मैच फिनिशर, गेम चेंजर, कप्तान महेंद्र सिंह धोनी हैं क्रीज के राजा

  • 7 मई 2018
आईपीएल के इस सीजन में धोनी एक बार फिर अपने पुराने रंग में नज़र आ रहे हैं इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption आईपीएल के इस सीजन में धोनी एक बार फिर अपने पुराने रंग में नज़र आ रहे हैं

जब आईपीएल सत्र शुरू हुआ था तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि दो साल के निलंबन के बाद महेंद्र सिंह की कप्तानी में चेन्नई सुपर किंग्स इतनी ज़बरदस्त वापसी करेगी.

वह 10 में से सात जीत और तीन हार के साथ 14 अंकों सहित सबसे पहले सुपर-4 के लिए क्वॉलिफ़ाई करने वाली टीम भी बनी. निश्चित रूप से इसका पूरा श्रेय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को जाता है.

धोनी अपनी कप्तानी में इससे पहले दो बार साल 2010 और 2011 में चेन्नई सुपर किंग्स को आईपीएल का चैंपियन बना चुके हैं.

इस बार तो ख़ुद महेंद्र सिंह धोनी का बल्ला विरोधी टीमों पर गरज रहा है.

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धोनी ने बल्ले से दिया जवाब

उनकी शानदार फ़ॉर्म का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि वह बल्लेबाज़ी करते हुए छह बार नाबाद वापस लौटे हैं.

हालांकि उन्होंने ख़ुद स्वीकार किया है कि उनकी उम्र बढ़ रही है लेकिन उनके खेल में कोई विशेष कमी नज़र नहीं आई है.

तो क्या है उनकी कामयाबी का राज़, और कैसे कथित स्पॉट फ़िक्सिंग और दूसरे तरह के विवादों का सामना करने वाली चेन्नई सुपर किंग्स को उन्होंने अपने कुछ पुराने धुरंधर साथियों के बिना मज़बूत बनाया.

ऐसे सवालों के जवाब के लिए क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली सबसे पहले कहते हैं कि वो इससे बिल्कुल भी आश्चर्यचकित नहीं हैं क्योंकि जब-जब धोनी को चुनौती दी गई और कहा गया कि उनका क्रिकेट ख़त्म हो गया है, तब-तब उन्होंने अपने बल्ले और अपनी क्रिकेट के प्रति सोच से करारा जवाब दिया है.

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अभी धोनी में बहुत क्रिकेट बाकी

यहां तक कि चेन्नई सुपर किंग्स ने दो साल आईपीएल से बाहर रहने के बाद वापसी की है तो धोनी ने जैसे ठान लिया कि उनकी टीम ही चैंपियन बने.

विजय लोकपल्ली मानते हैं कि धोनी अपने समर्थकों और आलोचकों को जैसे एक ही संदेश दे रहे हैं कि उनमें अभी बहुत क्रिकेट बाक़ी है.

धोनी के इस सीजन में अब तक छह बार नाबाद लौटने से भी विजय लोकपल्ली हैरान नहीं हैं.

हालांकि धोनी ने इस दौरान नाबाद रहने के साथ ही पंजाब के ख़िलाफ़ 79, बेंगलुरु के ख़िलाफ़ 70 और 31 और दिल्ली के ख़िलाफ़ 51 रन जैसी बड़ी पारियां भी खेली हैं.

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धोनी में दिमागी ताक़त बहुत

तो क्या विकेट पर डटे रहने की भूख और तेज़ी से रन बनाने की क्षमता अभी भी धोनी में बरक़रार है.

इसके जवाब में विजय लोकपल्ली का मानना है कि धोनी पहले भी टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट में समय समय पर ऐसी पारियां खेल चुके हैं. उनकी दिमाग़ी ताक़त बहुत अधिक है. वह बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं.

विजय लोकपल्ली आगे कहते हैं कि मान लिया अकेले उन्होंने मैच जीता दिया तो ना तो वह दूसरों की तरह पिच पर नाचते हैं और ना ही बल्ला हवा में घुमाते हुए इधर-उधर भागते हैं. ऐसा लगता है जैसे ये तो उनका काम था जो उन्होंने पूरा कर दिया.

वो कहते हैं, "ऐसा लगता है कि उन्होंने अपने आत्मविश्वास को ही अपना हथियार बना लिया है. धोनी को लगता है कि वह क्रीज़ के राजा है. धोनी ठीक वैसा ही कर रहे है जैसे गैरी सोबर्स किया करते थे. सोबर्स कहते थे कि मेरे हाथ में बल्ला है आपके हाथ में गेंद है. मैं अपनी विकेट चाहे बचाऊं या गवांऊ यह मेरे हाथ में है. यही धोनी का रवैया रहा है."

धोनी ने पिछले दो सालों में गज़ब की बल्लेबाज़ी की है. वो गज़ब का मार्गदर्शन करते हैं.

लोकपल्ली कहते हैं, "भारतीय क्रिकेट बेहद भाग्यशाली रहा है कि उसे इतना बड़ा खिलाड़ी मिला."

