क्या विराट ने धोनी के 'संन्यास' का ऐलान कर दिया है?

  • 2 नवंबर 2018
विराट कोहली, महेंद्र सिंह धोनी इमेज कॉपीरइट Getty Images

भारतीय क्रिकेट कप्तान विराट कोहली ने महेंद्र सिंह धोनी को आगामी टी-20 सिरीज़ से बाहर किए जाने पर सफाई दी है.

उन्होंने कहा है कि धोनी ने नौजवान विकेटकीपर बल्लेबाज़ टी-20 मैचों में ऋषभ पंत के लिए जगह बनाने के लिए न खेलने का फैसला किया है.

कोहली के इस बयान ने उस बड़े सवाल को फिर हवा दे दी है कि क्या धोनी ने अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैचों को अलविदा कह दिया है?

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मैं उस बातचीत का हिस्सा नहीं था: कोहली

वेस्टइंडीज़ और ऑस्ट्रेलिया के साथ आगामी टी-20 सिरीज़ के लिए घोषित भारतीय टीम में महेंद्र सिंह धोनी को शामिल नहीं किया गया था.

वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ तिरुवनंतपुरम में खेले गए सिरीज़ के आख़िरी मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब विराट कोहली से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "अगर मैं ग़लत नहीं हूं तो मुझे लगता है कि चयनकर्ता इस पर पहले ही बात कर चुके हैं. और उनसे (धोनी से) भी बात की गई है. इसलिए मैं कोई कारण नहीं देखता कि जो कुछ हुआ, उस पर मैं यहां बैठकर सफ़ाई दूं. "

"चयनकर्ताओं ने बताया है कि क्या हुआ है. मैं उस बातचीत का हिस्सा नहीं था. मुझे लगता है कि लोग इस स्थिति के बारे में बहुत कयास लगा रहे हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं है. मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि वो अब भी टीम का अहम हिस्सा हैं. उन्हें बस लगता है कि टी-20 फॉर्मेट में ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ी को और मौक़े मिलने चाहिए."

कप्तान विराट कोहली ने कहा, "वो वैसे भी हमारे लिए नियमित तौर पर वनडे खेलते हैं. वो बस टी-20 में नौजवान खिलाड़ियों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं."

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Image caption ऋषभ पंत

क्या अपनी जगह छोड़ रहे हैं धोनी?

विराट कोहली के बयान से लगता है कि महेंद्र सिंह धोनी ने ही ख़ुद टी-20 टीम से बाहर होने का फैसला किया है. लेकिन सवाल ये है कि अगर वह ऋषभ पंत के लिए जगह बनाना चाहते हैं तो क्या वे टी-20 फॉर्मेट में कभी नहीं लौटेंगे?

वरिष्ठ खेल पत्रकार विजय लोकपल्ली और प्रदीप मैगज़ीन दोनों को लगता है कि धोनी अब संभवत: टी-20 मैचों में कभी दिखाई नहीं देंगे.

विजय लोकपल्ली कहते हैं, "पहले चयनकर्ताओं ने संकेत दिए थे और अब कोहली ने सार्वजनिक तौर पर कह दिया है. उन्होंने यह भी बताया कि चयनकर्ताओं ने इस बारे में धोनी से बात भी की. मुझे लगता है कि ये एक अच्छा निर्णय है."

"धोनी आख़िरी खिलाड़ी होंगे जो किसी की जगह रोकेंगे. आपको याद होगा कि जब उन्हें लगा कि वह टेस्ट क्रिकेट में रिद्धिमान साहा या पार्थिव पटेल की जगह रोक रहे हैं तो उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया था. इससे धोनी का किरदार पता लगता है."

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ख़राब फॉर्म से जूझ रहे पूर्व कप्तान

विजय लोकपल्ली मानते हैं कि धोनी ने भारतीय क्रिकेट के हित में ही यह फैसला लिया है क्योंकि उन्होंने चयनकर्ताओं को एक नया विकेटकीपर तैयार करने का समय दे दिया है.

महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में ही भारत ने 2007 में पहला टी-20 विश्व कप जीतकर दुनिया को चौंका दिया था. जानकार मानते हैं कि इस बड़ी जीत के बाद भारतीय क्रिकेट टीम को एक नई ताक़त मिली.

