एम एस धोनी की मेहनत पर चहल ने कैसे पानी फेर दिया?

  • 22 फरवरी 2018
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जीत का मंच तैयार था. सेंचुरियन के मैदान में टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी करने उतरी भारतीय टीम अपने खाते के 20 ओवर ख़त्म होते-होते उस स्कोर तक पहुंच गई, जहां मैच और 2-0 से टी-20 सिरीज़ में जीत नज़र आने लगी थी.

कप्तान विराट कोहली के लिए 188 का मज़बूत स्कोर इसलिए भी तसल्ली देने वाला था क्योंकि अब तक धूम मचा रहा शीर्ष क्रम लड़खड़ाया तो मध्य क्रम ने गच्चा नहीं दिया.

रोहित शर्मा सिफ़र, विराट कोहली 1 और शिखर धवन 24 रन बनाकर आराम करने लौट चुके थे. स्कोर था 45 रन पर तीन.

फिर मनीष पांडे और सुरेश रैना ने पारी को संभाला और टीम को 90 रनों तक ले गए.

रैना के बाद आए धोनी

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11वें ओवर में जब रैना आउट हुए तो लगा कि एक बार फिर भारतीय टीम का मध्य क्रम चकराएगा और टीम 150 रन तक पहुंच जाए तो ग़नीमत है.

लेकिन पांडे का साथ देने आए महेंद्र सिंह धोनी ने कुछ और सोच रखा था.

उनकी बल्लेबाज़ी और पारी को फ़िनिशिंग टच देने को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे थे और धोनी ने अपनी पारी से जवाब देने का फ़ैसला किया. शुरू में धीमे खेले तो प्रशंसक निराश होने लगे.

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16वें ओवर में भारत का स्कोर सिर्फ़ 133 रन था और मुक़ाबला करने लायक रन काफ़ी दूर दिख रहे थे. लेकिन यहीं से मोमेंटम बदलना शुरू हुआ.

पुराने धोनी की झलक दिखी और मनीष पांडे के बल्ले में हौसला भी. 17वें ओवर में 13 रन बटोरे गए. 18वें ओवर में पांडे ने चौकों के ज़रिए 11 रन बनाए.

तेज़ रफ़्तार बल्लेबाज़ी

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एक शानदार छक्के और चौक्के के साथ धोनी ने 19वें ओवर में 13 रन खींचे और आख़िरी ओवर फेंकने आए पैटरसन भी धोनी के सामने ग़लत पड़ गए.

इस ओवर में धोनी ने एक छक्के और दो बाउंड्री से कुल 18 रन लिए. टीम का स्कोर पहुंच गया 188 पर. धोनी ने 28 गेंदों में 52 रन बनाए जबकि पांडे ने 48 बॉल खेलकर 79 रन.

बारिश के मौसम में पहले बल्लेबाज़ी का नुकसान होता है, लेकिन भारतीय टीम ऐसे स्कोर तक पहुंच चुकी थी जहां दक्षिण अफ़्रीका को दबाव में लाया जा सकता था.

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इस मैदान पर पहले बल्लेबाज़ी करने वाली टीम छह मैच जीती थी जबकि चेज़ करने वाली टीम एक बार और पहली पारी का औसत स्कोर रहा था 171 रन.

गेंदबाज़ी भी अच्छी थी

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ऐसे में जब इंडियन टीम गेंदबाज़ी के लिए उतरी तो कोहली काफ़ी कॉन्फ़िडेंट नज़र आ रहे थे. गेंदबाज़ भी सॉलिड दिख रहे थे. और शुरुआत भी ज़ोरदार रही. भुवनेश्वर कुमार और शारदुल ठाकुर ने अफ़्रीकी बल्लेबाज़ों को बांधे रखा.

पांच ओवर बीतने के बाद प्रोटियस 38 रन पर दो विकेट गंवा चुके थे. और टीम इंडिया को जीत दिखने लगी थी. लेकिन मैच में अभी काफ़ी कुछ बचा था.

इसके बाद जो हुआ, खेल वहीं से पलटा. दक्षिण अफ़्रीका ने आक्रामक विकेटकीपर बल्लेबाज़ हेनरिक क्लासेन को भेजने का फ़ैसला किया. और उन्होंने आते ही काउंटर अटैक शुरू कर दिया.

जयदेव उनदकट के ओवर में उन्होंने 12 रन लिए. लेकिन क्लासेन ने असली हमला बोला यज़ुवेंद्र चहल के ख़िलाफ़. चहल के पहले ओवर में उन्होंने 12 रन बटोरे.

क्लासेन ने बिगाड़ा खेल

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इसमें एक लंबा छक्का शामिल था. ये आठवां ओवर था. इसके बाद 11वें ओवर में विराट कोहली ने एक बार फिर क्लासेन के सामने चहल को गेंद थमाई.

