विराट कोहली: बल्ले की कमाई, कप्तानी में गंवाई!

  • 12 सितंबर 2018
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हर सिक्के के दो पहलू होते हैं और दोनों तरफ हेड नहीं हो सकता.

इस बात को एक क्रिकेटर से बेहतर शायद ही कोई समझ सकता है.

विराट कोहली की किस्मत को इंग्लैंड में सिर्फ़ सिक्के की उछाल ने दग़ा नहीं दिया बल्कि एक ही वक़्त पर दो मोर्चों पर धमाल करने की ख्वाहिश भी अधूरी रह गई.

बल्लेबाज़ कोहली ने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ में खूब रंग जमाया लेकिन कप्तानी के मोर्चे पर लगातार पांच टॉस हारने वाले कोहली नतीजे की कसौटी पर 1-4 से पिछड़ गए.

टेस्ट सिरीज़ ख़त्म होने के बाद ये टीस कोहली को भी परेशान करती दिखी. 'कुछ चीजें होंगी जिन्हें लेकर हम सोचेंगे कि उन्हें अवसर बनाया जा सकता था.'

जीत का सेहरा कप्तान के सिर बंधता है तो हार के बाद सबसे ज़्यादा सवाल भी कप्तान से ही पूछे जाते हैं.

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सवालों के घेरे में कप्तान कोहली

सवाल ये है कि क्या बल्लेबाज़ कोहली ने इंग्लैंड में अपने प्रदर्शन से जो मौके बनाए उन्हें कप्तान कोहली भुना नहीं पाए?

क्या टीम मैनेजमेंट के फ़ैसले एक ऐसी सिरीज़ में भारत की हार की वजह बने, जहां कई बार मेहमान टीम मेजबानों पर हावी नज़र आ रही थी?

सिरीज़ ख़त्म होने के बाद कोहली ने ख़ुद आकलन किया, "दूसरे टेस्ट को छोड़ दें तो हम हर मैच में मुक़ाबले में थे. हमने बेख़ौफ होकर खेलने का फ़ैसला किया. जब ऐसा होगा तो मुक़ाबले कड़े होंगे और बेहतर टीम जीत हासिल करेगी."

तो क्या इंग्लैंड टीम वाकई भारतीय टीम से बेहतर थी और क्या भारतीय टीम की हार की इकलौती वजह यही थी?

क्रिकेट के तमाम विशेषज्ञों और टेस्ट क्रिकेट खेल चुके कई दिग्गज़ सिरीज़ शुरू होने के पहले से ही दावा कर रहे थे कि मौजूदा इंग्लैंड टीम मेहमान भारतीय टीम के मुक़ाबले कमज़ोर है.

कई दिग्गज़ों की ये राय सिरीज़ के आखिर तक बनी रही और भारतीय टीम की हार के लिए उन्होंने टीम मैनेजमेंट के फ़ैसलों और बल्लेबाज़ों की नाकामी पर सवाल उठाए.

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चयन पर सवाल

क्रिकेट समीक्षक प्रदीप मैगज़ीन तो यहां तक दावा करते हैं कि चयन की खामियों ने भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन को प्रभावित किया.

वो कहते हैं, "भारत ने जिस तरह से चयन किया, उससे खिलाड़ियों में असुरक्षा की भावना बन जाती है. इससे टीम की ताकत कम होती है."

ये राय उस टीम के बारे में है, जो टेस्ट रैंकिंग में पहले पायदान पर मौजूद है. ये आकलन अकेले मैगज़ीन का नहीं है.

क्रिकेट समीक्षक हर्षा भोगले ने ट्विटर पर लिखा, "खेल में 'अगर ऐसा होता' के लिए कोई जगह नहीं होती. भारत के पास मौके थे लेकिन स्कोर कार्ड पर 4-1 दर्ज़ है. भारत को जितना अच्छा प्रदर्शन करना चाहिए था, वो नहीं कर सका. "

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एक रोल में हिट- दूसरे में फ्लॉप

कप्तान कोहली के पास नाकामी को पीछे छोड़ने के लिए बल्लेबाज़ कोहली से प्रेरणा लेने का मौका था.

कोहली ने इंग्लैंड के पिछले दौरे के पांच टेस्ट मैचों में 13.4 के बेहद मामूली औसत से 134 रन बनाए थे. इस नाकामी का 'भूत' पूरे चार साल तक उनका पीछा करता रहा.

इस बार लगा कि कोहली पिछला 'दाग' धो डालने का इरादा बनाकर आए हैं. उनका बल्ला गरज़ा. पांच टेस्ट मैचों में 59.3 के जबरदस्त औसत के साथ उन्होंने 593 रन बनाए. दो शतक जड़े. इस प्रदर्शन के जरिए वो टेस्ट रैंकिंग में पहले पायदान पर पहुंच गए. बतौर भारतीय कप्तान सबसे ज़्यादा टेस्ट रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया.

