वो पांच विवाद जो वर्ल्ड कप फ़ुटबॉल में छाए रहे

  • 16 जुलाई 2018
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फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप-2018 ने लोगों को ज़रा भी निराश नहीं किया. किसी भी मायने में नहीं. इस वर्ल्ड कप में भावनाएं थीं, चौंकाने वाले नतीजे थे, ट्विस्ट ऐन्ड टर्न्स थे और थी कन्ट्रोवर्सी यानी विवाद.

बीबीसी फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप के ऐसे ही कुछ मज़ेदार और यादगार किस्से आपके लिए चुनकर लाया है.

1. VAR युग की शुरुआत

फ़ुटबॉल विश्व कप के इतिहास में इस बार पहली बार वीडियो असिस्टेंट रेफ़री (वीएआर) सिस्टम का इस्तेमाल किया गया.

ऐसा इसलिए किया गया ताकि मैदान पर होने वाली उन ग़लतियों और शंकाओं से निजात पाई जा सके जिन पर रेफ़री के लिए कोई फ़ैसला देना मुश्किल होता है.

हालांकि वीएआर को लेकर कई तरह की असहमतियां हैं.

कइयों को लगता है कि इससे मैदान में होने वाली ग़लतियों से बचा जा सकेगा लेकिन कई लोगों को लगता है कि वीएआर से खेल का रोमांच और मज़ा किरकिरा होता है.

चूंकि, हर मामले में वीएआर की इस्तेमाल नहीं हो सकता इसलिए यह सवाल भी उठता है कि फिर इसका मतलब ही क्या बचता है.

वैसे, वीएआर का असर वर्ल्ड कप के कई मैचों के नतीजों पर पड़ा.

खिलाड़ियों पर ख़ूब अंकुश लगा और 2014 वर्ल्ड कप के मुताबिक फ़ॉउल्स की संख्या में 17% बढ़ गई.

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Image caption स्टेडियम में सिगार पीते मैराडोना

2. मैराडोना का 'टशन'

अर्जेंटीना के महान फ़ुटबॉलर डिएगो मैराडोना ने आज तक कभी कोई काम छिप-छिपाकर नहीं किया.

इस वर्ल्ड कप में भी वह हमेशा की तरह अपने खुल्लम खुल्ला अंदाज़ में नज़र आए. मैराडोना को अच्छी तरह मालूम है कि दुनिया के आकर्षण का केंद्र कैसे बनना है.

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हां, यह बात और है कि उन पर लोगों का ध्यान हमेशा सही वजहों से नहीं जाता.

इस बार भी उन्होंने बेहद उत्साहित और भावुक होकर अपनी टीम का समर्थन किया, स्टेडियम में सिगार जलाकर स्मोकिंग बैन तोड़ा और अर्जेंटीना की टीम से गोल होकर पर हज़ारों लोगों के सामने 'मिडिल फ़िंगर' दिखाकर अभद्र इशारा भी किया.

मैराडोना ने राउंड 16 के मैच में कोलंबियाई टीम के ख़िलाफ़ इंग्लैंड की पेनल्टी की भी कड़ी आलोचना की.

उन्होंने एक टीवी प्रोग्राम पर इसे 'मैदान पर हुई बड़ी चोरी' बताया था. बाद में उन्होंने फ़ीफ़ा के एंबैसडर के तौर पर इस टिप्पणी के लिए माफ़ी मांग ली थी.

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3. जापान ने 'वर्ल्ड कप को गंदा किया'

वैसे तो जापान का नाम विवादों से कम ही जुड़ता है लेकिन इस बार का फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप इस मामले में अपवाद था.

यह सच है कि जापान ने मैच हारने के बाद भी स्टेडियम की सफ़ाई करके और 'शुक्रिया रूस' लिखा नोट छोड़कर लोगों का दिल जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन पोलैंड के साथ हुए पहले राउंड के तीसरे मैच में चीज़ें बिल्कुल बदल गईं.

पोलैंड से 1-0 से हारने के बावजूद जापानी टीम ने बिना किसी वजह के आपस में ही फ़ुटबॉल पास करनी शुरू कर दी.

वहीं, दूसरी तरफ़ सेनेलग की टीम कोलंबिया से मैच हार रही थी. ऐसे में पोलैंड से हारने के बाद भी जापान ने क्वालिफ़ाई कर लिया.

जापानी टीम के इस रवैये की काफ़ी आलोचना हुई और यहां तक कहा गया कि जापान ने 'वर्ल्ड कप को गंदा कर दिया.'

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4. दो मुंह वाला बाज

फ़ीफ़ा के नियमों में कहा गया था कि खिलाड़ी और टीमें मैच के दौरान राजनीतिक टिप्पणी नहीं कर सकते.

यही वजह थी कि जब स्विट्जरलैंड के जाका और शकिरी ने सर्बिया के ख़िलाफ़ गोल करने बाद हाथों से इशारा करते हुए दो मुंह वाला बाज बनाया तो विवाद हो गया और इसके राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे.

दरअसल दोनों ने हाथ से जो इशारा किया वह एक राष्ट्रवादी प्रतीक है जो अल्बानिया के राष्ट्रीय झंडे पर दो मुंहे बाज़ को दर्शाता है.

आलोचकों का कहना था कि इससे सर्बियाई राष्ट्रवादियों और अल्बानियाई मूल के लोगों के बीच तनाव हो सकता है.

शेरदान शाक़ीरी का जन्म कोसोवे के शहर जीलान में एक अल्बानियाई मूल के मुस्लिम परिवार में हुआ था.

जब वो एक साल के थे तब उनका परिवार स्विट्ज़रलैंड आ गया था.

ग्रेनिट शाका का जन्म स्विट्ज़रलैंड के बेसल शहर में अल्बानियाई मूल के मुस्लिम परिवार में हुआ था.

यूगोस्लाविया से अलग होकर जो छह देश बने थे उनमें सर्बिया भी एक था. मगर सर्बिया के कोसोवो इलाक़े ने अलग देश की मांग की थी.

इसी तरह, फ़ुटबॉल के मैदान में उस वक़्त भी राजनीति आ गई जब क्रोएशिया के दोमागोज विदा ने टीम की रूस पर जीत को 'यूक्रेन के लोगों' को समर्पित किया.

किसी से छिपा नहीं है कि 2014 में रूस के क्रीमिया पर चढ़ाई के बाद दोनों देशों के रिश्ते बेहद तल्ख़ हो चुके हैं.

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5. महिला पत्रकारों का यौन उत्पीड़न

इस बार फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप में महिला पत्रकारों के यौन उत्पीड़न के एक से ज़्यादा मामले सामने आए.

कोलंबियाई संवाददाता जूलियथ गोंज़ालेज़ थेरान रूस की एक सड़क पर डॉयचे वेले स्पेनिश के लिए लाइव रिपोर्टिंग कर रही थीं, उसी वक़्त एक शख़्स अचानक आया, उनके स्तन पर हाथ रखा और उन्हें गाल पर चूमकर भाग गया.

जूलियथ उस वक़्त लाइव थीं और उन्होंने अपनी रिपोर्टिंग बिना किसी रुकावट के जारी रखी.

बाद में इंटरनेट पर ही उन्होंने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, "हमारे साथ ऐसा सुलूक़ नहीं होना चाहिए. हम भी उतने ही सम्माननीय और पेशेवर हैं."

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ब्राज़ील की एक पत्रकार के साथ भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला.

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