और इस बार भी क्लासेन के तलवार की तरह चल रहे बल्ले के सामने चहल की कोई चालाकी नहीं चली. पहली और चौथी गेंद पर दो छक्के. ओवर में आए 16 रन.

एक दर्शक ने लिखा, ''क्लासी क्लासेन मुझे लांस क्लूसनर की याद दिला रहे हैं.'' दक्षिण अफ़्रीका के हरफ़नमौला खिलाड़ी क्लूसनर अपनी आक्रामक बल्लेबाज़ी के लिए जाने जाते थे.

ये बात सही है कि दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ वनडे सिरीज़ में चहल ने कुलदीप यादव के साथ शानदारी गेंदबाज़ी की थी.

चहल ने क्या गलतियां की?

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लेकिन छह मैचों की सिरीज़ में जो एक मैच हारा था, उसमें भी चहल की काफ़ी पिटाई हुई थी. बारिश से बाधित और ओवर घटने वाले मैच में चहल अक्सर परेशानी में आ जाते हैं.

लेकिन कोहली ने एक बार फिर इस बात को नज़रअंदाज़ करते हुए जुआ खेलना चाहा. क्लासेन पूरे रंग में थे.

13वां ओवर फिर चहल को फेंकने के लिए दे दिया. और क्लासेन ने तय कर लिया था कि वो ये मौक़ा नहीं छोड़ेंगे.

पहली गेंद पर स्लॉग स्वीप और छक्का. दूसरी गेंद पर भी लंबा छक्का, इस बार मिडविकेट पर. तीसरी गेंद पर चौक्का, वो भी रिवर्स स्वीप.

सारा मैच बदल गया

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दो गेंद पर एक रन आया और फिर आख़िरी गेंद पर संयमित पारी खेल रहे कप्तान जे पी ड्यूमिनी ने एक और छक्का लगाकर ज़ख्मों पर नमक छिड़क दिया.

ओवर से आए कुल 23 रन और अब अफ़्रीकी टीम को 42 बॉल पर सिर्फ़ 58 रन बनाने थे.

इससे अगला ओवर उनदकट ने फेंका और पहली गेंद पर क्लासेन को आउट कर दिया. अगला ओवर हार्दिक पंड्या ने फेंका और ख़तरनाक मिलर को पवेलियन लौटा. लेकिन कोहली का चहल प्रेम एक बार फिर स्पिनर की तरफ़ खींच लाया.

16वां ओवर फेंकने आए चहल ने ड्यूमिनी को पहली गेंद बाहर फेंकी और उन्होंने बाउंड्री पार पहुंचाने में ज़रा देर नहीं लगाई. इसके बाद बहरदीन ने उन पर छक्का लगाया.

चहल का स्पेल कितना महंगा

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इस ओवर से आए 14 रन. और इसी ओवर में तय हो गया था कि भारतीय टीम के हाथ से जीत निकल चुकी है.

इसके बाद बचे 33 रन बनाने के लिए 24 गेंद बची थी, लेकिन ड्यूमिनी ने 18 गेंद में ही खेल ख़त्म कर दिया.

चहल के इस स्पैल ने भारत की झोली से मैच बाहर निकाल दिया. साल 2017 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ 25 रन देकर छह विकेट लेने का रिकॉर्ड बनाने वाले चहल ने इस मैच में चार ओवर में बिना कोई विकेट लिए 64 रन दिए.

कोहली की भी ग़लती

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चहल ने इस टूर के छह जीते हुआ मैचों में 16 विकेट लिए हैं और छह छक्के खाए. लेकिन जिन दो मैचों में भारत को हार का सामना करना पड़ा, उनमें स्पिनर को सिर्फ़ एक विकेट मिली और वो भी 13 छक्के खाकर.

लेकिन सारी ग़लती चहल की नहीं है. उनके शुरुआती दो ओवर के बाद समझ आ गया था कि वो रंग में नहीं हैं. और अफ़्रीकी बल्लेबाज़ उन्हें निशाना बना रहे हैं.

इसके बावजूद कोहली ने चहल को ओवर देने जारी रखे और बल्लेबाज़ों ने उनकी धुनाई जारी रखी. ख़ास तौर से क्लासेन ने चहल को ज़रा भी सेटल नहीं होने दिया.

तेज़ गेंदबाज़ स्पिनर से ज़्यादा अच्छी गेंदबाज़ी कर रहे थे, लेकिन कोहली ने रिस्क लिया और जुआ हारा भी. कप्तान शायद ये भी भूल गए कि रैना भी टी20 में अच्छी गेंदबाज़ी कर लेते हैं.

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