कौन ले जाएगा विश्व कप फ़ुटबॉल और विम्बलडन का ख़िताब?

  • 15 जुलाई 2018
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रविवार को रूस में जारी फ़ीफ़ा विश्व कप फ़ुटबॉल टूर्नामेंट के फ़ाइनल में फ्रांस और क्रोएशिया आमने-सामने होंगे.

वहीं दूसरी तरफ़ टेनिस की दुनिया के सबसे बड़े टूर्नामेंट विम्बलडन का फ़ाइनल तीन बार चैंपियन रह चुके सर्बिया के नोवाक जोकोविच और पहली बार फ़ाइनल में पहुंचे दक्षिण अफ्रीका के केविन एंडरसन के बीच खेला जाएगा.

अब इसमें नया क्या है?

इसमें नया यह है कि क्रोएशिया की टीम पहली बार फ़ाइनल में पहुंची है तो केविन एंडरसन भी पहली बार फ़ाइनल में पहुंचे हैं.

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Image caption फाइनल में पहुंचने से उत्साहित क्रोएशिया के खिलाड़ी

क्रोएशिया ने क्वॉर्टर फ़ाइनल में एक्स्ट्रा टाइम (120 मिनट) तक गए मैच में संघर्ष के बाद रूस और सेमीफ़ाइनल में भी एक्स्ट्रा टाइम के खेल के बाद इंग्लैंड को हराया. यानी फ़ाइनल से पहले थकान का असर उन पर अधिक होगा.

पहली बार चैम्पियन बनने का मौका

दूसरी तरफ़ विम्बलडन में एंडरसन ने क्वार्टर फ़ाइनल में पूर्व चैंपियन स्विट्ज़रलैंड के रोजर फ़ेडरर को हराने के लिए पाचंवें सेट में काफ़ी कड़ा संघर्ष किया और अंत में 13-11 से गेम, सेट, मैच जीत गए. सेमीफ़ाइनल में तो उन्होंने विम्बलडन के इतिहास का सबसे लंबा मैच खेला. अमरीका के जॉन इस्नेर को हराने के लिए पांचवें सेट में गेम 26-24 के स्कोर तक गया.

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Image caption विम्बलडन के फ़ाइनल में नोवाक जोकोविच से भिड़ेंगे केविन एंडरसन

यानी क्रोएशिया को पिछले दो मैचों में जहां लगभग 60 मिनट अधिक खेलना पड़ा तो वहीं एंडरसन ने तो सेमीफ़ाइनल मुक़ाबला करीब सात घंटे खेला. अब अगर क्रोएशिया और एंडरसन उसी मनोबल के साथ एक बार फिर मैदान में उतरते हैं तो अपने-अपने अनुभवी प्रतिद्वंद्वियों को छका सकते हैं.

इस सबके बावजूद अगर फ़्रांस जीत जाता है तो वह दूसरी बार चैंपियन बनेगा. 1998 में वो यह ख़िताब अपने नाम कर चुका है, जबकि क्रोएशिया के पास पहली बार इस ट्रॉफ़ी को अपने नाम करने का मौका है.

इसी तरह अगर विम्बलडन में जोकोविच चैम्पियन बने तो वो चौथी बार इस ग्रैंड स्लैम का ख़िताब अपने नाम करेंगे, जबकि एंडरसन पहली बार चैम्पियन बनने के मुहाने पर खड़े हैं.

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Image caption विम्बलडन में जोकोविच चैम्पियन बने तो वह चौथी बार ऐसी उपलब्धि हासिल करेंगे

फ़ुटबॉल: फ़्रांस पलड़ा का ही भारी?

अगर एक विशेषज्ञ के तौर पर देखा जाए कि फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप का चैंपियन कौन बनेगा तो इसे लेकर फ़ुटबॉल समीक्षक नोवी कपाड़िया मानते हैं कि पलड़ा तो थोड़ा फ़्रांस का ही भारी है.

दूसरी तरफ़ नोवी कपाड़िया यह भी मानते है कि फ़ाइनल एक अलग तरह का मुक़ाबला होता है. कोई भी टीम आसानी से हार नहीं मानती, शायद इसीलिए पिछले तीन फ़ाइनल एक्स्ट्रा टाइम तक चले.

क्रोएशिया ने तो दूसरे दौर का मुक़ाबला भी अतिरिक्त समय में जीता. इससे यह साबित होता है कि उनके खिलाड़ियों में दमख़म तो है.

