अंजुम मोदगिल: पेंटर जिसने दिलाया निशानेबाज़ी में सिल्वर

  • 13 अप्रैल 2018
अंजुम मोदगिल इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption अंजुम मोदगिल ने महिलाओं की 50 मीटर राइफ़ल 3 पोजिशन शूटिंग के फाइनल में रजत पदक जीता है

भारत के लिए पदक जीतना 24 साल की युवा शूटर अंजुम मोदगिल के लिए कोई नई बात नहीं है.

अभी पिछले महीने ही अंजुम ने वर्ल्ड कप में सिल्वर मेडल जीता है- 50 मीट राइफ़ल 3 पोज़ीशन वर्ग में. अब इसमें राष्ट्रमंडल का पदक भी जुड़ा गया है.

अंजुम की ख़ासियत ये है कि वो राइफ़ल शूटिंग के तीन अलग-अलग वर्गों में माहिर हैं जो आसान काम नहीं है- 10 मीटर एयर राइफ़ल, 50 मीटर प्रोन और 50 मीटर 3 पोजिशन.

डीएवी कॉलेज की छात्रा रही, अंजुम का नाता केंद्र शासित राज्य चंडीगढ़ से है जहाँ से ओलंपिक में पदक जीतने वाले शूटर अभिनव बिंद्रा समेत कई बड़े खिलाड़ी निकले हैं.

अंजुम की माँ ने उनका परिचय शूटिंग से कराया और फिर जब वो एनसीसी केडेट थी तो उन्हें शूटिंग को ठीक से सीखने और करने का मौका मिला. पिस्टल से शुरु करने के बाद अंजुम को राइफ़ल वर्ग में उतरना पड़ा क्योंकि पिस्टल उपलब्ध नहीं होती थी.

अंजुम ने राष्ट्रीय निशानेबाज़ी चैंपियनशिप में पंजाब का प्रतिनिधित्व किया और कई मेडल भी जीते. शुरुआत के साल मुश्किल भरे थे. न तो ज़रूरी उपकरण मिल पाते थे, न कोई नियमित कोच और उस पर से समय-समय पर चोटिल होना.

2013 के आस-पास अंजुम के लिए समय पलटा जब जूनियर टीम में रहते हुए उन्हें एक नियमित कोच का साथ मिलने लगा. अंजुम का प्रदर्शन सुधरने लगा और भारत की टीम में उन्हें जगह मिली. इसके बाद तो अंजुम ने कई अंतरराष्ट्रीय पदक जीते.

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स्पोर्ट्स साइकॉलजी में मास्टर्स की डिग्री

इस बीच अंजुम ने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी. शूटिंग रेंज से परे, अंजुम के पास स्पोर्ट्स साइकॉलिजी की मास्टर्स की डिग्री भी है.

उनकी साथी शूटर हिना सिद्धू जहाँ ड्राइिंग और स्केचिंग करती हैं वहीं अंजुम भी अच्छी ख़ासी पेंटिंग कर लेती हैं. उनके बैग में यहाँ शूटिंग से जुड़ा सामान रहता था तो वो पेंटब्रश ले जाना भी नहीं भूलतीं.

उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर अंजुम अपने पेंटिग्स की फोटो लगाती रहती हैं, बुद्ध की पेंटिंग में उन्हें ख़ासी महारत हासिल है. उनकी पेंटिंग्स कई लोग खरीदते भी हैं और वो बतौर तोहफ़े में भी देती हैं.

हाल ही में स्पोर्ट्स वेबसाइट द ब्रिज को दिए एक इंटरव्यू में अंजुम ने बताया था कि कैसे उनकी माँ को शूटिंग छोड़नी पड़ी थी. लेकिन अंजुम ने सफल शूटर बन उस अधूरे सपने को पूरा किया है.

गोल्ड कोस्ट अंजुम के लिए पहला कॉमनवेल्थ खेल था और यहाँ मेडल जीतकर उन्होंने अच्छी शुरुआत की है.

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