काश विराट कोहली को धोनी का 'देसी मुर्गा' वाला बयान याद होता!

  • 8 नवंबर 2018
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साल 2013. टीम इंडिया के प्रदर्शन और कोच डंकन फ्लेचर पर सवाल उठाए जा रहे थे. उस वक़्त कप्तान रहे महेंद्र सिंह धोनी से प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछा गया- क्या इंडिया को विदेशी कोच की ज़रूरत है?

मुस्कुराते हुए धोनी जवाब देते हैं, ''मुझे नहीं पता. देसी और विदेशी तो बस मुर्गे होते हैं.''

मुश्किल सवालों से निपटने के लिए ये महेंद्र सिंह धोनी का 'कूल' तरीका था. इस तरीके से टीम इंडिया के मौजूदा कप्तान विराट कोहली कोसों दूर नज़र आते हैं.

जन्मदिन पर बने एक वीडियो में किसी शख़्स ने कोहली को ओवररेटेड खिलाड़ी कहा था.

इस पर कोहली ने जवाब दिया, "मुझे लगता है आपको भारत में नहीं रहना चाहिए. कहीं और रहना चाहिए. आप हमारे देश में रहकर अन्य देशों को क्यों पसंद कर रहे हैं? आप मुझे पसंद नहीं करते, कोई बात नहीं लेकिन मुझे नहीं लगता कि आपको हमारे देश में रहकर कहीं और की चीज़ें पसंद करनी चाहिए. अपनी प्राथमिकताएं तय कीजिए."

कोहली का ये बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. कुछ लोग इस पर आपत्ति जता रहे हैं और कुछ इसे जायज़ ठहरा रहे हैं.

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क्रिकेट प्रेम को सरहदों में बांटना सही?

क्रिकेट प्रेम को क्या सरहदों में बांटकर देखना चाहिए और कोहली के बयान पर पूर्व क्रिकेटरों की क्या राय है? यही जानने के लिए हमने मनिंदर सिंह और अतुल वासन से बात की.

मनिंदर सिंह और अतुल वासन ये मानते हैं कि कोहली को ऐसे बयानों से बचना चाहिए, ये बयान आपे में न रहने का नतीजा है.

मनिंदर सिंह ने बीबीसी हिंदी से कहा, ''विराट कोहली को ये सब नज़रअंदाज़ करना चाहिए. कोहली को ये सब करने से बचना चाहिए. सारा हिंदुस्तान जानता है कि वो कितने बड़े खिलाड़ी हैं. कोहली के कितने ही चाहने वाले हैं. कई लोग जलन की वजह से ये सब कह देते हैं कि इतनी सफलता क्यों मिल रही है. जैसे मोदी जी से भी कई लोग जलते हैं कि उन्हें इतनी सफलता कैसे मिल गई. इंसान को अपनी कड़ी मेहनत का नतीजा मिलता है. किस्मत अच्छी हो तो नतीजे दोगुने हो जाते हैं. विराट कोहली के केस में यही हो रहा है.''

अतुल वासन कहते हैं, ''ये बहुत ही अपरिपक्व बयान है. कोई ख़िलाड़ी कहां से आया है, इससे क्या मतलब. जैसे मुझे कोई एक भारतीय फुटबॉल खिलाड़ी नहीं पसंद है और किसी दूसरे देश का खिलाड़ी पसंद है तो मुझे कोई देश थोड़ी छोड़ देना चाहिए. ये हीट ऑफ़ द मूमेंट में दिया बयान है.''

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मुश्किल प्रेस कॉन्फ्रेंस या फैंस से रूबरू होते हुए महेंद्र सिंह धोनी अकसर मुस्कान का इस्तेमाल करते रहे हैं. मनिंदर सिंह भी इसी मुस्कान को जवाब की तरह इस्तेमाल करने की बात करते हैं.

मनिंदर कहते हैं, ''कोहली को ये सोच लेना चाहिए कि इस तरह की बातें तो की ही जाएंगी. ऐसी बातों को तवज्जो देनी ही नहीं चाहिए. ऐसे किसी भी बात का सबसे अच्छा जवाब होता है- चुप्पी और मुस्कान. ये किसी भी सवाल के सबसे अच्छे जवाब हैं. ख़ासतौर पर इस तरह के जवाबों के. अगर भविष्य में विराट कोहली से कोई मुश्किल सवाल पूछ भी लिए जाएं तो उन्हें एक मुस्कुराहट दे देनी चाहिए. इसमें सब कुछ बयां हो जाता है.''

हालांकि अतुल वासन ऐसे बयानों को बड़ा मुद्दा नहीं मानते हैं.

अतुल वासन ने कहा, ''कोहली की मंशा यही रही होगी कि लोग भारत को फॉलो करें. क्रिकेटर हैं, कह सकते हैं. धोनी में ऐसी बातों से निपटने की बेहतर क्षमता है लेकिन उन्होंने भी अजीबोग़रीब बात कही होगी. विराट कोहली कोई राष्ट्रपति या राजनेता नहीं हैं जो हर बात को तोलमोल कर कहें. ख़िलाड़ी हैं कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.''