दूसरी तरफ फ़्रांस के खिलाड़ी बेहद तेज़ गति से फ़ुटबॉल खेलते हैं. इसके अलावा फ़्रांस की रक्षा पंक्ति भी बेहद मज़बूत है.

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Image caption क्रोएशियाई टीम

जोश से भरी क्रोएशियाई टीम

क्रोएशियाई खिलाड़ी इस बात को लेकर बड़े नाराज़ थे कि उनकी टीम को थके हुए खिलाड़ियों की टीम माना जा रहा था, लेकिन उन्होंने तो इंग्लैंड को सेमीफ़ाइनल में 1-0 से पिछड़ने के बाद हराया.

अब भला इतने बड़े मैच में किसी टीम के ख़िलाफ़ खेल के पांचवें मिनट में ही गोल हो जाए तो उस टीम के मनोबल का क्या हाल हो, लेकिन क्रोएशिया ने ना सिर्फ़ गोल बराबर किया बल्कि मैच जीतने वाला गोल भी किया.

इस क्रोएशियाई टीम में खेलने वाले अधिकतर खिलाड़ी जानते हैं कि वो अगला विश्व कप नहीं खेलने वाले क्योंकि उनकी उम्र 30 साल या उससे अधिक है. यही बात उनमें जोश भी भर रही है.

दूसरी तरफ़ फ़्रांस की टीम में बेहद युवा खिलाड़ी हैं. अगर फ़्रांस की टीम चैंपियन बनी तो फिर यह भी तय है कि अगले कुछ सालों तक विश्व फ़ुटबॉल पर उसका ही दबदबा बना रहने वाला है.

फ़्रांस की सबसे बड़ी ताक़त उनके गोलकीपर भी हैं.

क्वार्टर फ़ाइनल में फ़्रांस ने ब्राज़ील को 2-0 से और सेमीफ़ाइनल में बेल्जियम को 1-0 से हराया. यानी दो बेहद महत्वपूर्ण मैचों में उनके ख़िलाफ़ कोई गोल ही नहीं हुआ.

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फ़्रांस के किलिएन बैप्पे बड़ी चुनौती

नोवी कपाड़िया यह भी मानते हैं कि फ़्रांस के किलिएन बैप्पे को रोकना भी क्रोएशिया के खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी.

बैप्पे अपनी तेज़ रफ्तार की बदौलत इस टूर्नामेंट के सबसे बेहतरीन रक्षकों को छका कर गोल कर चुके हैं. इसके अलावा फ़्रांस के ग्रीज़मैन, पवार्ड और वैरने भी कभी भी गोल करने की क्षमता रखते हैं.

क्रोएशिया के एतोबो, मोद्रिच, रेकेतिच, डोमागोज विदा और मैंजूकिच पूरा ज़ोर लगाकर फ़्रांस को रोकने की कोशिश करेंगे.

क्रोएशिया की टीम विश्व कप में पहली बार साल 1998 में उतरी थी. तब वो विश्व कप फ़्रांस में ही हुआ था.

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Image caption क्रोएशिया की टीम विश्व कप में पहली बार साल 1998 में उतरी थी

अपने पहले वर्ल्ड कप में तीसरे स्थान पर था क्रोएशिया

कमाल की बात है कि फ़्रांस फ़ाइनल में ब्राज़ील को 3-0 से हराकर चैम्पियन बना, जबकि इससे पहले फ़्रांस ने सेमीफ़ाइनल में क्रोएशिया को 2-1 से हराया था.

पहली ही बार में तीसरा स्थान हासिल करने वाली क्रोएशियाई टीम जानती हैं कि अब बने तो बने फिर शायद ही मौका बने. ऐसे में उनसे उलटफेर की उम्मीद तो की जाती है, लेकिन फ्रांस उसके गले की फांस बनने में कोई कमी नही छोड़ेगा.

जो भी हो अभी तक तो यह विश्व कप पूरे पैसे वसूल करने वाला ही रहा है और उम्मीद फ़ाइनल में भी ऐसी ही है.

अब देखना है कि युवा जोश से भरी फ़्रांस की टीम से अनुभव से भरी क्रोएशियाई टीम कैसे पार पाती है या फिर किसी चमत्कार के दम पर फ़्रांस को हरा देती है.

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