'ये तो लॉयड और वॉ की टीम लगती है'

  • 4 फरवरी 2018
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सबसे बड़ी बात मैने कभी जूनियर स्तर पर किसी भी टीम को इतने आक्रामक अंदाज़ में लगातर खेलते नही देखा.

यह तो जैसे सीनियर ऑस्ट्रेलिया की टीम जो स्टीव वॉ की कप्तानी में खेल रही थी, या वेस्ट इंड़ीज़ की क्लाइव लॉयड की टीम थी, उसी तरह से खेली है.

इस टीम ने तो किसी भी विरोधी टीम को कोई चांस ही नही दिया, एकतरफा जीती है.

यह कहना है क्रिकेट समीक्षक प्रदीप मैगज़ीन का उस अंडर-19 भारतीय क्रिकेट के बारे में जिसने शनिवार को न्यूज़ीलैंड में खेले गए फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से हराकर चौथी बार अंडर-19 विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट का ख़िताब अपने नाम किया.

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इस मुक़ाबले में ऑस्ट्रेलिया टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 47.2 ओवर में 216 रन पर सिमट गई.

इसके बाद भारत ने जीत का लक्ष्य सलामी बल्लेबाज़ मनजोत कालरा के नाबाद 101 रनों की शतकीय पारी की मदद से केवल 38.5 ओवर में ही हासिल कर लिया.

भारतीय टीम पूरे टूर्नामेंट में अजेय रही.

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'बड़ी उपलब्धि'

ग्रुप मैच में तो भारत ने ऑस्ट्रेलिया को पूरे 100 रन से और सेमीफाइनल में पाकिस्तान को 69 रनों पर समेटते हुए 203 रन से हराया.

भारतीय टीम के ऐसे प्रदर्शन को लेकर प्रदीप मैगज़ीन का मानना है कि यह तो भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है.

सीनियर्स को चुनौती?

प्रदीप मैगजीन कहते हैं कि यह तो अंडर-19 टीम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम है. इस टीम में तो कुछ ऐसे बल्लेबाज़ ही नही ऐसे गेंदबाज़ भी है जो इतनी रफ्तार से गेंद कर रहे है जो सीनियर लेवल पर भी नही देखने को मिलता.

कमलेश नागरकोटी, शिवम मावी, ईशान पोरेल तो ऐसे तेज़ गेंदबाज़ है जिनके बारे में क्रिकेट पंडित कह रहे है कि यह तो अभी से सीनियर टीम के गेंदबाज़ों को चुनौती दे सकते है.

प्रदीप मैगज़ीन इस ख़िताबी जीत का श्रेय भारत के पूर्व कप्तान और इस टीम के कोच राहुल द्रवि़ड़ को देते हुए कहते है कि वह बड़े शांत स्वभाव के है. उनका प्रभाव इस टीम पर रहा होगा.

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इस टीम के खिलाड़ी युवा है, वह डगमगा सकते है क्योंकि ग्लैमर यानी चकाचौंध इतनी है.

राहुल द्रविड़ तो ख़ुद ही सुलझे हुए और करिश्माई खिलाड़ी हैं, उनका सकारात्मक असर टीम पर दिखता है.

प्रदीप मैगज़ीन चेतावनी देते हुए कहते है कि अंडर-19 स्तर पर तो बहुत से बेहतरीन खिलाड़ी रहे है लेकिन सीनियर लेवल पर वह अपने आपको संभाल नही सके.

छोटी उम्र में मिली शोहरत वह संभाल नही पाते और अनुशासन नही रख पाते.

यह तो विश्व कप था, इसलिए इसकी चर्चा बहुत है वरना तो अंडर-19 लेवल पर क्या हो रहा है इसका पता ही नही चलता.

यह तो राहुल द्रविड़ की क्रिकेट के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाता है, जिसका फ़ायदा भारतीय क्रिकेट को बहुत हुआ.

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अंडर-19 विश्व कप में बाकी टीमों के खेल को लेकर प्रदीप मैगज़ीन का मानना है कि कप्तान पृथ्वी शॉ के अलावा दूसरे कई खिलाड़ियों को जो अनुभव है वह और टीमों के पास नही है.

प्रदीप मैगज़ीन का कहना है कि जूनियर स्तर पर भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के पास अनुभव की कोई कमी नहीं होती.

जहां तक पृथ्वी शॉ और दूसरे खिलाड़ियों की बात है तो वह प्रथम श्रेणी की क्रिकेट में ही भारत के सारे अनुभवी खिलाड़ियों के साथ खेल चुके हैं.

इससे भी भारतीय खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बेहद ऊंचा था साथ में राहुल द्रविड़ का होना तो सोने पर सुहागे जैसा रहा.

अब इस टीम के कुछ खिलाड़ी आईपीएल में भी खेलते नज़र आएंगे.

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इसे लेकर प्रदीप मैगज़ीन थोड़ी चिंता जताते हुए कहते है कि उन्हें डर लगता है कि जो तेज़ गेंदबाज़ 17-18 साल की उम्र में 140 की रफ्तार से गेंद कर रहे हैं उनका आत्मविश्वास वहां की फ्लैट और मदद ना करने वाली विकेट पर कहीं खो ना जाए.

मैगजीन का कहना है कि वो ये नहीं कह रहे हैं कि ये युवा खिलाड़ी आईपीएल में न खेलें.

वैसे प्रदीप मैगज़ीन अंत में यह भी मानते हैं कि भारत के अंडर-19 विश्व कप जीतने से आईसीसी के इस स्तर के टूर्नामेंट की टीआरपी भी बेहद बढ़ जाती है और पैसा भी बरसता है..

अगर भारत फ़ाइनल में नही होता तो शायद इसकी आधी टीआरपी भी नही होती.

प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं कि बस एक बात का ख़्याल रखा जाना चाहिए कि अभी से इनकी तुलना विराट कोहली और भुवनेश्वर कुमार से ना की जाए.

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