राष्ट्रमंडल खेलः एथलेटिक्स में कितने भारतीय पदक के दावेदार

  • 1 अप्रैल 2018
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कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स प्रतियोगिता के तीन अहम पहलू हैं. इन खेलों में लम्बी दूरी के इवेंट में अफ्रीका के वर्ल्ड क्लास एथलीट हिस्सा लेते हैं.

स्प्रिंट और जम्प में मुक़ाबला थोड़ा कम होता है, तो थ्रो के इवेंट यूरोप और अमरीका के मुक़ाबले थोड़े ज़्यादा ही हलके माने जाते हैं.

इसीलिए इन खेलों में भारतीय एथलीटों से लम्बी दूरी की इवेंट में मेडल की बात करना कुछ अटपटा लगता है.

लेकिन थ्रो में तो भारतीय मेडल लेते आए हैं और अब जब 4 अप्रैल से गोल्ड कोस्ट में यह खेल शुरू होने जा रहे हैं तो थ्रोअर्स पर ही भारतीय खेमे की निगाह रहेगी.

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एथलेटिक्स 8 अप्रैल से

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एथलेटिक्स प्रतियोगिताएं 8 अप्रैल से शुरू होंगी और पहले दिन ही 4 भारतीय एथलीट मैदान में उतरेंगे.

गोल्ड कोस्ट के समय अनुसार सुबह 7 बजे 20-किलोमीटर वाक में के टी इरफ़ान और मनीष रावत दिखेंगे साथ ही महिलाओं की 20 किलोमीटर पैदल चाल में खुशबीर कौर रहेंगी.

हालांकि तीनों ही अच्छे वॉकर हैं लेकिन वॉक एक ऐसा इवेंट है जिसमें 19 किलोमीटर लीड करने के बाद भी एथलीट डिसक्वालिफाई हो सकता है.

उत्तराखंड के मनीष से पदक की उम्मीद की जा सकती है, हालांकि 15 एथलीट्स के बीच मुक़ाबला तगड़ा होगा.

मनीष ने रियो ओलम्पिक में दुनिया के टॉप वॉकर्स को ज़बरदस्त टक्कर देते हुए तेरहवां स्थान प्राप्त किया था.

इस इवेंट में ऑस्ट्रेलिया के तीन खिलाड़ी होंगे जो ज़ाहिर है टीम की तरह चलेंगे और उनकी तकनीकी होगी बाकी खिलाड़ियों के बीच में फंसा के चलना.

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ऑस्ट्रेलिया से टक्कर

वैसे भी ऑस्ट्रेलिया के बर्ड स्मिथ ने 1 घन्टा 19 मिनट और 37 सेकंड का समय निकालकर रियो ओलंपिक्स में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था. अब उनके साथ रेडियन कौली और माकइल होसकी भी होंगे.

ये दोनों खिलाड़ी भी 1 घंटा 22 मिनट के आस-पास समय निकालते हैं जो मनीष की पहुंच में है.

साथ ही घर में गेम्स होने का ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को पूरा फायदा होगा.

क्योंकि इस इवेंट में किसी भी खिलाडी के बड़ा नाम होने का और इमेज होने से बड़ा फ़र्क पड़ता है.

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थ्रो इवेंट में पांच भारतीय

वैसे भी बर्ड स्मिथ के पिता डेव स्मिथ भी वाक करते थे और उन्होंने 1984 के लॉस एंजेलेस ओलम्पिक खेलो में दसवां स्थान प्राप्त किया था.

इन सब बातों के घरेलू खिलाड़ी को कम से कम मनोवैज्ञानिक फायदे तो होते ही हैं.

महिलाओं की 20 किलोमीटर इवेंट में खुशबीर कौर और बेबी सौम्य भाग लेंगी.

थ्रो के इवेंट में पांच भारतीय रहेंगे. इनमें सबसे ज़्यादा उम्मीद जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा से है.

इस इवेंट में 24 एंट्री हैं. लेकिन वर्ल्ड जूनियर चैम्पियन चोपड़ा अपनी 86.48 मीटर की थ्रो के आधार पर गोल्ड लेने की क़ाबलियत भी रखते हैं.

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गोल्ड कोस्ट से मेडल का सपना

पानीपत के चोपड़ा का मुकाबला होगा ऑस्ट्रेलिया के हैमिष पीकॉक से जिन्होंने ग्लास्गो खेलों में ब्रॉन्ज जीता था.

पीकॉक का सबसे अच्छा प्रदर्शन 84.39 है जो उन्होंने वर्ष 2016 में किया था.

साथ ही पुरुषों के शॉटपट में भारत की ओर से एशिया के टॉप थ्रोअर तेजिन्दर सिंह होंगे. इस इवेंट में 17 खिलाड़ियों की एंट्री है.

इनमें ऑस्ट्रेलिया के डेमियन बेरकिनहेड़ अपने 21.35 मीटर के प्रदर्शन के आधार पर टॉप पर हैं.

तेजिंदर के पास जो सबसे बड़ा हथियार है वो है उनका मनोबल. तेजिंदर के पिता काफी समय से ब्लड कैंसर से पीड़ित हैं और तेजिंदर का सपना है की वो अपने पिता को गोल्ड कोस्ट से मेडल ला कर दिखा सके.

महिलाओं की डिस्कस में वेटरन सीमा पूनिया होंगी जो अपने चौथे कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा ले रही हैं.

सीमा ने मेलबर्न में 2006 में ब्रॉन्ज़ जीता था.

हालांकि तीन बार ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली सीमा का अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन 61.05 मीटर है जो उन्होंने पटियाला में किया था.

उस प्रदर्शन के हिसाब से सीमा कॉमनवेल्थ में ऑस्ट्रेलिया की डैनी स्टीवेंस के पीछे दूसरे नंबर पर हैं. और गोल्ड कॉस्ट में भी डैनी 69.64 मीटर पर टॉप पर हैं. फिर भी सीमा से पदक की उम्मीद तो है ही.

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हाई जंप

नए भारतीय चेहरों में सबसे उप्पर नाम है हाई जंपर तेजश्वीन शंकर का. हाई जंप स्पर्धा में 23 खिलाड़ी होंगे. इनमें ऑस्ट्रेलिया के ब्रैंडन स्टार्क प्रबल दावेदार हैं.

उन्होंने रियो ओलंपिक खेलों में 15वां स्थान प्राप्त किया था. शंकर अगर कांसा भी जीत पाएँ तो वो काफी अच्छा प्रदर्शन माना जाएगा.

धरुन अय्यासेमी भी एक युवा खिलाड़ी हैं जो 400 मीटर में हिस्सा लेंगे.

उनके साथ जमैका के आंद्रे क्लार्क और ऑस्ट्रेलिया के इयान डीउहर्स्ट होंगे. यह दोनों ही खिलाड़ी 49.20 ले क्षमता रखते हैं. इन से टक्कर लेकर मेडल लेने के लिए धरुन को बहुत मशक्कत करनी होगी.

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