राष्ट्रमंडल खेल: भारत को सोना मिला, पाकिस्तान को क्या?

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Image caption भारत के 'धाकड़ छोरे' सुशील कुमार ने यूं दी पाकिस्तान के मोहम्मद असद बट को पटखनी.

कॉमनवेल्थ गेम्स से भारत को ख़ास लगाव है. इसकी एक वजह ये भी है कि भारतीय एक बार इनकी मेज़बानी कर चुके हैं.

दिल्ली में हुए 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने कुल 100 मेडल का आंकड़ा छूते हुए कीर्तिमान रच दिया था.

साल 2014 में ये खेल ग्लास्गो पहुंचे और भारत मेडल तालिका में 64 पदकों के साथ पांचवें पायदान पर रहा.

गोल्ड मिले 15. और अब बात 2018 की. ऑस्ट्रेलियाई शहर गोल्ड कोस्ट में भारत के झोले में गोल्ड की ख़ूब बरसात हुई.

भारत को कितने मेडल मिले?

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इस बार भारतीय टीम को 26 गोल्ड मिले और कुल 66 मेडल. 20 सिल्वर और 20 ब्रॉन्ज़. स्वर्ण पदक का जलवा है कि भारत से बाहर किसी भी राष्ट्रमंडल खेल में इंडिया का ये सबसे बढ़िया प्रदर्शन है.

भारत से आगे मेज़बान ऑस्ट्रेलिया (80 स्वर्ण + 59 रजत + 59 कांस्य = 198) और इंग्लैंड (45 स्वर्ण + 45 रजत + 46 कांस्य = 136) खड़े हैं.

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अब बात भारत के पड़ोसी पाकिस्तान की. गोल्ड कोस्ट में खेले गए राष्ट्रमंडल खेलों में पाकिस्तानी कितने मेडल जीतने में कायम रहे? भारत से तुलना में वो कहां खड़े हैं?

दरअसल, अगर ये कहा जाए कि कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीतने के मामले में भारत और पाकिस्तान के बीच कोई तुलना नहीं हो सकती, तो ये अतिश्योक्ति नहीं है.

कितने देश थे, किसने जीते मेडल?

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इन खेलों में कुल 71 मुल्क़ों ने हिस्सा लिया और 39 देश ऐसे रहे जो कोई न कोई मेडल जीतने में कामयाब रहे. पाकिस्तान 39 देशों की इस सूची में 24वें पायदान पर खड़ा है.

पाकिस्तान ने क्वींसलैंड में एक गोल्ड मेडल और चार ब्रॉन्ज़ मेडल जीते हैं. और ये पांच मेडल उसे वेटलिफ़्टिंग और रेसलिंग से मिले हैं. और इनमें तीन मेडल गुजरांवाला के खिलाड़ियों ने दिलाए हैं.

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पाकिस्तान को 2018 का इकलौता गोल्ड मेडल मोहम्मद इनाम ने 86 किलोग्राम रेसलिंग में जीता.

इनका ज़िक्र इसलिए भी करना ज़रूरी है कि उन्होंने अपने एक मैच में भारत को सोमवीर को भी पटखनी दी. खिताबी मुक़ाबले में उन्होंने नाइजीरिया के मेलविन बिबो को हराया.

पाकिस्तान को क्या-क्या मिला?

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रेसलिंग में पाकिस्तान को दो ब्रॉन्ज़ भी मिले हैं. ये जीते हैं तय्यब रज़ा और मोहम्मद बिलाल ने. और इन दोनों की जीत का सिलसिला भारत ने रोका.

रज़ा को भारत के सुमित ने हराया और वो कनाडा के पहलवान को हराकर कांसा जीते. बिलाल को 57 किलोग्राम सेमीफ़ाइनल में राहुल अवारे ने पटका और वो अंग्रेज़ पहलवान को शिकस्त देकर ब्रॉन्ज़ जीते.

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पाकिस्तान को रेसलिंग ने एक गोल्ड समेत कुल तीन मेडल दिए, वहीं वेटलिफ़्टिंग ने दो कांस्य भी दिए. मोहम्मद नूह दस्तगीर बट ने 105+ वेटलिफ़्टिंग में ब्रॉन्ज़ जीता जबकि ताल्हा तालिब ने 62 किलोग्राम वज़न श्रेणी नें दूसरा कांसा जीता.

इस तरह एक गोल्ड समेत कुल पांच मेडल जीतकर पाकिस्तान 24वें नंबर पर खिसक गया.

पाकिस्तान से आगे कौन?