धोनी परिस्थिति के मुताबिक अपना खेल बदलने और बेहतरीन फिनिशर के तौर पर जाने जाते रहे हैं. 93 टी-20 मैचों में उनके नाम 37.17 की औसत से 1487 रन हैं. इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 127 से ज़्यादा रहा है और निचले क्रम पर बल्लेबाज़ी करने के बावजूद वह भारत की ओर से सबसे ज़्यादा टी-20 रन बनाने वाले बल्लेबाज़ों की सूची में चौथे नंबर पर हैं.

धोनी ने अपना आख़िरी टी-20 मुकाबला 8 जुलाई 2018 को ब्रिस्टल में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेला था, हालाँकि उन्हें बल्लेबाज़ी करने का मौका नहीं मिला था.

धोनी बीते कुछ समय से ख़राब फॉर्म से जूझ रहे हैं और इस वजह से उन्हें आलोचनाओं का सामना भी कर रहे हैं.

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'विकल्प की तैयारी'

तो क्या गुरुवार को विराट ने चाहे अनचाहे मीडिया को महेंद्र सिंह धोनी के टी-20 क्रिकेट से संन्यास लेने की सूचना दे दी?

वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं, "विराट का बयान तो यही दर्शाता है. धोनी का स्ट्राइक रेट भी गिर गया है. उनसे रन भी नहीं बन पा रहे हैं. टी-20 मैचों पर उन्होंने जो फैसला लिया है उसका मतलब है कि वो ये ज़रूर सोच रहे होंगे कि वो कब तक खेलेंगे. लेकिन उससे ज़्यादा महत्वपूर्ण सवाल ये है कि क्या उन्हें वनडे विश्व कप में भी खिलाया जाए या नहीं?"

वह कहते हैं, "अगर भविष्य में यह तय किया जाता है कि धोनी विश्व कप भी नहीं खेलेंगे तो यह उनका विकल्प तैयार करने का प्रक्रिया का ही एक हिस्सा है."

वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ ताज़ा सिरीज़ की तीन पारियों में वह कुल 50 रन ही बना सके. एशिया कप में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ दोनों ही मैच में धोनी को बल्लेबाज़ी का मौका नहीं मिला. बाकी चार मैचों में 19.25 की औसत से 77 रन बनाए. इसके लिए 124 गेंदें खेली. यानी स्ट्राइक रेट 62.10 का रहा. एशिया कप में नाकामी से पहले इंग्लैंड दौरे में भी धोनी का बल्ला खामोश रहा.

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आईपीएल में चला था बल्ला, पर...

इसी साल हुए आईपीएल मुक़ाबलों में धोनी के बल्ले ने अपने रंग दिखाए थे. उन्होंने 15 पारियों में 150 के स्ट्राइक रेट से 455 रन बनाए थे. उनका उच्चतम स्कोर 79 रहा था. सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ों की सूची में वह 13वें नंबर पर थे.

क्या वनडे क्रिकेट की ख़राब फॉर्म को टी-20 के प्रदर्शन से अलग करके देखा जा सकता है? प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं, "धोनी के संबंध में दोनों को इसलिए अलग नहीं कर सकते क्योंकि वो वैसे भी संन्यास की दहलीज़ पर हैं. अगर वो वनडे खेल भी रहे हैं तो ज़्यादा दिन नहीं खेलेंगे. बस देखना ये है कि वो विश्व कप से पहले वनडे क्रिकेट छोड़ते हैं या उसके बाद."

विजय लोकपल्ली भी कहते हैं कि टी-20 में कई बार फिटनेस की अहमियत को कम करके आंका जाता है, जबकि वहां फिटनेस के साथ प्रेशर झेलने में ख़ासी मानसिक ऊर्जा भी लगती है.

वह कहते हैं, "जहां तक वनडे का सवाल है धोनी को लगता है कि वो अपना योगदान दे सकेंगे. जब वे ऑस्ट्रेलिया दौरे पर वनडे मैच खेलेंगे तो शायद यह पता लग जाएगा कि धोनी भविष्य में भारतीय क्रिकेट को और क्या दे सकते हैं. ये एक अहम दौरा होगा और कई संकेत छोड़ जाएगा."

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