कॉमनवेल्थ गेम्स: दूसरे दिन संजीता चानू ने दिलाया गोल्ड, दीपक लाठेर ने जीता कांसा

  • 6 अप्रैल 2018
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  • 69 किलो पुरुष वेटलिफ्टिंग में दीपक लाठेर ने जीता कांस्य
  • 91 किलो बॉक्सिंग में नमन तंवर क्वॉर्टर फाइनल में
  • महिला हॉकी टीम ने मलेशियाई टीम को 4-1 से हराया
  • 53 किलो महिला वेटलिफ्टिंग में संजीता चानू ने जीता सोना
  • बॉक्सिंग में नमन तंवर क्वार्टर फाइनल में
  • अमित फंगल भी बॉक्सिंग के राउंड ऑफ़ 16 में पहुंचे
  • जोशना चिनप्पा स्क्वैश के क्वार्टर फ़ाइनल में

ऑस्ट्रेलिया में चल रहे कॉमनवेल्थ खेलों में भारत कुल चार पदक जीत चुका है. भारत को अब तक चारों मेडल वेटलिफ्टिंग में मिले हैं. दूसरा गोल्ड मेडल जीतने के साथ ही भारत पदक तालिका में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है.

दिल्ली के रहने वाले 18 वर्षीय दीपक लाठेर ने वेट लिफ्टिंग की 69 किलोग्राम स्पर्धा में कांस्य पदक जीता है. उन्होंने स्नैच में 136 और क्लीन एंड जर्क में 159 किलोग्राम का भार उठाया. इस तरह उन्होंने कुल 295 किलो का भार उठाया.

इस प्रतिस्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले वेल्स के गैरेथ इवान ने 299 किलो और रजत जीतने वाले श्रीलंका के इंदिका दिशानायके ने 297 किलो का भार उठाया.

कॉमनवेल्थ 2018 की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, दीपक ने बहादुरगढ़ की पीडीएम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है.

बॉक्सिंग में नमन की जीत

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पुरुषों की 91 किलोग्राम बॉक्सिंग प्रतिस्पर्धा में 20 वर्षीय भारतीय बॉक्सर नमन तंवर ने जीत के साथ अपना अभियान शुरू किया. उन्होंने तंज़ानिया के हरुना म्हाडो को 5-0 से हरा दिया.

क्वॉर्टर फाइनल में उनका मुक़ाबला समोआ के फ्रैंक मसे से होगा. नमन वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में कांसा जीत चुके हैं.

इसके अलावा 46-49 किलोवर्ग में अमित फंगल घाना के बॉक्सर तीतेह सुलेमानू को हराकर राउंड ऑफ़ 16 में पहुंचे.

हॉकी में मलेशिया पर जीत

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महिला हॉकी में पूल बी के एक मैच में भारत की टीम शुक्रवार को मलेशिया से भिड़ी. मैच में भारत ने चार गोल दाग़कर जीत हासिल की जबकि मलेशिया मात्र एक ही गोल कर पाई.

भारत की तरफ से गुरजीत कौर ने दो गोल और लालरेमशियामी और रानी ने एक-एक गोल किया.

साइकिलिंग

भारत की सोनाली मयांगलामबाम और अमृता रघुनाथ दूसरे दिन महिलाओं की 3000 मीटर पर्सूट साइकिलिंग व्यक्तिगत स्पर्धा से बाहर हो गई हैं. सोनाली 20वें और अमृता 22वें (आखिरी) स्थान पर रहीं.

भारतीय पुरुष टीम सनुराज सानंदाराज, रंजीत सिंह और साहिल कुमार केरिन स्पर्धा में पहले ही राउंड में बाहर हो गए.

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Image caption के श्रीकांत

बैडमिंटन

स्कॉटलैंड के ख़िलाफ़ भारत ने 5-0 से जीता मुक़ाबला.

लॉन बॉल

पुरुष वर्ग में भारत ने ग्रुप 'डी' के राउंड-4 मुक़ाबले में समोआ को 26-04 से हराया. हालांकि भारतीय टीम पहले के मुकाबले हार चुकी है इसिलिए इस जीत के बावजूद उनके लिए यह टूर्नामेंट खत्म हो चुका है.

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Image caption जोशना चिनप्पा

स्क्वैश

दीपिका पल्लीकल प्री-क्वार्टर मुक़ाबले में हार कर एकल से बाहर. इंग्लैंड की एलिसन वाटर्स ने सीधे सेटों में 3-11, 6-11 और 2-11 से हराया.

हालांकि, वर्ल्ड नंबर-14 जोशना चिनप्पा ने क्वार्टर फ़ाइनल मुक़ाबले में अपनी जगह बना ली है. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की तामिका सक्स्बी को सीधे सेटों में 11-6, 11-8 और 11-4 से हराया.

