नाराज़ निशानेबाज़ क्या सटीक साबित होंगे

  • 28 मार्च 2018
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Image caption हिना सिद्धू

साल 1994 में एशियाई खेलों का आयोजन जापान के हिरोशिमा शहर में हुआ.

वहां से ख़बर आई कि निशानेबाज़ी की स्पर्धा में जसपाल राणा की पिस्टल जाम हो गई है. ऐसा शायद ही कभी हुआ हो.

जब जसपाल राणा वापस भारत लौटे तो बेहद नाराज़ थे कि खिलाड़ियो को ढ़ंग की सुविधाए भी नही मिलती है.

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साल 2022 में राष्ट्रमंडल खेलों में निशानेबाज़ी नही

वही जसपाल राणा इन दिनों भी इस बात से नाराज़ है कि अगले राष्ट्रमंडल खेल जिनका आयोजन साल 2022 में इंग्लैंड के बर्मिंघम में होना है, वहां निशानेबाज़ी शामिल नही है.

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Image caption अंजली भागवत

उन्होंने तो भारतीय खिलाडियों से इन खेलों के बहिष्कार की अपील भी की जिसका विरोध करते हुए स्टार निशानेबाज़ जीतू राय ने कहा कि ऐसा करना ठीक नही है.

निशानेबाज़ी फ़िर इन खेलों में शामिल हो सकती है.

अब काफी भारी मन से भारतीय निशानेबाज़ गोल्ड कोस्ट ऑस्ट्रेलिया में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में जाएंगे.

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Image caption जसपाल राणा अपने पदकों के साथ

कुछ भी हो भारत में निशानेबाज़ी को लोकप्रिय बनाने में सबसे पहला नाम जसपाल राणा का ही है.

उन्होंने साल 1994 में कनाडा में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में अपनी चमक बिखेरी थी.

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जसपाल राणा ने दी भारतीय निशानेबाज़ी को नई दिशा

जसपाल राणा ने वहां सेंटर फायर पिस्टल में स्वर्ण, सेंटर फायर पिस्टल युगल में अशोक पंडित के साथ मिलकर स्वर्ण, एयर पिस्टल में रजत और एयर पिस्टल युगल में विवेक सिंह के साथ मिलकर कांस्य पदक जीता था.

इसी साल उन्होंने जापान में हुए एशियाई खेलों में भारत को 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल में स्वर्ण और इसी स्पर्धा के टीम वर्ग में कांस्य पदक दिलाया.

बस उसके बाद से भारतीय निशानेबाज़ों ने पीछे मुडकर नही देखा.

उसके बाद तो राज्यवर्धन सिंह राठौर, अभिनव बिंद्रा, गगन नारंग, अंजलि भागवत और विजय कुमार के अलावा ढेरों निशानेबाज़ अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे हैं.

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Image caption अभिनव बिंद्रा

21वें राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय निशानेबाज़ो से पदकों की उम्मीद सबसे अधिक रहेगी.

निशानेबाज़ी में 19 स्वर्ण, 19 रजत और 19 कांस्य पदक सहित कुल 57 पदक दांव पर होंगे.

इस बार निशानेबाज़ी में 10 मीटर एयर पिस्टल, 10 मीटर एयर राइफल, 25 मीटर पिस्टल (केवल महिला वर्ग ), 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल (केवल पुरुष वर्ग ), 50 मीटर पिस्टल (केवल पुरुष), 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन, 50 मीटर राइफल प्रोन, ट्रैप, डबल ट्रैप, स्कीट और क्वींस प्राइज़ शामिल है.

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Image caption हिना सिद्धू के साथ अन्नू राज सिंह

राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय निशानेबाज़ों का दबदबा

राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय निशानेबाज़ों के दबदबे का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि भारत ने आज तक 56 स्वर्ण, 40 रजत और 22 कांस्य पदक सहित 118 पदक अपने नाम किए हैं.

भारत ने पिछले राष्ट्रमंडल खेल साल 2014 ग्लास्गो में निशानेबाज़ी में 4 स्वर्ण, 9 रजत और 4 कांस्य पदक सहित 17 पदक जीते थे.

अभिनव बिंद्रा ने पुरूषों की 10 मीटर एयर राइफल, अपूर्वी चंदेला ने इसी स्पर्धा के महिला वर्ग, राही सरनोबत ने 25 मीटर पिस्टल और जीतू राय ने 50 मीटर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीता.

जीतू राय ने तो साल 2014 में एशियाई खेलों में भी 50 मीटर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीता.

जीतू राय 10 मीटर एयर पिस्टल में भी हिस्सा लेंगे.