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पाकिस्तान से आगे खड़े 23 देशों में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, भारत, कनाडा, न्यूज़ीलैंड, दक्षिण अफ़्रीका, वेल्स, स्कॉटलैंड, नाइजीरिया, साइप्रस, जमैका, मलेशिया, सिंगापुर जैसे ताक़तवर देश खड़े हैं.

वहीं कीनिया, युगांडा, बोत्सवाना, समोआ, त्रिनिदाद एंड टोबेगो, नामीबिया, नॉर्दर्न आयरलैंड, बहामास, पपुआ न्यू गिनी और फ़िजी भी उससे आगे हैं. पाकिस्तान का नंबर इनके बाद आता है.

उसके पीछे ग्रेनाडा, बरमुडा, गयाना, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड, सेंट लुसिया, बांग्लादेश, श्रीलंका, कैमरून, डोमिनिका, आइल ऑफ़ मैन, मॉरिशस, नाउरू, माल्टा, वनुआटू, कुक आइलैंड, घाना, नोरफ़ोल्क आइलैंड, सेशेल्स और सोलोमन आइलैंड हैं.

भारत का दूसरा पड़ोसी बांग्लादेश 2 रजत पदकों के साथ 30वें और श्रीलंका 1 रजत और 5 कांस्य के साथ 31वें पायदान पर रहा.

भारत, पाकिस्तान से काफ़ी आगे

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ब्रिटिश एम्पायर गेम्स, ब्रिटिश एम्पायर एंड कॉमनवेल्थ गेम्स, ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में मिले मेडल जोड़ दिए जाएं तो भारत अब तक 207 गोल्ड, 195 रजत और 168 कांस्य के साथ कुल 570 पदक जीत चुका है वहीं पाकिस्तान 25 गोल्ड, 24 सिल्वर और 26 ब्रॉन्ज़ के साथ कुल 75 पदक अपने नाम कर चुका है. कॉमनवेल्थ गेम्स में उसके कुल मेडल 504 हो गए हैं.

इस बार भले ऑस्ट्रेलियाई शहर ने पाकिस्तान को निराश किया लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स में उसका सबसे शानदार रिकॉर्ड इसी देश में आया.

साल 1962 में पर्थ शहर में आयोजित इन खेलों में उसने 8 गोल्ड समेत कुल 9 मेडल जीते थे और पदक तालिका में वो चौथे पायदान पर रहा था.

साल 2010 में दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में उसे 2 गोल्ड, 1 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज़ के साथ कुल पांच मेडल जीते थे और तालिका में वो 17वें स्थान पर रहा था.

पाकिस्तान का ट्रैक-रिकॉर्ड

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चार साल पहले ग्लास्गो में खेले गए पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में पाकिस्तान 3 रजत और 1 ब्रॉन्ज़ के साथ सिर्फ़ चार मेडल जीत सका था और उसे 23वां पायदान मिला. इस बार वो एक पायदान और नीचे सरक गया.

कॉमनवेल्थ गेम्स में इस बार गोल्ड जीतकर पाकिस्तान को सम्मान दिलाने वाले मोहम्मद इनाम बट ने आठ साल पहले भी दिल्ली में भी सोना चूमा था.

इन खेलों में पाकिस्तान के ख़राब प्रदर्शन की एक वजह बट ने जीतने के बाद बताई.

जियो टीवी के मुताबिक उन्होंने कहा, ''मैंने इस इवेंट के लिए तैयारी करने के लिए सरकार से 10 लाख रुपए मांगे थे लेकिन कुछ भी नहीं मिला. पाकिस्तान रेसलिंग फ़ेडरेशन के साथ मिलकर मैंने अपना पैसा खर्च किया और देश के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता.''

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उन्होंने पाकिस्तान सरकार से खेलों पर फ़ोकस करने की अपील की ताकि उनके जैसे खिलाड़ी और ज़्यादा मेडल जीत सकें.

सोशल मीडिया में भी पाकिस्तान के लोग सरकार से मांग कर रहे हैं कि उसे खेलों पर ध्यान देने की ज़रूरत है.

फ़ैज़ान लखानी ने लिखा है, ''पाकिस्तान ने कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में 25 गोल्ड मेडल जीते हैं जिनमें से 21 हमारे पहलवानों ने जीते हैं. पाकिस्तान राष्ट्रमंडल खेलों के रेसलिंग में कुल मेडल जीतने वालों के मामले में तीसरे पायदान पर है. हमें इस खेल पर ध्यान देने की ज़रूरत है, हमारे पहलवानों में पाकिस्तान का झंडा टॉप पर रखने का दमख़म है.''

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