राष्ट्रमंडल खेल : रागला और सतीश ने जीता सोना

  • 7 अप्रैल 2018
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राष्ट्रमंडल खेलों के तीसरे दिन शनिवार को भारत ने वेटलिफ्टिंग में दो स्वर्ण पदक हासिल किए.

सतीश कुमार शिवलिंगम ने 77 किलोग्राम भार वर्ग और वेंकट राहुल रागला ने 85 किलोग्राम भार वर्ग में देश के लिए सोना जीता.

वहीं हॉकी में भारत और पाकिस्तान का मुक़ाबला 2-2 से बराबरी पर रहा.

पदक तालिका में चौथे नंबर पर मौजूद भारत के खाते में अब चार स्वर्ण पदकों समेत कुल छह पदक हैं.

मेजबान ऑस्ट्रेलिया 20 स्वर्ण समेत कुल 57 पदकों के साथ अंक तालिका में पहले नंबर पर है.

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वेंकट राहुल की सुनहरी चमक

वेटलिफ्टर वेंकट राहुल रागला ने कुल 338 किलोग्राम वजन उठाया. समोआ के डॉ़न ओपेलोज ने कुल 331 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता. मलेशिया के मुहम्मद फज़रुल मोहदाद ने कुल 328 किलोग्राम वज़न उठाकर कांस्य पदक जीता.

21 वर्ष के वेंकट राहुल राष्ट्रमंडल खेलों के 85 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी हैं.

वेंकट राहुल रागला को कॉमनवेल्थ खेलों में शुरुआत से ही स्वर्ण पदक का दावेदार माना जा रहा था.

2014 के यूथ ओलंपिक्स में उन्होंने 77 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक हासिल किया था. वो एशियन जूनियर चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीत चुके हैं.

रागला आंध्र प्रदेश के स्टुअर्टपुरम के रहने वाले हैं. ये क्षेत्र आपराधिक घटनाओं की वजह से चर्चा में रहा है. अभिनेता चिरंजीव की फ़िल्म 'स्टुअर्टपुरम पुलिस स्टेशन' इसी कस्बे पर आधारित है.

वेंकट राहुल रागला को खेलों से लगाव विरासत में मिला है. उनके पिता मधु रागला कब्बडी के खिलाड़ी थे और वेटलिफ्टिंग भी करते थे. पिता ने ही उन्हें कम उम्र में खेल की दुनिया में दाखिल कराया.

हैदराबाद के तेलंगाना स्टेट स्पोर्ट्स स्कूल में दाखिला लेने के बाद उनके करियर को सही दिशा मिली.

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शिवलिंगम ने जीता गोल्ड

इसके पहले भारत के सतीश कुमार शिवलिंगम ने 77 किलोग्राम भार वर्ग में खेलते हुए कुल 317 किलोग्राम का वज़न उठाकर गोल्ड मेडल जीता.

25 साल के सतीश इसके पहले साल 2014 में भी कॉमनवेल्थ खेलों में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं.

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सतीश ने स्नेच में 144 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 173 किलोग्राम वज़न के साथ कुल 317 किलोग्राम वज़न उठाया और स्वर्ण पदक हासिल किया.

इंग्लैंड के जैक ऑलिवर ने इस प्रतियोगिता में स्नेच में 142 किलोग्राम वज़न और क्लीन एंड जर्क में कुल 171 किलोग्राम जीता है. ऐसे में जैक ऑलिवर ने कुल 317 किलोग्राम वज़न उठाया.

सतीश उन खिलाड़ियों में से एक हैं जिन्होंने कॉमनवेल्थ खेलों में ज़्यादातर खिलाड़ियों के साथ फीज़ियो न होने के मुद्दे को उठाया था.

सतीश ने बीबीसी हिंदी को बताया, "मुझे उम्मीद नहीं थी कि मैं गोल्ड मेडल जीत जाउंगा लेकिन मैं ये मेडल जीतकर बेहद खुश हूं. स्नेच में ट्रेल करते मैं नर्वस था क्योंकि ट्रेनिंग के दौरान थोड़ी चोट लग गई थी. मैंने 144 में स्नेच किया तो मुझे विश्वास हो गया कि क्लीन जर्क में मैं निकाल लूंगा क्योंकि मैंने तीन महीनों से ये स्नेच नहीं किया था."

कोच के नाम पदक

सतीश ने बीबीसी हिंदी से बात करते हुए कहा कि वह अपने कोचों को मेडल डेडिकेट करना चाहते हैं.

12 साल की उम्र में ट्रेनिंग शुरू करने वाले सतीश कहते हैं कि वह भारत में वेट लिफ़्टिंग को बढ़ावा मिलता हुआ देखकर काफी खुश हैं.

अपने माता-पिता के बारे में बात करते हुए कहा कि वह अपना मेडल उन्हें भी डेडिकेट करना चाहते हैं.

सतीश के पिता एक पूर्व सैनिक हैं और वह भी राष्ट्रीय स्तर के खेलों में वेटलिफ़्टर रह चुके हैं.

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पाकिस्तान से मैच ड्रॉ

हॉकी में भारत और परंपरागत प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के बीच मुकाबला 2-2 से बराबरी पर रहा.

मैच के आख़िरी पलों तक भारत 2-1 की बढ़त लिए हुआ था, लेकिन अंतिम सेकंडों में मिले पेनल्टी कॉर्नर पर पाकिस्तानी ने बराबरी का गोल दागकर भारतीय टीम के जश्न मनाने के इरादों पर पानी फेर दिया.

भारत के लिए पहला गोल 13वें मिनट में दिलप्रीत सिंह ने किया. उन्होंने एसवी सुनील से मिले खूबसूरत पास पर गोल करने में कोई गलती नहीं की.

पहले क्वार्टर में 1-0 की बढ़त हासिल करने के बाद भारत ने दूसरे क्वार्टर में भी अपनी पकड़ ढीली नहीं होने दी.

दूसरे क्वार्टर में 19वें मिनट में भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला और हरमनप्रीत ने गोल करके भारत को 2-0 से आगे कर दिया.

इसके बाद 26वें मिनट में पाकिस्तान को पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन गोलकीपर श्रीजेश ने बेहतरीन अंदाज में गोल रोककर पाकिस्तान के इरादे कामयाब नहीं होने दिए.

38वें मिनट में पाकिस्तान ने एक फिर धावा बोला और इरफ़ान जूनियर ने फील्ड गोल दागकर स्कोर 2-1 पर पहुंचा दिया.

मैच की रोमांचक कहानी आखिरी 5 सेकंड में लिखी गई. पाकिस्तान ने आखिरी पलों में मिले पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर भारत को जीत से वंचित कर दिया.

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