किसी और की ख़ुराफ़ात, फंस गए हार्दिक पांड्या

  • 23 मार्च 2018
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भारतीय क्रिकेटर हार्दिक पांडया ने सफाई दी है उन्होंनें वो ट्वीट नहीं किया था जिसमें डॉ. भीमराव आंबेडकर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी.

उन्होंने कहा कि ये कथित ट्वीट एक फेक अकाउंट से किया गया था जिसमें उनका नाम इस्तेमाल किया गया है.

जिस ट्वीट पर पांड्या सफाई दे रहे हैं उसपर जोधपुर की अदालत ने उन पर अपराधिक मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे.

मुश्किल में फंसे हार्दिक ने कहा कि 'वो' ट्वीट उन्होंने नहीं किया था और वो डॉ. भीमराव आंबेडकर का काफ़ी सम्मान करते हैं.

वे लिखते हैं, मीडिया में कई रिपोर्ट और लेख छप रहे हैं, जिसमें आरोप लगाया जा रहे है कि उन्होंने बी आर आंबेडकर पर आपत्तिजनक ट्वीट किया है.

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उन्होंने कहा, "मैंने ऐसा कोई भी ट्वीट नहीं किया है. वो ट्वीट मेरे नाम और तस्वीर का प्रयोग कर फर्जी ट्विटर अकाउंट से किया गया है."

"मैं किसी भी ऑफिशियल बयानबाजी के लिए वेरिफाइड ट्विटर अकाउंट का ही इस्तेमाल करता हूं."

"मेरे मन में भी भारतीय संविधान और डॉ. भीमराव आंबेडकर के लिए काफी सम्मान है. भारत में रहने वाले सभी समुदायों का मैं सम्मान करता हूं.''

''मैं किसी के ख़िलाफ या किसी की भावनाओं को आहत पहुंचाने वाला या उनका अपमान करने वाला बयान नहीं देता हूं."

उन्होंने आगे कहा, "मैं सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपने प्रशंसकों से जुड़ने के लिए करता हूं. और मुझे लगता है कि सोशल मीडिया की दुनिया में गलत जानकारी के प्रति लोगों को सचेत रहना चाहिए और संभलकर प्रतिक्रिया देनी चाहिए."

"मैं न्यायालय में सभी आवश्यक दस्तावेज़ पेश कर सकता हूं जिससे ये साबित हो जाएगा कि मैंने ऐसा कोई ट्वीट नहीं किया है, जिसके लिए मुझे ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है.

दरअसल हार्दिक पंड्या का असली ट्विटर हैंडल @hardikpandya7 है, जबकि कहा जा रहा है कि आंबेडकर पर कथित ट्वीट @sirhardik3777 नाम के ट्विटर हैंडल से किया गया था.

हालांकि ये ट्विटर अकाउंट ट्विटर पर अब मौजूद नहीं दिख रहा है.

इसके बाद जोधपुर की एक अदालत ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के ख़िलाफ इस कथित ट्वीट को लेकर हार्दिक पंड्या के ख़िलाफ़ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था.

क्यों क़ानूनी मुश्किल में फँस गए हैं क्रिकेटर हार्दिक पंड्या?

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कोर्ट के आदेश के अनुसार मामला एससी/एसटी अत्याचार निवारण क़ानून के तहत दर्ज किया गया है.

कोर्ट ने ये आदेश जोधपुर के केडीआर मेघवाल की याचिका पर दिया था.

याचिका के मुताबिक़ पिछले साल 26 दिसंबर के एक ट्वीट में पूछा गया था, 'कौन आंबेडकर?'

आरोप है कि इस ट्वीट में आरक्षण को लेकर डॉ. आंबेडकर पर कथित रूप से तीखी टिप्पणी की गई थी.

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