जोकोविच की यूएस ओपन की ये जीत क्यों है ख़ास

  • 10 सितंबर 2018
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छह साल की उम्र में टेनिस खिलाड़ी पीट सैम्प्रास को विंबलडन जीतते देख नोवाक जोकोविच ने फ़ैसला किया था कि टेनिस ही उनका खेल है.

आज जोकोविच का मैदान वही था जहां 16 साल पहले उनके आदर्श खिलाड़ी पीट सैम्प्रास ने अपना 14वां ग्रैंड स्लैम जीता था.

संयोग देखिए कि फ़्लशिंग मेडोज़ के कोर्ट पर जोकोविच ने भी यूएस ओपन जीतकर 14वां ग्रैंड स्लैम ख़िताब अपने नाम कर लिया.

जोकोविच ने यूएस ओपन मुक़ाबले में अर्जेंटीना के जुआन मार्टिन डेल पोट्रो को हराकर अपने करियर का 14वां ग्रैंड स्लैम ख़िताब जीता.

जुलाई में विंबलडन 2018 का ख़िताब जीतने के बाद इस दूसरी ग्रैंड स्लैम जीत ने उन्हें विश्व में नंबर चार खिलाड़ी बना दिया है.

ये जोकोविच का तीसरा यूएस ओपन ख़िताब है. जोकोविच ने तीन साल पहले 2015 में यूएस ओपन फ़ाइनल में रोजर फ़ेडरर को हराकर ख़िताब जीता था.

उनसे ज़्यादा ग्रैंड स्लैम रोजर फ़ेडरर (20) और रफ़ाएल नडाल (17) के नाम हैं.

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डेल पोट्रो का प्रदर्शन

इस फ़ाइनल में उनके प्रतिद्वंद्वी डेल पोट्रो आखिरी बार 2009 में यूएस ओपन जीते थे और उसके बाद ये उनका पहला ग्रैंड स्लैम मुक़ाबला था. कई चोटों के बाद ऐसा लग रहा था कि 2015 में डेल पोट्रो टेनिस छोड़ देंगे.

इस मुक़ाबले में पहला सेट जोकोविच ने बेहद आसानी से 6-3 से जीत लिया.

लेकिन दूसरे सेट में डेल पोट्रो ने उन्हें कड़ी चुनौती दी. दूसरे सेट में मुक़ाबला अंतिम पलों तक रोमांचक रहा और सेट का नतीजा टाई ब्रेकर के ज़रिए सामने आया. डेल पोट्रो ने अच्छा संघर्ष जरूर किया, लेकिन ये सेट भी जोकोविच ने 7-6 (7-4) से अपने नाम कर लिया और आखिरकार जोकोविच 6-3 7-6(7-4) 6-3 से विजयी हुए.

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जोकोविच का सफ़र

सर्बिया के 31 साल के जोकोविच उन आठ पुरुष खिलाड़ियों में से एक हैं जिन्होंने विंबलडन और यूएस ओपन दोनों जीते हैं और जोकोविच ने ये तीसरी बार कर दिखाया है.

जीत की खुशी ऐसी थी कि जोकोविच टेनिस कोर्ट में कमर के बल निढाल होकर गिर पड़े. अपने विपक्षी डेल पोट्रो से गले लगने के बाद जोकोविच बॉक्स में अपनी पत्नी और टीम के साथ खुशी मनाने के लिए पहुंच गए.

वहीं डेल पोट्रो अपने आंसू रोक नहीं पाए. उन्होंने कहा, "अभी मेरे लिए बात करना आसान नहीं है. मैं उदास हूं अपनी हार पर, लेकिन मैं नोवाक के लिए खुश हूं."

जोकोविच के लिए ये जीत इसलिए भी ख़ास थी क्योंकि 2016 फ्रेंच ओपन के बाद से ही वे एक बड़ी जीत की तलाश में थे जो इस साल विंबलडन जीतने के साथ शुरू हुई.

कोहनी की चोट और साथ ही अपनी निजी परेशानियों के चलते आठ ग्रैंड स्लैम उनके हाथ से निकल गए जिनमें वे सिर्फ़ सेमीफाइनल तक ही पहुंच पाए थे.

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