनों टीमें एक एक बार बल्लेबाज़ी कर चुकी थीं. लेकिन यहां से मैच का रुख बदला और भारतीय टीम ने केवल 15 रन बनाने में ही अपने पहले पांच विकेट गंवा दिए.

65 रनों पर छठा विकेट गिरने के बाद एक छोर पर लक्ष्मण तो दूसरी पर हरभजन खड़े थे. और यहां से इन दोनों के बीच एक नायाब साझेदारी हुई.

दोनों ही बल्लेबाज़ों ने शतक जड़ा और भारतीय टीम को एक शर्मनाक हार के मुंह से सुरक्षित बचा ले गए.

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption अपने परिवार के साथ वीवीएस लक्ष्मण

डरबन की कठिन पिच पर डटे लक्ष्मण

दिसंबर के महीने में डरबन की पिच पर दोनों टीमें जूझ रही थीं. पहले बल्लेबाज़ी कर रही भारतीय टीम 205 रनों पर आउट हो गई.

लक्ष्मण ने सर्वाधिक 38 रन बनाए. ज़हीर ख़ान और अन्य गेंदबाज़ों में शानदार बॉलिंग की और दक्षिण अफ़्रीका को महज 131 रनों पर आउट कर दिया.

दूसरी पारी में भी भारत 56 रनों पर चार विकेट गंवा चुका था. गेंदबाज़ों के वर्चस्व वाले इस टेस्ट में लक्ष्मण ने अपने बल्ले की कला दिखाते हुए भारत के लीड को 300 के पार पहुंचाया.

लक्ष्मण ने अंतिम तीन विकेट के साथ 80 रनों की साझेदारी की लेकिन खुद शतक जड़ने से चूक गए. लक्ष्मण 96 रनों पर आउट हुए.

लेकिन 303 का लक्ष्य अफ़्रीकी टीम के लिए बहुत बड़ा साबित हुआ और भारत ने यह मैच 87 रनों से जीत लिया.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे