वेटलिफ्टिंग में दिखा है दम और डोप का दंश

  • 29 मार्च 2018
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Image caption गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेल 2018

राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने वेटलिफ्टिंग में एक तरफ जहां पदकों के अंबार लगाए हैं, वही डोपिंग के डंक ने भी इस खेल को बहुत डँसा है.

यहां तक कि कई भारतीय वेटलिफ्टर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधों का सामना भी कर चुके है.

एक बार तो भारतीय वेटलिफ्टिंग फेडेरेशन पर विश्व वेटलिफ्टिंग फेडेरेशन ने लाखो डॉलर का ज़ुर्माना भी लगाया.

उसे भरने के बाद ही भारतीय वेटलिफ्टर राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा ले सके.

उसका ख़ामियाज़ा शर्मिंदगी के साथ-साथ भारतीय वेटलिफ्टिंग फेडेरेशन पर प्रतिबंध के रूप में भारत को भुगतना पड़ा.

जब छाया भारत की वेटलिफ्टिंग पर डोप का साया

डोपिंग में भारत के सतीश राय का नाम साल 2002 के राष्ट्रमंडल खेलों में सामने आया.

इसके बाद उनका स्वर्ण पदक भी छीन लिया गया था.

इसके बाद साल 2004 के ओलंपिक खेलों में भारत की सनमाचा चानू और प्रतिमा कुमारी भी डोपिंग का शिकार हुई.

साल 2006 के मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों में भी भारत के एडविन राजू और तेजेन्द्र सिंह डोप में पकडे गए थे.

जबकि इससे ठीक पहले शैलजा पुजारी और बी प्रमिला देवी तैयारियों के दौरान वाडा( वर्ल्ड एंटी डोपिंग अथॉरिटी) के टेस्ट में पकड़े गए.

इसके अलावा भी कई ऐसे उदाहरण है जब भारतीय वेटलिफ्टिंग की दुनिया बदनाम हुई है.

दरअसल पदक जीतने के बाद मिलने वाली शोहरत और दौलत खिलाड़ी को डोप की तरफ धकेलती है.

ख़ैर जो भी हो, भारत के मोहन घोष ने साल 1966 में किंग्सटन जमैका में हुए आठवें राष्ट्रमंडल खेलों में वेटलिफ्टिंग में रजत पदक जीता.

यह वेटलिफ्टिंग में भारत का पहला पदक था. उसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने दमख़म वाले इस खेल में अपना लोहा मनवाया.

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Image caption डोप टेस्ट फेल हुईं सनमाचा चानू

भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में वेटलिफ्टिंग में अभी तक 38 स्वर्ण, 46 रजत और 31 कांस्य पदक सहित 115 पदक अपने नाम किए हैं.

भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया ने 153 और इंग्लैंड ने 110 पदक जीते हैं.

न्यूज़ीलैंड में चमका भारत

1990 के राष्ट्रमंडल खेल न्यूज़ीलैंड में हुए. यहां तो भारत ने 12 स्वर्ण, 7 रजत और 5 कांस्य पदक जीते.

2006 में भारतीय महिलाओं ने मनवाया अपना लोहा

2006 में ऑस्ट्रेलिया में भारत ने महिला वर्ग में तीन स्वर्ण पदक जीते.

48 किलो भारवर्ग में कुंजारानी देवी, 58 किलो में युम्नाम चानू और 75 किलो में गीता रानी ने स्वर्ण पदक जीते.

पुरूष वर्ग में भारत को तीन रजत और एक कांस्य पदक मिला.

2010 में दिल्ली में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में 2 स्वर्ण, 2 रजत और 4 कांस्य पदक सहित 8 पदक जीते.

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Image caption कुंजारानी देवी

पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में जीते 14 पदक

पिछले साल 2014 के ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने तीन स्वर्ण, पांच रजत और छह कांस्य पदक सहित 14 पदक जीते.

इस बार इन पर है दारोमदार

इस बार ऑस्ट्रेलिया में पुरूष वर्ग में 56 किलो में गुरूराजा, 62 किलो में मुथुपांडी राजा, 69 किलो में दीपक लाथेर, 77 किलो में सतीश शिवालिंगम, 85 किलो में आर वैंकट राहुल, 94 किलो में विकास ठाकुर, 105 किलो में प्रदीप सिंह और 105 किलो से अधिक वर्ग में गुरदीप सिंह शामिल है.

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Image caption सतीश शिवालिंगम

महिला वर्ग में 48 किलो में एस एम चानू, 53 किलो में के संजीता चानू, 58 किलो में सरस्वती राउत, 63 किलो में वंदना गुप्ता, 69 किलो में पूनम यादव, 75 किलो में सीमा और 90 किलो से अधिक वर्ग में पूर्णिमा पांडेय अपना ज़ोर दिखाएंगी.

महिला वर्ग में एस मीराबाई चानू 48 किलो भार वर्ग में भारत की उम्मीद है. उन्होंने पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता था.

इसके अलावा उन्होंने पिछले साल विश्व वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता.

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Image caption के संजीता चानू

पिछली कामयाबी का अनुभव आएगा काम

पिछली बार ग्लास्गो में 63 किलो भार वर्ग में कांस्य पदक जीतने वाली पूनम यादव इस बार 69 किलो भार वर्ग में उतर रही हैं.

अब 63 किलो भार वर्ग में उतरने वाली वंदना गुप्ता ग्लास्गो में चौथे स्थान पर रही थी. उनका पिछला अनुभव उनकी मदद करेगा.

इस बार 53 किलो भारत वर्ग में उतरने वाली खुमुकचाम संजिथा चानू 2014 में ग्लास्गो में 48 किलो बार वर्ग में स्वर्ण पदक जीत चुकी है. उनका दावा इस बार भी मज़बूत है.

पुरूष वर्ग में 77 किलो भार वर्ग में उतरने वाले सतीश शिवालिंगम ने ग्लास्गो में स्वर्ण पदक जीता था. वहां भारत के ही के रवि कुमार ने इसी वर्ग में रजत पदक जीता था.

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Image caption मीराबाई चानू

इससे इस वर्ग में भारत के पदक जीतने की संभावनाए बढ़ गई है.

पिछली बार विकास ठाकुर ने 85 किलो भार वर्ग में रजत पदक जीता था.

इस बार वह 94 किलो भार वर्ग में उतरेंगे. इस बार पदक उनकी तैयारी पर निर्भर करता है.

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