रोहित शर्मा इतनी लंबी पारियां कैसे खेलते हैं?

  • 14 दिसंबर 2017
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पहले सुनील गावस्कर, उनके बाद सचिन तेंदुलकर और फिर विराट कोहली, टीम इंडिया को हर दौर में बल्लेबाज़ी का सितारा मिला है.

और इन अलग-अलग दौर में इन सितारों की चमक तले कुछ ऐसे हीरो रहे, जो अपने दौर में अपने से बड़े हीरो की वजह से चमक के मामले में ज़रा पीछे रह गए.

गावस्कर के वक़्त गुंडप्पा विश्वनाथ, तेंदुलकर के समय वीरेंद्र सहवाग और इन दिनों रोहित शर्मा वहीं हीरो हैं.

टीम में रोहित की कीमत

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विश्वनाथ जहां फ़्लिक शॉट की वजह से जाने जाते हैं, सहवाग आक्रामक बल्लेबाज़ी के लिए मशहूर हुए और रोहित शर्मा वनडे क्रिकेट में लंबी पारियों के लिए शोहरत बटोर रहे हैं.

रोहित शर्मा इससे पहले भी दो बार वनडे मैचों में दोहरे शतक जड़ चुके हैं. उनके नाम अंतरराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर दर्ज है.

साल 2014 में कोलकाता के इडेन गार्डन्स मैदान पर श्रीलंका के ख़िलाफ़ ही उन्होंने 264 रनों की रिकॉर्डतोड़ पारी खेली थी.

वहीं इससे पहले साल 2013 में बंगलुरू के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया गेंदबाज़ी को तहस-नहस करते हुए 209 रनों की पारी खेली थी.

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रोहित के अलावा सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग दो अन्य भारतीय हैं जिन्होंने वनडे मैचों में दोहरा शतक लगाया है.

अंतरराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट का पहला दोहरा शतक मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर के बल्ले से निकला था. उन्होंने साल 2010 में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ 200 रनों की पारी खेली थी.

इसके बाद साल 2011 में वीरेंद्र सहवाग ने वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ शानदार बल्लेबाज़ी करते हुए 219 रन ठोक डाले थे.

रोहित 'टैलेंट' लफ़्ज़ से सराहे भी जाते हैं और तंज़ भी झेलते हैं, लेकिन सवाल है कि वो इतनी लंबी पारियां खेलते कैसे हैं? मोहाली में अपने वनडे करियर का तीसरा दोहरा शतक लगाने के बाद उन्होंने इस सवाल का कुछ-कुछ जवाब दिया.

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रोहित ने कहा, ''मैं हालात का विश्लेषण कर रहा था जो शुरुआत में आसान नहीं थे. मैं कुछ ओवर निकालना चाहता था. मैं एबी डीविलयर्स, क्रिस गेल या धोनी जैसा नहीं हूं. मेरे पास इतनी पावर नहीं है.''

फ़ील्ड कैसे भेदते हैं रोहित?

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''मुझे अपने दिमाग का इस्तेमाल करते हुए फ़ील्ड के मामले में तिकड़म लगानी होती है और मैं लाइन के हिसाब से खेलता हूं जो मेरी ताक़त है.''

153 गेंदों में 208 रनों की इस पारी में रोहित शर्मा ने छक्कों की मदद से 40 से 50 ओवर के बीच रन बनाने की रफ़्तार काफ़ी बढ़ा दी थी. इस पारी में उन्होंने 13 चौक्के और 12 छक्के लगाए.

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लेकिन ये आसान नहीं होता. उन्होंने कहा, ''छक्के मारना आसान नहीं है, विश्वास कीजिए. ये काफ़ी अभ्यास और कड़ी मेहनत के बाद आता है. क्रिकेट में कुछ भी आसान नहीं होता. टीवी पर भले आसान लगे.''

शतक से दोहरे शतक तक

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रोहित ने अपना सैकड़ा भारतीय पारी के 40वें ओवर में पूरा किया था और दोहरा शतक पूरा होने पर भारतीय पारी का 50वां ओवर चल रहा था.

115 गेंदों में पहला शतक और महज़ 36 गेंदों में दूसरा शतक, रोहित की लंबी पारियों का राज़ इन्हीं आंकड़ों से समझा सकता है. और उनके करियर के आंकड़े भी बताते हैं कि वो अपनी पारी को किस कलाकारी से सजाते हैं.

10 साल लंबे करियर में रोहित ने अब तक 16 शतक लगाए हैं जिनमें से तीन को वो 200 के पार ले जाने में कामयाब रहे. वनडे क्रिकेट ने ऐसे कई बल्लेबाज़ देखे हैं कि जो शतक लगाने के तुरंत बाद पवेलियन लौट जाते हैं.

बड़ी पारियों के सरदार

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लेकिन रोहित ऐसे नहीं हैं. 16 शतकों में वो 13 बार 120 रन के पार गए हैं सात दफ़ा 130 से आगे. तीन दोहरे शतकों के अलावा वो 171, 150 और 147 रनों की पारी भी खेल चुके हैं. मतलब ये कि अगर वो शतक तक पहुंचते हैं तो आसानी से क्रीज़ नहीं छोड़ते.

और स्कोर करने की रफ़्तार में वो वही तरीका अपनाते हैं जिसके लिए सचिन, कोहली या महेंद्र सिंह धोनी जाने जाते रहे हैं. सैकड़े तक अच्छी-ख़ासी गेंद खेलना और उसके बाद आक्रामक हाथ दिखाना.

और शॉट चुनने के लिए वो एरिया चुनना, जहां बाउंड्री की दूरी सबसे कम हो. यूं भी कहा जाता है कि भारतीय टीम में उनसे अच्छा पुल शॉट कोई नहीं खेलता और इसी शॉट के बदौलत वो आसानी से छक्के बटोरते हैं.

पुल और स्कूप का दमख़म

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पुल या हुक के अलावा एक शॉट जो उन्होंने काफ़ी इस्तेमाल करना शुरू किया है, वो है स्कूप. मोहाली में खेली गई पारी के बाद उन्होंने ख़ुद इस शॉट का ख़ास ज़िक्र किया.

कोहली इन दिनों शादी के बाद वक़्त गुज़ार रहे हैं लेकिन रोहित की पारी ने मोहाली में उनकी कमी ज़रा नहीं खलनी दी.

देखना है कि 2010 में अपना पहला शतक और 2013 में पहला दोहरा शतक लगाने वाले रोहित आगे क्या रंग दिखाते हैं?

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