कॉमनवेल्थ डायरी: भारत पाकिस्तान हॉकी मैच के रोमांच का इंतज़ार, टिकटें बिकी

  • 4 अप्रैल 2018
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आज दुनिया के क़रीब डेढ़ अरब लोगों की निगाहें होंगी करेरा स्टेडियम पर जहाँ 21वें राष्ट्रमंडल खेलों की रंगारंग शुरुआत होगी. सुरक्षा और यातायात से संबंधित चिंताओं और बिना बिके टिकटों के बावजूद आयोजकों को पूरा भरोसा है कि ये अब तक के सबसे सफ़ल राष्ट्रमंडल खेल होंगे.

इंग्लैंड की महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय की तरफ़ से राजकुमार चार्ल्स इन खेलों का उद्घाटन करेंगे. उनके साथ उनकी पत्नी केमिला भी होंगी. ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री माल्कम टर्नबुल भी वहाँ मौजूद रहेंगे.

उद्घाटन समारोह का आकर्षण होगा 'डिडगेरिडू ऑर्केस्ट्रा' और 'बंगारा एबओरिजिनीज़' का बेली डांस. इसके अलावा व्हेल मछली 'मिगाली' की एक विशालकाय प्रतिमा भी दिखाई जाएगी. ये मछली साल में एक बार सर्दियों में गोल्ड कोस्ट के बग़ल से हो कर गुज़रती है.

इस मौक़े पर पूरे करेरा स्टेडियम को गोल्ड कोस्ट के एक 'बीच' के रूप में बदल दिया जाएगा. पूरे स्टेडियम में 46 टन के ऑडियो और लाइटिंग उपकरण लगाए गए हैं.

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क्वींसलेंड की प्रधानमंत्री अनस्तीसिया प्लाज़ेज़ुक इस बात से बहुत नाराज़ हैं कि इस समारोह में मेज़बान के नाते उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है. गुस्से में उन्होंने अपना वो भाषण सार्वजनिक कर दिया है जो वो वहाँ देने वाली थीं.

स्वागत भाषण गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ कॉरपोरेशन के प्रमुख पीटर बेटी और सीजीएफ़ के अध्यक्ष सुइज़ मार्टिन देंगे. उद्घाटन समारोह में क्या और होगा, इसके बारे में बहुत गोपनीयता रखी जा रही है.

यहाँ के एक मशहूर टीवी चैनल 9 का 'एक्रेडेशन' इसलिए छीन लिया गया है कि उन्होंने उद्घाटन समारोह के अभ्यास के फ़ुटेज दिखा दिए थे. खेल शुरू होने के दूसरे दिन उन्हें बताया जाएगा कि उन्हें आगे टेलीकास्ट करने की अनुमति मिलेगी या नहीं.

चैनल 9 ने इस ग़लती के लिए माफ़ी मांगी है. लेकिन आयोजकों का तर्क है कि जब स्टेडियम के अंदर या आसपास मौजूद 16000 'वालंटियर्स' इस बारे में चुप रह सकते हैं तो चैनल 9 क्यों नहीं?

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हालांकि भारत और पाकिस्तान का हॉकी में वो रुतबा नहीं रह गया है जो एक ज़माने में हुआ करता था, लेकिन अब भी गोल्ड कोस्ट के लोगों में इन दोनों देशों के बीच 7 अप्रैल को होने वाले हॉकी मैच का बहुत 'क्रेज़' है.

हालांकि कई स्पर्धाओं के टिकट अभी तक नहीं बिके हैं, लेकिन भारत पाकिस्तान मैच के सारे टिकट बिक चुके हैं और यहाँ रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को टिकट न मिल पाने की वजह से बहुत मायूसी हो रही है.

गोल्ड कोस्ट में अधिकतर भारतीय पंजाब से हैं और वो सभी हॉकी के दीवाने हैं. भारत के हॉकी कोच मरीने बताते हैं कि जब वो भारत के नए-नए कोच बने तो उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों को सलाह दी कि वो पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मैच को एक दूसरे मैच की तरह ही लें और अपना स्वाभाविक खेल खेलें. उन्होंने वादा तो कर लिया, लेकिन जब मैच हुआ तो वो उसे निभा नहीं पाए और मेरी सलाह के ख़िलाफ़ बिल्कुल अलग तरह का मैच खेला.

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Image caption प्रैक्टिस मैच के दौरान ऑस्ट्रेलिया और मलेशिया की टीमें

एक ज़माने में भारत के कोच रहे रोएलांट ऑल्टमैन्स इस समय पाकिस्तानी टीम के कोच हैं. उनका भी कहना है कि दोनों देशों के खिलाड़ियों का पूरा ज़ोर नतीजों पर रहता है ना कि उसको प्राप्त करने के तरीके पर.

इस समय दुनिया में भारतीय हॉकी टीम की रैंकिंग 6 है जबकि पाकिस्तान का दुनिया में 13वाँ स्थान है.

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टूरिस्ट नदारद- ऑपरेटर्स के मुंह उतरे

आमतौर से ईस्टर का सीज़न गोल्ड कोस्ट के 'टूरिस्ट ऑप्रेटर्स' के लिए बहुत व्यस्त समय होता है.

यहाँ के टूरिस्ट ऑपरेटरों को उम्मीद थी कि इसी दौरान राष्टमंडल खेल होने से उनकी चांदी हो जाएगी और पूरी दुनिया के पर्यटक यहाँ टूट पड़ेंगे. लेकिन हुआ इसका उल्टा ही है.

गोल्ड कोस्ट के होटलों के 20 फ़ीसदी कमरे अभी तक ख़ाली हैं और गोल्ड कोस्ट आने वाली अधिकतर फ़्लाइट्स भी खाली आ रही हैं. रेस्तराओं के मालिक भी कह रहे हैं कि उनके यहाँ उतनी भीड़ नहीं है जितनी आमतौर से ईस्टर के दौरान होती है.

लोगों से पूछने पर पता चला कि पयर्टक यहाँ शांति और सुकून के लिए आते है. वो नहीं चाहते हैं कि राष्ट्रमंडल खेलों की वजह से उनके सुकून में कोई ख़लल पड़े.

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बीबीसी संग ऑस्ट्रेलियाई शहर गोल्ड कोस्ट की सैर

यहाँ के स्थानीय लोग भी इन दिनों दूसरी जगह जाना पसंद कर रहे हैं क्योंकि वो नहीं चाहते कि अधिक भीड़-भाड़ से उनकी जिंदगी प्रभावित हो.

दूसरी तरफ़ एक तर्क ये भी दिया जा रहा है कि बहुत से पर्यटकों ने ब्रिस्बेन में अपने होटल बुक कराए हैं, क्योंकि वहाँ होटलों के कमरों के दाम गोल्ड कोस्ट की तुलना में कम है. ब्रिस्बेन गोल्डकोस्ट से 80 किलोमीटर की दूरी पर है.

टिकटों का आलम ये है कि अभी तक 20 हजार टिकट बिके नहीं हैं. लेकिन एक गोल्ड कोस्ट निवासी ने मुझसे मज़ाक किया, "याद रखिए यहाँ के लोग आखिरी दिन ही चीज़ें खरीदते हैं."

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