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धोनी की शॉट्स मारने की तकनीक भी बदली बदली सी

दूसरी तरफ धोनी ख़ुद स्वीकार कर रहे हैं कि उनकी उम्र बढ़ रही है. कमर में कुछ दर्द भी है. लेकिन उनका कहना है कि रन कमर से नहीं बल्ले से बनते हैं. तो क्या वह अब केवल ताक़त के दम पर खेल रहे हैं.

इस पहेली को लेकर विजय लोकपल्ली मानते हैं कि यह सच है कि उनके बाज़ुओं में बेहद ताक़त है. अब अगर उनके ड्राइव्स को देखें तो पहले वह कंधों का इस्तेमाल करते थे. अब तो ऐसा लगता है जैसे वह खड़े-खड़े शॉट्स खेल रहे हैं.

विजय लोकपल्ली मानते हैं कि धोनी की फ़िटनेस पहले जैसी नहीं है लेकिन वह यह भी कहते हैं कि आज भी धोनी के सामने वाला खिलाड़ी चाहे उनसे आधी उम्र का हो वह उनका साथ देते हैं. देखा तो यहां तक गया है कि आज भी धोनी के साथ रन लेते हुए दूसरे खिलाड़ी दिक्कत का सामना करते हैं. धोनी की रन लेने की स्पीड देखकर दूसरे खिलाड़ी चकित रह जाते हैं."

दरअसल उम्र के तकाज़े से कमर के दर्द के बावजूद धोनी के शॉट्स में ताक़त और टाइमिंग का ज़बरदस्त तालमेल है, इसलिए वह खड़े-खड़े आसानी से तमाम शॉट्स खेल जाते हैं.

लोकपल्ली कहते हैं, "हम कह सकते हैं कि धोनी की बल्लेबाज़ी का जो फ़लसफ़ा रहा है उसका प्रदर्शन वह अब कर रहे हैं."

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टीम की धुरी खुद धोनी हैं, दूसरे खिलाड़ी नहीं

वैसे इस सीज़न में चेन्नई की वापसी तो हुई लेकिन कप्तान धोनी के कई साथी दूसरी टीमों में चले गए. इसके बावजूद उनकी टीम कामयाबी की राह पर है.

इसे लेकर विजय लोकपल्ली का मानना है, "धोनी ना सिर्फ़ चेन्नई की कप्तानी बल्कि जिस तरह से साल 2011 में हुए विश्व कप में पूरी टीम को साथ लेकर चले थे वह सबको मालूम है. और ख़ुद धोनी को पता है कि किस खिलाड़ी की पहुंच किस सीमा तक है. धोनी कभी भी किसी भी खिलाड़ी पर दबाव नहीं बनाते."

विजय लोकपल्ली तो यहां तक कहते हैं कि वह अगर ख़ुद युवा खिलाड़ी होते तो वह धोनी की कप्तानी में खेलना चाहते.

वो कहते हैं, "धोनी किसी भी खिलाड़ी की क्षमता का पूरा उपयोग करते है. अब अगर कुछ खिलाड़ी चेन्नई से चले गए हैं तो भी कोई बात नहीं क्योंकि टीम की धुरी के रूप में धोनी अभी भी टीम में मौजूद हैं."

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अप द ऑर्डर बैटिंग

वैसे महेंद्र सिंह धोनी पिछले दो सीज़न में काफी नीचे बल्लेबाज़ी करते थे. जबकि क्रिकेट विशेषज्ञ हमेशा उन्हें अप द ऑर्डर यानी ऊपरी क्रम में खेलने की सलाह देते रहते थे. अब धोनी नम्बर चार पर आकर और बेहद आक्रामक खेलकर अंतिम ओवर से पहले ही मैच जीता रहे हैं.

इस बदलाव को लेकर विजय लोकपल्ली का मानना है कि क्रिकेट समीक्षकों का ऐसी सलाह देने का कारण यह था कि धोनी अपनी क्षमता का पूरा इस्तेमाल कर सकें. धोनी को दुनिया का सबसे बेहतरीन मैच फिनिशर, गेम चेंजर माना गया है. अब वह शानदार फ़ॉर्म में हैं तो ठीक है वह नम्बर चार पर खेल रहे हैं, मैच को पहले फिनिश कर रहे हैं.

वो कहते हैं, "यह भारत के लिए बेहद अच्छा संकेत है क्योंकि अगला विश्व कप इंग्लैंड में है. अगर धोनी जैसा खिलाड़ी टीम में हो तो बेहतर है."

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क्या है धोनी का विकल्प?

धोनी के विकल्प की बात पूछने पर विजय लोकपल्ली सीधा सा जबाव देते हैं, "रिद्धिमान साहा, पार्थिव पटेल और दिनेश कार्तिक आपके सामने हैं. अभी केएल राहुल को भी तैयार किया जा रहा है. उनकी बल्लेबाज़ी भी अच्छी है, लेकिन अगर धोनी की पचास प्रतिशत क्षमता वाला भी कोई खिलाड़ी मिल जाए तो टीम की किस्मत बहुत अच्छी समझी जाएगी."

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