पॉली उमरीगर को क्यों "पाम-ट्री हिटर" कहते थे वेस्टइंडियन?

  • 7 नवंबर 2017
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Image caption पॉली उमरीगर

भारतीय क्रिकेट में कपिल देव, सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह, महेंद्र सिंह धोनी जैसे क्रिकेटरों की आज क्रिकेट के चाहने वालों के बीच बिग हिटर के रूप में पहचान है, लेकिन कई लोगों को यह पता नहीं होगा कि 40-50 के दशक में पॉली उमरीगर की भी ऐसी ही शख़्सियत थी.

उमरीगर की तब बिग हिटर के रूप में पूरी दुनिया में पहचान थी. बिग हिटर के रूप में उमरीगर की यह ख़ास पहचान उनके क्रिकेट करियर (1948-62) के दौरान वेस्टइंडीज़ के दौरे पर उनकी बल्लेबाज़ी से बनी. वहां उन्हें 'पाम-ट्री हिटर' का उपनाम दिया गया.

विजय हज़ारे ने अपनी किताब 'माई स्टोरी' में उनकी बैटिंग का ज़िक्र करते हुए लिखा कि 'वो दो छक्के जिसने उमरीगर को शतक तक पहुंचाया.' हज़ारे यहां मद्रास टेस्ट का ज़िक्र कर रहे थे. ये वो पहला मौक़ा था, जब भारत ने पहली बार इंग्लैंड पर टेस्ट जीत दर्ज़ की थी. उमरीगर ने इस टेस्ट में नाबाद 130 रन बनाए थे.

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पहला दोहरा शतक जड़ने वाले बल्लेबाज़

उमरीगर ने 1953 में पोर्ट ऑफ़ स्पेन टेस्ट में भी छक्के से शतक पूरा किया था. पहलानजी रतनजी उमरीगर ने भारत के लिए 59 टेस्ट मैच खेले. उन्होंने 8 टेस्ट मैचों में कप्तानी भी की. संन्यास के वक़्त उमरीगर भारत की ओर से 12 शतकों की मदद से 42.22 की औसत से सर्वाधिक 3,631 रन बनाए.

उमरीगर सबसे पहले कम्बाइंड यूनिवर्सिटी के ख़िलाफ़ नाबाद 115 रनों की पारी खेल कर नज़र में आए. उमरीगर 50 से अधिक टेस्ट खेलने वाले पहले भारतीय क्रिकेटर भी थे. वो अपने समय में सर्वाधिक टेस्ट खेलने, सर्वाधिक रन बनाने और सर्वाधिक शतक जड़ने वाले भारतीय बल्लेबाज़ थे.

10 से अधिक शतक जड़ने वाले वो भारत के पहले बल्लेबाज़ थे, जिसे बाद में सुनील गावस्कर ने अपने नाम किया. इतना ही नहीं, टेस्ट क्रिकेट में किसी भी भारतीय क्रिकेटर के द्वारा जड़ा गया पहला दोहरा शतक (223) भी उमरीगर ने ही जड़ा था. जो उन्होंने नवंबर 1955 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ हैदराबाद टेस्ट में बनाया था.

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Image caption जैक हॉब्स के साथ पॉली उमरीगर

8 टेस्ट में भारत की कप्तानी

उमरीगर एक उम्दा ऑफ़ स्पिन गेंदबाज़ भी थे. टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 35 विकेट और 33 कैच भी लपके. 1954-55 में पाकिस्तान के दौरे पर बहावलपुर में उमरीगर ने गेंदबाज़ी में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. उन्होंने 74 रन देकर छह विकेट झटके.

अपने करियर के दौरान वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ 1962 में 56 और 172 रनों की पारी खेलने के साथ ही पांच विकेट भी चटकाए. हालांकि वो भारत को हार से बचा नहीं सके. ये वो ही दौरा था जब कप्तान नारी कॉन्ट्रैक्टर को बारबाडोस में चार्ली ग्रिफ़िथ की गेंद पर घातक चोट लगी थी. इस दौरे के बाद ही उमरीगर ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया.

उन्होंने 8 टेस्ट में भारत की कप्तानी की जिसमें भारत ने दो टेस्ट जीते जबकि चार ड्रॉ हुए. उनके नेतृत्व में बॉम्बे ने 1960-62 के दरम्यान लगातार तीन बार रणजी ट्रॉफ़ी पर कब्ज़ा किया. पीठ के पुराने दर्द के कारण उमरीगर को क्रिकेट से संन्यास लेना पड़ा.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर

1978-82 के बीच चयन समिति के अध्यक्ष, टीम मैनेजर और बीसीसीआई के कार्यकारी सचिव भी बने. उन्हें प्रतिष्ठित सीके नायडू पुरस्कार से भी नवाज़ा गया.

आज उमरीगर के नाम पर बीसीसीआई 2006 से प्रत्येक साल सर्वश्रेष्ठ भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर का पुरस्कार देती आ रही है जिसे अब तक सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर, राहुल द्रविड़, रविचंद्रन अश्विन, भुवनेश्वर कुमार और विराट कोहली जैसे क्रिकेटरों को प्रदान किया गया है.

28 मार्च 1926 को जन्मे उमरीगर का 7 नवंबर 2006 को निधन हो गया. वो लिंफ़ कैंसर से पीड़ित थे.

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