कॉमनवेल्थ डायरी: विरासत में मिली है शूटिंग श्रेयसी सिंह को

  • 12 अप्रैल 2018
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श्रेयसी सिंह ने महिलाओं की डबल ट्रैप शूटिंग में पहला स्थान प्राप्त कर भारत को बारहवाँ स्वर्ण पदक दिलवाया.

बहुत लंबे समय तक चले मुकाबले में वो ऑस्ट्रेलिया की इमा फ़ॉक्स के साथ 96 अंकों के साथ बराबरी पर थीं. फिर दोनों के बीच शूट ऑफ़ हुआ. भारतीय खिलाड़ी ऐसे मौके पर अक्सर चूक जाते हैं.

लेकिन श्रेयसी दूसरी मिट्टी की बनी हैं. गोल्ड मैडल के लिए हुए शूट ऑफ़ में 26 वर्षीय श्रेयसी ने सटीक निशाना लगाते हुए दो प्वाइंट्स अर्जित किए जबकि एमा फ़ाक्स सिर्फ़ एक ही सही निशाना लगा सकीं. उनका दूसरा टारगेट मिस हो गया.

श्रेयसी ने दिल्ली के हंसराज कालेज से पढ़ाई की है. जब वो दसवीं कक्षा में पढ़ाई कर रही थीं तो एथेंस ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाले राज्यवर्धन सिंह राठौर नें उन्हें शूटिंग को अपना करियर अपनाने के के लिए प्रेरित किया था.

श्रेयसी स्वर्गीय दिग्विजय सिंह की बेटी है. दिग्विजय सिंह बिहार के बांका से सांसद हुआ करते थे और अटल बिहारी वाजपेई की एनडीए सरकार में विदेश राज्य मंत्री भी थे.

श्रेयसी को शूटिंग विरासत में मिली है. उनके पिता और दादा कुमार सुरेंद्र सिंह दोनों को शूटिंग का बहुत शौक था. वो दोनों शूटिंग फ़ेडेरेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष रह चुके हैं. उनके पिता दिग्विजय सिंह का बहुत कम उम्र में 2010 में 'ब्रेन हेमरेज' से निधन हो गया था.

उनकी माँ पुतुल कुमारी भी बिहार से सांसद रह चुकी हैं. 2014 के ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भी श्रेयसी रजत पदक जीत चुकी हैं. इंचियान एशियाई खेलों में भी उन्हें डबल ट्रैप टीम स्पर्धा में कांस्य पदक मिला था.

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पहली बार उन्होंने दिल्ली के राष्ट्रमंडल खेलों में शूटिंग की ट्रैप और डबल ट्रैप स्पर्धाओं में हिस्सा लिया था, जहाँ उन्हें छठा और पांचवां स्थान मिला था. श्रेयसी न सिर्फ़ शूटर हैं बल्कि एक किताब 'वेल्थ वालाज़' की लेखिका भी हैं.

वो एक अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका 'द डिप्लोमैट' की भारत संवाददाता भी हैं. उन्हें शूटिंग के अलावा टेनिस का भी बहुत शौक है. जीतने के बाद श्रेयसी ने बताया कि इस जीत से उन्हें इस लिए भी खुशी हुई कि उसका सारा परिवार उनके प्रदर्शन को देखने ख़ासतौर से गोल्डकोस्ट आया हुआ था.

कैमरून के आठ एथलीट खेल गांव से ग़ायब

गोल्डकोस्ट में कैमरून के आठ एथलीटों के खेल गाँव से ग़ायब हो जाने की वजह से बवाल मचा हुआ है. कैमरून ने इन खेलों में भाग लेने के लिए 24 एथलीटों का दल भेजा था.

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ये खिलाड़ी एक साथ गायब नहीं हुए. 8 अप्रैल को तीन एथलीट बिना किसी को कुछ बताए खेल गाँव से चले गए. 9 अप्रैल को 2 और खिलाड़ी गुमशुदा घोषित किए गए और फिर 10 अप्रैल को तीन और एथलीटों ने बिना किसी पूर्व सूचना के अपने कमरे छोड़ दिए.

इन आठ खिलाड़ियों में तीन मुक्केबाज़ और 5 भारोत्तोलक हैं और इन सबने गोल्डकोस्ट आने से पहले वार्विक के एक ट्रेनिंग कैंप में हिस्सा लिया था. इनमें से छह एथलीटों ने तो अपनी अपनी स्पर्धा में भाग लिया लेकिन दो एथलीट तो खेलों में भाग लेने ही नहीं पहुंचे.

कैमरून टीम के अधिकारियों ने इनके ग़ायब होने के बारे में ऑस्ट्रेलियाई पुलिस को सूचित किया है. कैमरून टीम के प्रेस अधिकारी साइमन मोलोंबे का कहना है कि वो उम्मीद कर रहे हैं कि ये खिलाड़ी कैमरून वापस चले गए होंगे.

लेकिन ऐसा मुश्किल दिखाई दे रहा है, क्योंकि अगर उन्हें अपने देश वापस ही जाना होता, तो इस तरह से बिना बताए चोरी से क्यों जाते?

राष्ट्रमंडल खेलों के लिए खिलाडियों को शॉर्ट टर्म वीज़ा दिया गया है. ऑस्ट्रेलिया में सन 2000 में हुए सिडनी ओलंपिक में भी क़रीब 100 खिलाड़ी ग़ैर कानूनी रूप से निर्धारित अवधि से अधिक ऑस्ट्रेलिया में रुके थे.

मेरी कॉम का जलवा है ऑस्ट्रेलिया में

जब मैं बाक्सिंग मुक़ाबले देखने के लिए ऑक्सनफ़ोर्ड स्टूडियो में घुस रहा था कि कम से कम तीन विदेशी पत्रकारों ने मुझसे मेरी कॉम के बारे में जानकारी ली.

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जब वो श्रीलंका की बाक्सर अनुशा दिलरुक्शी को हरा कर 'मिक्स्ड ज़ोन' में आई तो ऑस्ट्रेलियन टेलिविजन ने पूरे पाँच मिनट तक उनका इंटरव्यू लिया, हाँलाकि मिक्स्ड में खिलाड़ियों से बातचीत के लिए कुछ सेकेंड या ज़्यादा से ज़्यादा एक मिनट दिया जाता है.

श्रीलंका की बाक्सर को आसानी से हराने के बावजूद मेरी कॉम पसीने में नहाई हुई थीं और बुरी तरह से हाँफ रही थी. उन्होंने मुझे बताया कि वो श्रीलंका की बाक्सर से पहले भी सैफ़ खेलों में भिड़ चुकी है. मुझे उसकी तकनीक पता है.

मैंने जानबूझ कर उसके ख़िलाफ़ 'फ़्लैशी पंचेज़' नहीं मारे, क्योंकि मैं जानती थी कि वो मेरे 'ऑफ़ गार्ड' होने पर मेरे मुंह पर हिट करने की कोशिश करेगी. वैसे भी मैं फ़ाइनल के लिए अपनी पूरी ताक़त बचा कर रखना चाहती थी.

मैं यहाँ से सोने का पदक ले कर वापस जाना चाहती हूँ, क्योंकि अपने पूरे करियर में यही एक पदक है, जो मैंने भी तक नहीं जीता है.

एक दिलचस्प बाद मुझे दिखाई दी कि बाक्सिंग के मुकाबले के बाद हर खिलाड़ी का हुलिया बिगड़ जाता है, लेकिन पसीने से तरबतर होने के बावजूद मेरी कॉम की आँखों में लगा काजल पहले की तरह बरक़रार था.

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