पिछले इंग्लैंड दौरे पर फ्लॉप रहे विराट इस बार क्या करेंगे

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टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली का 2014 के इंग्लैंड दौरे पर प्रदर्शन निराशाजनक था. तब कोहली ने 10 पारियों में केवल 134 रन बनाए थे.

हालांकि उसके बाद से कोहली क्रिकेट के सभी तीनों फॉर्मेट में एक भरोसेमंद बल्लेबाज़ के रूप में उभरे हैं. अब एक बार फिर भारतीय टीम इंग्लैंड में है. जहां वो पांच टेस्ट मैचों की सिरीज़ खेल रही है और इसका पहला मैच बुधवार से एजबेस्टन में शुरू हो रहा है.

पिछले दौरे पर रन नहीं बना सके 29 वर्षीय विराट पर इस बार इंग्लैंड में अच्छे प्रदर्शन का दबाव निश्चित रूप से होगा लेकिन उन्होंने कहा है कि वो इंग्लैंड में अपनी बल्लेबाज़ी क्षमता को साबित करने के इरादे से नहीं बल्कि टीम को आगे ले जाने के इरादे से उतरेंगे.

विराट ने कहा, "मैं उस मनोदशा में नहीं हूं कि किसी देश में खुद को साबित करूं, मैं केवल अपनी टीम के लिए प्रदर्शन करना चाहता हूं. निश्चित रूप से मैं रन बनाना चाहता हूं और अपनी टीम को आगे ले जाना चाहता हूं और यही मेरा एक मात्र इरादा है."

विराट ने अब तक खेले गए 66 टेस्ट मैचों में 21 शतक और 16 अर्धशतकों की मदद से 5554 रन बनाए हैं. टेस्ट मैच में विराट ने 53.40 की औसत से बल्लेबाज़ी की है.

भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर विराट ने न्यूज़ीलैंड में खेले गए दो टेस्ट में 71.33 की औसत, ऑस्ट्रेलिया में आठ टेस्ट मैचों में 62.00 की औसत, दक्षिण अफ्रीका में पांच टेस्ट में 55.80 की औसत और वेस्टइंडीज में सात टेस्ट मैचों के दौरान 36.33 की औसत से बल्लेबाज़ी की है वहीं इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैचों के दौरान वो केवल 13.40 की औसत से ही रन बना सके हैं.

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2014 के दौरे में कहां चूक गए थे विराट?

आज अपने ड्राइव और पुल शॉट से वो जिस तरह गेंदबाज़ों पर छा जाते हैं, इंग्लैंड में 2014 के दौरे पर इसमें कमी देखी गई थी.

लेकिन 2014 से अब तक बहुत कुछ बदल चुका है. तब वो महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में खेल रहे थे आज वो खुद कप्तान हैं. तब उन्हें केवल 24 टेस्ट का अनुभव था आज वो 66 टेस्ट खेल चुके हैं.

तब उनकी बल्लेबाज़ी 40 की थी, आज वर्तमान टेस्ट खिलाड़ियों के बीच औसत (53.40) के मामले में वो केवल ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ स्टीव स्मिथ (61.38) से पीछे हैं. लिहाजा इंग्लैंड में उनके प्रदर्शन पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं.

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क्या हुआ उस इंग्लैंड दौरे के बाद?

कोहली हमेशा से ही एक प्रतिभाशाली बल्लेबाज़ रहे हैं. 2008 में उनकी ही कप्तानी में भारत ने अंडर-19 का वर्ल्ड कप जीता था. लेकिन लंबे समय तक उन पर वनडे बल्लेबाज़ का ही लेबल लगा रहा. 2012 के आईपीएल में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा.

फिर एक दिन जो हुआ उसने विराट की क्रिकेट को पूरी तरह से बदल दिया.

विराट कहते हैं, "तब मैं कुछ भी खाया करता था. एक दिन नहाने के बाद जब खुद को आइने में देखा तो अपने आप से कहा कि अगर तुम्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलना है तो तुम ऐसे नहीं दिख सकते. तब मेरा वजन 11 या 12 किलो अधिक था."

"अगली ही सुबह से मैंने अपना सब कुछ बदल दिया. मैं डेढ़ घंटे जिम में बिताने लगा, ग्लूटेन, रोटी, कोल्ड ड्रिंक्स, आइसक्रीम सब कुछ छोड़ दिया. यह बहुत मुश्किल था."

निश्चित ही विराट की इस कोशिश के बाद से वनडे क्रिकेट में भारत ने उनके कई शानदार प्रदर्शन देखे हैं.