जीतू राय, अपूर्वी चंदेला, मनु भाकर, गगन नारंग और हिना सिद्धू से उम्मीदें

जीतू राय के अलावा बेहद अनुभवी गगन नारंग 50 मीटर राइफल प्रोन में, मानवजीत सिंह संधू ट्रैप में, अपूर्वी चंदेला 10 मीटर एयर राइफल में, हिना सिद्धू 10 मीटर एयर पिस्टल और 25 मीटर पिस्टल में और मनु भाकर 10 मीटर एयर पिस्टल में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद है.

युवा मनु भाकर तो अभी 12वीं कक्षा की छात्रा है, लेकिन पिछले दिनों उनकी कामयाबी की दास्तान घर-घर में सुनाई दी.

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Image caption मनु भाकर

उन्होंने आईएसएसएफ विश्व निशानेबाज़ी चैंपियनशिप में 10 मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीता है.

इतना ही नही उन्होंने पिछले सप्ताह सिडनी में हुए जूनियर निशानेबाज़ी विश्व कप में भी स्वर्ण पदक जीता है.

बेहद अनुभवी गगन नारंग ने पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता था.

जबकि इससे पहले साल 2010 में दिल्ली में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में तो उन्होंने चार स्वर्ण पदक जीतने में अपना योगदान दिया था.

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बीबीसी न्यूज़मेकर्स

मानवजीत सिंह संधू ट्रैप स्पर्धा में महारत हासिल रखते हैं.

पिछले खेलों में उन्होंने कांस्य पदक जीता था. इस बार वह इससे आगे जाना चाहेंगे.

25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में महिला वर्ग में साल 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों में राही सरनोबत ने स्वर्ण और अनीसा सय्यद ने रजत पदक जीता था.

इस बार यह दोनो ही खिलाड़ी भारतीय दल में नही है.

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ऐसे में इस स्पर्धा में सारा दारोमदार हिना सिद्धू और अनुराज सिंह पर होगा.

टेस्ट इवेंट में चमकी हिना सिद्धू और अनुराज सिंह

हिना सिद्धू ने साल 2017 में ब्रिस्बेन में हुई राष्ट्रमंडल निशानेबाज़ी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था.

लेकिन उन्होंने यह उपलब्धि 10 मीटर एयर पिस्टल में हासिल की. उनका मानना है कि असली चुनौती तो पिस्टल स्पर्धा में है.

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Image caption हिना सिद्धू

इस चैंपियनशिप में अनुराज सिंह ने कांस्य पदक भी जीता. हिना सिद्धू ने इसके अलावा पिछले साल दिल्ली में हुए विश्व कप में भी स्वर्ण पदक जीता था.

अनुराज सिंह का उस अनुभव को लेकर मानना है कि यह दरअसल मुख्य राष्ट्रमंडल खेलों की टेस्ट इवेंट था.

यह उसी रेंज और उसी स्थान पर आयोजित हुआ जहां निशानेबाज़ी के मुक़ाबले होने है.

वहां भारत और पुरूष निशानेबाज़ों ने 6 स्वर्ण 7 रजत और 7 कांस्य पदक सहित कुल 20 पदक जीते. भारत पहले स्थान पर भी रहा.

ज़ाहिर है वहां का अनुभव भारत के काम आएगा.

यह है भारतीय निशानेबाज़ो का दल

वैसे भारतीय दल में 10 मीटर राइफल में दीपक कुमार और रवि कुमार, 10 मीटर एयर पिस्टल और 50 मीटर पिस्टल में जीतू राय और ओम प्रकाश मिथरवाल, 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन में संजीव कुमार और चैन सिंह और 50 मीटर राइफल प्रोन में चैन सिंह और गगन नारंग अपना दावा पेश करेंगे.

महिला वर्ग में 10 मीटर एयर राइफल में अपूर्वी चंदेला और मेहूली धोष, 10 मीटर एयर पिस्टल में मनु भाकर और हिना सिद्धू, 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन और 50 मीटर राइफल प्रोन में अंजुम मुद्गिल और तेजस्विनी सावंत, और डबल ट्रैप में श्रेयसी सिंह और वर्षा वर्मा अपने निशाने साधेंगी.

इनके अलावा अनीश भानवाला 25 मीटर रैपिड, नीरज कुमार फायर पिस्टल, मानवजीत सिंह संधु और क्यान चेनाई ट्रैप, मोहम्मद असब और अंकुर मितल डबल ट्रैप और समित सिंह और सिराज शेख स्कीट स्पर्धा में हिस्सा लेंगे.

महिलाओं में हिना सिद्धू और अनुराज सिंह 25 मीटर पिस्टल, श्रेयसी सिंह और सीमा तोमर ट्रैप और सानिया शेख और महेश्वरी चौहान स्कीट में निशाना साधेंगी.

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