लेकिन, बल्लेबाज़ी के मोर्चे पर बेमिसाल प्रदर्शन पर कप्तानी के मोर्चे पर मिली मायूसी हावी पड़ी.

ट्रैंट ब्रिज़ में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच में इंग्लैंड को 203 रन से रौंदने वाली टीम कोहली के पास बर्मिंघम में खेले गए पहले टेस्ट मैच और साउथैम्पटन में खेले गए चौथे टेस्ट मैच में भी जीत का मौका था.

इंग्लैंड ने पहला टेस्ट महज 31 और चौथा टेस्ट 60 रन से जीता था.

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क्या पुजारा होते तो नतीजा बदलता?

पहले टेस्ट मैच में टीम मैनेजमेंट ने चेतेश्वर पुजारा को प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं दी.

पुजारा पूरी सिरीज़ में तो अपने रुतबे के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए लेकिन चार मैचों में 278 रन बनाकर उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की.

सिरीज़ में भारत के दूसरे सबसे कामयाब बल्लेबाज़ लोकेश राहुल पुजारा से एक मैच ज़्यादा खेलकर और आखिरी मैच में बड़ा शतक जमाकर भी उनसे सिर्फ़ 21 रन ज़्यादा बना सके.

टीम मैनेजमेंट को भी पहला मैच हारते ही अपनी ग़लती का अहसास हुआ और पुजारा को बाद के चारों मैचों में जगह दी गई.

क्रिकेट समीक्षक प्रदीप मैगज़ीन पुजारा को बाहर बिठाने को लेकर सवाल उठाते हैं, "ऐसे विकेट पर आपको एक बल्लेबाज़ चाहिए जो विकेट पर खड़ा रह सके लेकिन आप पुजारा के बारे में सोचते ही नहीं. उसे शुरू के मैच में खिलाते नहीं हैं. फिर आप उसे वापस ले आते हैं."

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भरोसे पर कितने खरे पांड्या?

चयन से जुड़ी ग़लती भारत को चौथे मैच में भी चुभती रही. इस मैच में टीम इंडिया हावी थी.

तीसरा टेस्ट गंवाने के बाद इंग्लैंड टीम बैकफुट पर थी. पहली पारी में इंग्लैंड ने 86 रन पर छह विकेट गंवा दिए थे. उसके बाद मेजबान 246 रन तक पहुंचने में कामयाब रहे.

दूसरी पारी में भी 92 रन पर चार विकेट गंवाने के बाद इंग्लैंड टीम 271 रन तक पहुंचने में कामयाब रही.

इस मैच में कप्तान के 'भरोसेमंद' ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या (दो पारी में चार रन और एक विकेट) बुरी तरह फ्लॉप रहे. वहीं जब इंग्लैंड के कमबैक मैन मोइन अली की घूमती गेंदों की तारीफ हो रही थी तभी भारतीय स्पिनर आर अश्विन की फिटनेस पर सवाल उठ रहे थे. क्रिकेट के तमाम विशेषज्ञ पूछते रहे कि इंग्लैंड मोइन अली और आदिल राशिद को एक साथ खिला सकता है तो भारत दो स्पिनरों को क्यों नहीं आजमा सकता?

हालांकि, लोकेश राहुल और ऋषभ पंत ने आखिरी मैच में शतक जमाकर चयन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच कप्तान को थोड़ी राहत जरूर पहुंचाई होगी.

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क्या सबक लेंगे कोहली?

मैगज़ीन तो कुलदीप यादव को सिर्फ एक मैच में मौका देकर घर वापस भेजने पर भी सवाल उठाते हैं.

"कुलदीप यादव ने सीमित ओवरों के मैच में टेस्ट मैच जैसी गेंदबाज़ी करके बल्लेबाज़ों को आउट किया. उसे आपने ऐसे मैच में खिलाया जहां हालात स्पिनर के हक़ में नहीं थे. उसके बाद आपने उसे घर भेज दिया."

दौरा ख़त्म होते ही कोहली को नसीहत भी मिलने लगी हैं.

वो शायद दिल्ली के अपने सीनियर साथी वीरेंद्र सहवाग की बात सुनना चाहेंगे, जो कहते हैं, "विदेशी दौरों के लिए काफी काम करने के जरूरत है. अब मिशन है ऑस्ट्रेलिया."

भारतीय टीम को इस साल के आखिर में ऑस्ट्रेलिया का दौरा करना है और वो टीम भी कागज़ों और रैंकिंग में भारत से कमजोर आंकी जा रही है.

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