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और बदला गया सब कुछ

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इंग्लैंड के दौरे के बाद भारतीय टीम उसी साल के अंत में ऑस्ट्रेलिया गई और पहला दो टेस्ट गंवाने के बाद महेंद्र सिंह धोनी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी और चौथे और आखिरी टेस्ट में विराट को कप्तानी सौंप दी गई.

ऑस्ट्रेलियाई सिरीज़ से विराट का बल्ला भी गरजने लगा था.

सिडनी में 6 जनवरी 2015 को भारतीय टेस्ट टीम की बागडोर संभालने के बाद से भारत ने विराट की कप्तानी में 12 टेस्ट सिरीज़ खेले हैं और केवल एक सिरीज़ गंवाई है, वो भी इसी साल दक्षिण अफ्रीका में 2-1 से.

2015 में धोनी से कप्तानी मिलने के समय भारतीय टीम की रैंकिंग टेस्ट मैचों में केवल बांग्लादेश से ऊपर सातवें स्थान पर थी और कोहली की 15वीं. इस दौरान उनकी ट्रेनिंग सख्त से सख्त होती गई.

पिछले दो सालों के दौरान विराट ने 10 शतक जड़े और वनडे में 91 की औसत से बल्लेबाज़ी कर रहे हैं. इस दौरान कई बार तो उन्होंने पहुंच से बाहर दिख रहे मैच में टीम की वापसी कराते हुए जीत दिलाई है.

अब वो पिच पर बेहद तेज़ गति से भागते हैं. 22 गज़ की पट्टी पर दो रनों के लिए दौड़ने में विराट को महज छह सेकेंड लगते हैं.

ड्राइव लगाने के दौरान उनके पैरों में गज़ब की मज़बूती दिखती है.

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सफलता और फिटनेस का अचूक संतुलन बने कोहली

बतौर कप्तान अपने पहले ही टेस्ट में कोहली ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ दोनों पारियों में शतक जड़े. 2015 में बेशक उनका टेस्ट औसत 42.66 का रहा लेकिन 2016 और 2017 में उन्होंने 75 से अधिक की टेस्ट औसत से बल्लेबाज़ी की. अपनी कप्तानी के दौरान विराट 14 शतकों और 65 की औसत से खेल रहे हैं और आज नंबर-1 टेस्ट बल्लेबाज़ हैं. उनमें सफलता और फिटनेस का अचूक संतुलन दिखता है.

बल्लेबाज़ी करने जब वो मैदान पर उतरते हैं तो उनमें एक गज़ब का आत्मविश्वास टपकता है, ठीक वैसा ही जैसा वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज़ सर विवियन रिचर्ड्स में दिखता था.

यहां तक कि सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर में भी मैदान में बल्लेबाज़ी के लिए उतरते समय यह देखने को नहीं मिलता था.

कुछ हद तक उनकी इस दृढ़ इच्छा शक्ति को देखते हुए भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज़ और अब कमेंटेटर संजय मांजरेकर कहते हैं कि विराट कोहली भारत के सर्वकालिक महान बल्लेबाज़ बन सकते हैं.

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क्या इस बार कोहली रन बना सकेंगे?

कोहली की सफलता उनका खुद पर यकीन को लेकर ज़्यादा निर्भर करता है लेकिन उतना ही यह एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड की गेंदबाज़ी पर भी निर्भर करेगा.

2014-15 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे से कोहली जैसी बल्लेबाज़ी कर रहे हैं उससे यह कहना मुश्किल तो नहीं है कि इंग्लैंड के गेंदबाज़ों की स्विंग लेती गेंदें कोहली को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं होंगी.

हालांकि इंग्लैंड के लिए यह निश्चित ही बहुत मायने रखेगा कि शुरुआती 20 ओवर्स के अंदर ही कोहली बल्लेबाज़ी के लिए उतरें ताकि गेंद पर चमक रहे और सीम का उपयोग कर गेंद को आसानी से घुमाया जा सके.

एजबेस्टन टेस्ट इंग्लैंड का 1000वां टेस्ट मैच भी है लिहाजा वो इसे जीतने की पूरी कोशिश करेगा.

कुल मिलाकर अगर इंग्लैंड को इस सिरीज़ में कोहली को रोकना है तो भारत के सलामी बल्लेबाज़ों को जल्दी आउट करना होगा ताकि कोहली को नई गेंद से परेशान कर आउट किया जा सके.

लेकिन अगर कोहली ने 50 से अधिक के औसत से बल्लेबाज़ी करने में सफलता पा ली और सलामी बल्लेबाज़ भी चल पड़े तो निश्चित ही यह इंग्लैंड के लिए परेशानी का सबब होगा और साथ ही यह भारत के लिए ऐतिहासिक सिरीज़ भी साबित हो सकती है.

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