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आईपीएल के दौर में विराट कोहली के बयान के मायने?

इंडियन प्रीमियर लीग यानी IPL.

क्रिकेट का वो मौसम, जब दुनियाभर के खिलाड़ी भारत आकर भारतीय क्रिकेट में रंग जाते हैं. विराट कोहली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के साल 2013 से कप्तान हैं.

साल 2018 के आईपीएल सीज़न में इस टीम में सात से ज़्यादा विदेशी खिलाड़ी शामिल रहे थे. ऐसे में ऐसे बहुत से भारतीय हैं, जो किसी एक टीम में खेलने वाले विदेशी खिलाड़ी को पसंद करते होंगे.

इस पर अतुल वासन कहते हैं, ''सारे लोग दूसरे देश के खिलाड़ी पसंद करते हैं. मैं खुद क्रिकेटर हूं लेकिन मुझे खुद अज़हर से ज़्यादा डेविड गावर पसंद रहे हैं. देखिए आईपीएल में जब एक खिलाड़ी किसी टीम में खेलता है तो दूसरे खिलाड़ियों की बोली में भी शामिल रहता है और साथ में खेलता भी है. पर इसका मतलब ये नहीं है कि वो जो सोच रहा है, उसे न कह पाए. दोनों बातें अलग हैं. जोड़कर नहीं देखना चाहिए.''

मनिंदर सिंह भी यही बात दोहराते हैं, ''कोहली के इस बयान से खेल या खिलाड़ी पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा. विराट खुद काफी परिपक्व हो गए हैं. वो आपा खोकर ये जवाब दे बैठे हैं. अभी विराट कोहली खुद बैठकर सोच रहे होंगे कि ऐसा बयान देने की क्या ज़रूरत थी.''

मनिंदर सिंह ने कहा, ''किसी क्रिकेट प्रेमी का किसी भी देश के खिलाड़ी को पसंद करने का अधिकार है. जैसे मुझे वसीम अकरम और माइकल होल्डिंग बहुत पसंद हैं. मैं खुद विविएन रिचर्डस का इतना बड़ा फैन था कि उनके ख़िलाफ़ गेंदबाज़ी करते हुए उनकी तारीफ़ करता रहता था.''

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Image caption उमर दराज

कोहली का वो पाकिस्तानी फैन...

एक क्रिकेट फैन को सरहदों में रुककर अपनी पसंद ज़ाहिर करनी चाहिए?

इसका जवाब समझने के क्रम में उस पाकिस्तानी युवक उमर दराज़ का वाक़या भी अहम है. साल 2016 में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में विराट कोहली के इस फैन को तिरंगा फहराने के जुर्म में 10 साल की सज़ा सुनाई गई थी.

पेशे से दर्जी उमर को 26 जनवरी 2016 को तब गिरफ़्तार किया गया था, जब ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ खेले टी-20 मैच में विराट कोहली ने 90 रन बनाए थे.

अतुल वासन कहते हैं, ''हर किसी के पास किसी भी खिलाड़ी को पसंद करने का अधिकार है. क्रिकेटर्स को ऐसे बयानों से बचना चाहिए. पर आप ये भी समझिए कि वो क्रिकेटर हैं, नेता नहीं. नेता लोग भी ऐसे बयानों से बाज नहीं आते तो आप एक क्रिकेटर से ये उम्मीद क्यों करते हैं कि वो हर वक़्त सही बात करेगा. ये कुछ ज़्यादा उम्मीद करना नहीं है? मेरी नज़र में ये बयान अपरिपक्व है लेकिन कोहली को ये सही लगा होगा. खिलाड़ी हैं, हमेशा डिप्लोमैटिक बात नहीं कह सकते. कई खिलाड़ी में ये काबिलियत होती है और कुछ में नही होती है. अब तो डिप्लोमैट भी इतना नहीं सोचते हैं.''

मोनिंदर सिंह ने कहा, ''जो क्रिकेट प्रेमी हैं, वो किसी का भी खेल पसंद कर सकते हैं. ये उनका अधिकार है कि वो किसी को भी पसंद करें. ये जन्मों से चला आ रहा है कि आप किसी मुल्क़ में रहते हुए किसी दूसरे मुल्क़ के ख़िलाड़ी को पसंद कर सकते हैं. इस पर ऐसी प्रतिक्रिया देने की ज़रूरत नहीं थी.''

क्या कोहली को कभी इस तरह के बयान का अफ़सोस होगा?

अतुल वासन कहते हैं, ''जब विराट कोहली इस बयान के बारे में खुद सोचेंगे तो उन्हें भी इसमें अजीबपन नज़र आएगा.''

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