क्यों क़ानूनी मुश्किल में फँस गए हैं क्रिकेटर हार्दिक पंड्या?

हार्दिक पंड्या इमेज कॉपीरइट TWITTER

भारतीय क्रिकेटर हार्दिक पंड्या उस कथित ट्वीट को लेकर क़ानूनी मुश्किल में फंस गए हैं, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वो उनके एक फ़र्जी ट्विटर अकाउंट से पोस्ट किया गया था.

जोधपुर की एक अदालत ने डॉक्टर बीआर आंबेडकर के ख़िलाफ इस कथित ट्वीट को लेकर हार्दिक पंड्या के ख़िलाफ़ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने का आदेश किया है.

दरअसल हार्दिक पंड्या का असली ट्विटर हैंडल @hardikpandya7 है, जबकि कहा जा रहा है कि आंबेडकर पर जो कथित ट्वीट किया गया था, वो @sirhardik3777 नाम के ट्विटर हैंडल से किया गया था.

कोर्ट के आदेश के मुताबिक मामला एससी/एसटी अत्याचार निवारण क़ानून के तहत दर्ज किया जाएगा.

हालांकि कोर्ट ने ये आदेश जोधपुर के केडीआर मेघवाल की याचिका पर सुनाया है. उन्होंने पंड्या पर डॉक्टर आंबेडकर का अपमान करने का आरोप लगाया था.

हालांकि जब उनको ये बताया गया कि आंबेडकर पर कथित ट्वीट को उनके फ़र्ज़ी अकाउंट से किया गया था, उस पर मेघवाल का ये कहना था कि जो भी असामाजिक तत्व इसके पीछे है, उसे सज़ा मिलनी चाहिए.

साथ में उन्होंने ये भी कहा कि क्रिकेटर हार्दिक पंड्या ने इस पर अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है.

याचिका के मुताबिक़ पिछले साल 26 दिसंबर के एक ट्वीट में पूछा गया था, 'कौन आंबेडकर?'

आरोप है कि इस ट्वीट में आरक्षण को लेकर डॉक्टर आंबेडकर पर कथित रूप से तीखी टिप्पणी की गई थी.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

नहीं मिली है कि हार्दिक की प्रतिक्रिया

याचिकाकर्ता मेघवाल ने अदालत में कहा कि क्रिकेटर पंड्या ने न केवल आंबेडकर के लिए अपमानजनक बातें कहीं बल्कि ये समुदायों में नफ़रत पैदा करने की कोशिश भी है.

मेघवाल ने अदालत से ये भी कहा कि अगर इसमें फ़ेक अकाउंट का इस्तेमाल किया गया है तो भी ये गंभीर बात है और इसमें कार्रवाई की जानी चाहिए.

मेघवाल ने बीबीसी से कहा, "इस ट्वीट की जानकारी सोशल मीडिया से मिली. इसके बाद मैं क्षेत्र के लूणी पुलिस स्टेशन गया और पुलिस से कार्रवाई करने को कहा. लेकिन पुलिस ने साफ़ इनकार कर दिया."

इमेज कॉपीरइट Narayan Bareth

मेघवाल ने लूणी थाने के तत्कालीन थाना अधिकारी राजेंद्र सिंह के ख़िलाफ भी शिकायत की है.

मेघवाल ने कहा कि वो टिप्पणी से बहुत आहत हुए हैं और ऐसी टिप्पणी देश के ख़िलाफ़ अपराध है.

कोर्ट ने जोधपुर की लूणी पुलिस से दंड प्रक्रिया संहिता 156 (3) के तहत मामला दर्ज करने को कहा है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार