इंस्पेक्टर दया की फैन हैं शूटर मेहुली घोष

  • 9 अप्रैल 2018
मेहुली घोष इमेज कॉपीरइट Joydeep Karmakar Shooting Academy

17 साल की मेहुली घोष ने 2017 की राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में जब 8 मेडल जीते तो लोगों का पहली बार मेहुली से परिचय हुआ. लेकिन मेक्सिको में विश्व कप में दो पदक अपने नाम कर मेहुली सबकी नज़रों में छा गईं.

पश्चिम बंगाल के सिरमपुर की रहने वाली मेहुली बचपन में टीवी सीरियल सीआईडी और इंस्पेक्टर दया की फ़़ैन थीं. टीवी पर शोले फ़िल्म में जय-वीरू के निशानेबाज़ी वाले सीन उसे ख़ूब पसंद थे.

बंदूक, पिस्टल और शूटिंग का शौक शायद वहीं कहीं से शुरू हुआ.

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लेकिन 14 साल की उम्र में एक घटना ने उनकी ज़िंदगी पर गहरा असर छोड़ा. प्रेक्टिस के दौरान फ़ायर हुई एक पेलेट से एक व्यक्ति को चोट लगी जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया.

इस घटना के बाद वो काफ़ी दिन तक डिप्रेशन में रहीं और उन्हें काउंसलिंग लेनी पड़ी. हताश और निराश मेहुली को लेकर 2015 में उनके माँ-बाप पूर्व शूटर और ओलंपियन जॉयदीप करमाकर की एकेडमी में आए.

ट्रेनिंग के लिए मेहुली घर से रोज़ना तीन-चार घंटों का सफ़र तय करके आतीं. ट्रेनिंग के बाद घर लौटने में अक्सर मेहुली को रात हो जाती.

धीरे-धीरे ही सही, लेकिन मेहुली, उनके कोच और माँ-बाप की मेहनत रंग लाई और मेहुली ने 2016 और 2017 में झोली भर के राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीते.

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जॉयदीप खुद 2012 ओलंपिक में चौथे नंबर पर रहे थे और बहुत कम अंतर से मेडल जीतने से चूक गए थे. लेकिन मेहुली को वो निशानेबाज़ी के ही नहीं बल्कि मानसिक तौर पर मज़बूत रहने के गुर भी सिखा रहे हैं.

विश्व कप में दो मेडल जीतने के बाद अब उनके हौसले बुलंद हैं.

गोल्ड कोस्ट में होने वाले कॉमनवेल्थ खेलों में मेहुली पहली बार भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी.

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