तैराकी

पैरा-स्पोर्ट वर्ग में किरण ताक ने 100 मीटर महिला बैकस्ट्रोक स्पर्धा के फ़ाइनल में 7वें स्थान पर रहीं.

भारत का दूसरा गोल्ड संजीता चानू को

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इससे पहले शुक्रवार को ही संजीता चानू ने गोल्ड जीत कर भारत को पदक तालिका में तीसरे नंबर पर पहुंचा दिया था. ऑस्ट्रेलिया में चल रहे कॉमनवेल्थ खेलों में वेटलिफ्टर संजीता चानू ने गोल्ड मेडल जीत लिया है. ये भारत का दूसरा गोल्ड और कुल मिलाकर तीसरा मेडल है.

हालांकि, 58 किलोवर्ग में भारत की सरस्वती राउत 78किलो स्नैच के अपने तीनों प्रयासों में असफल रहते हुए बाहर हो गईं.

संजीता चानू ने 53 किलोग्राम भार वर्ग की वेटलिफ्टिंग में गोल्ड मेडल जीता. 24 साल की संजीता ने स्नैच के तीन प्रयासों में क्रमश: 81, 83 और 84 किलोग्राम का भार उठाया. जबकि 'क्लीन एंड जर्क' में उन्होंने 104, 108 का भार उठाया. तीसरी बार में उन्होंने 112 किलो उठाने का प्रयास किया था जिसमें वह असलफल रहीं.

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10 किलो के अंतर से पछाड़ा सिल्वर मेडलिस्ट को

हालांकि इसके बावजूद उन्होंने सिल्वर मेडल जीतने वाली पपुआ न्यूगिनी की खिलाड़ी को 10 किलोग्राम के अंतर से हराया.

तीनों प्रयासों में से सर्वश्रेष्ठ को गिना जाता है. यानी स्नैच के 84 और क्लीन एंड जर्क के 108 किलोग्राम को मिलाकर संजीता ने कुल 192 किलोग्राम भार उठाया. उन्होंने 2014 कॉमनवेल्थ खेलों में गोल्ड जीतने वाली अनुभवी खिलाड़ी डीका लोआ तूआ को हराया. पपुआ न्यूगिनी की इस 33 वर्षीय खिलाड़ी ने स्नैच और क्लीन एंड जर्क मिलाकर 102 किलोग्राम भार उठाया था.

स्नैच प्रतिस्पर्धा में ही संजीता ने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से तीन किलो की बढ़त ले ली थी. 'स्नैच' में भार को बिना कंधों पर टिकाए सीधे सिर के ऊपर उठाना होता होता है. जबकि 'क्लीन एंड जर्क' में भार को सिर के ऊपर उठाने से पहले कंधे पर टिकाना होता है.

पिछले कॉमनवेल्थ में जीता था गोल्ड

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संजीता ने 2014 में ग्लास्गो के कॉमनवेल्थ खेलों में 48 किलोग्राम भर वर्ग में गोल्ड मेडल जीता था. तब उनकी उम्र महज़ 20 वर्ष थी.

हालांकि अब वह 53 किलोग्राम भार वर्ग में हिस्सा लेती हैं. पिछले साल हुए कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैम्पियनशिप में उन्होंने इसी भार वर्ग में स्नैच और क्लीन एंड जर्क मिलाकर 195 किलोग्राम (85 किलो+ 110 किलो) का भार उठाकर गोल्ड मेडल जीता था.

इससे पहले गुरुवार को भारत की मीराबाई चानू ने 48 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड और पी गुरुराजा ने 56 किलो भार वर्ग में सिल्वर जीता.

मीराबाई चानू की तरह संजीता का नाता भी खेलों के लिए पावर-हाउस बनकर उभरे मणिपुर से ही है. दोनों के बीच कड़ा मुक़ाबला रहता है और दोनों अच्छी दोस्त भी हैं. ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में संजीता ने गोल्ड जीता था तो मीरा को सिल्वर मेडल मिला था.

कुंजारानी देवी से प्रभावित

मीराबाई चानू की ही तरह संजीता भी कुंजारानी देवी से बहुत प्रभावित थीं जिन्होंने वेटलिफ़्टिंग में भारत के लिए ख़ूब नाम कमाया.

भारतीय रेलवे की कर्मचारी संजीता स्वभाव से शर्मीली हैं लेकिन जब वो मैदान पर उतरती हैं तो उनका दूसरा ही रूप देखने को मिलता है.

संजीता के लिए मेडल जीतने का सिलसिला बचपन से ही शुरू हो गया था.

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संजीता 2017 में उस समय भी सुर्ख़ियों में आई थीं जब अर्जुन पुरस्कार पाने वालों की सूची में उनका नाम नहीं था.

इसके बाद उन्होंने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.

अर्जुन अवॉर्ड तो संजीता को नहीं मिला लेकिन उन्होंने अपना जवाब पिछले साल कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर दिया.

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