विराट का 'ऑस्ट्रेलिया प्रेम' दिलाएगा भारत को जीत

  • 6 दिसंबर 2018
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एडिलेड के ओवल मैदान की हरी घास भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली के जीवन में बेहद ख़ास जगह रखती है. इसी मैदान पर चार साल पहले कोहली ने टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शतक लगाकर अपनी क़ाबीलियत का परिचय दिया था.

एडिलेड में खेली गई इस पारी के बाद ही 'कोहलीः द रन मशीन' का युग शुरू हुआ. हालांकि ये दो शतक लगाने से पहले भी कोहली ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी लेकिन जैसे हर किसी के जीवन में कुछ ना कुछ उतार चढ़ाव आते रहते हैं वैसे ही विराट का करियर भी इस मैच से पहले हिचकोले खा रहा था.

चार साल पहले इंग्लैंड में खेली गई टेस्ट सिरीज़ में जेम्स एंडरसन ने स्विंग भरी पिच और घरेलू हालात का भरपूर फ़ायदा उठाते हुए कई बार कोहली को छकाया.

एंडरसन के सामने संघर्ष करते कोहली को देख उनके प्रशंसक भी संशय में पड़ गए कि क्या ये वही कोहली हैं जिन्होंने क्रिकेट के हर फॉरमेट में रनों का पहाड़ खड़ा किया है.

इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैच खेले गए और भारत वह सिरीज 1-3 से हार गया. इस सिरीज में विराट का स्कोर कुछ यूं था- 1, 8, 25, 0, 39, 28, 0, 76, 20.

कई लोगों को विश्वास ही नहीं होता कि ये आंकड़े विराट कोहली के हैं. इस सिरीज के दौरान विराट के आलोचकों की संख्या बढ़ने लगी.

उनकी आलोचना करने वालों ने कहा कि कोहली को अपने अहंकार की क़ीमत चुकानी पड़ रही है. कुछ लोगों ने कोहली की आक्रामकता पर भी सवाल उठाने शुरू कर दिए.

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अनुष्का भी आई घेरे में

बीसीसीआई के तय नियमों के अनुसार विदेशी दौरों पर खिलाड़ियों के साथ उनके परिवारवाले, भाई-बहन, पत्नी या बच्चे ही जा सकते हैं.

चार पहले भारत जब ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर था तब विराट की शादी नहीं हुई थी. उस समय वे बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा को डेट कर रहे थे.

क्रिकेट और बॉलीवुड के गलियारों में उनके रिश्ते की चर्चा गरम थी. ऑस्ट्रेलिया से पहले भारत ने इंग्लैंड का दौरा किया था और इस दौरे पर विराट ने बीसीसीआई से अपील की कि वे अनुष्का को साथ ले जाने की इजाज़त दें.

नियम के अनुसार तो खिलाड़ी अपनी गर्लफ्रेंड को विदेशी दौरे पर नहीं ले जा सकते लेकिन इस बार बीसीसीआई ने अपने नियम में ढील देते हुए अनुष्का को विराट के साथ इंग्लैंड जाने की इजाज़त दे दी.

इसके बाद जब इंग्लैंड दौरे में विराट का प्रदर्शन ख़राब रहा तो मीडिया में ख़बरें छपी कि अनुष्का के साथ रहने की वजह से विराट अपने खेल पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं.

कोहली के रन बनाने की रफ़्तार में अचानक ब्रेक लग गए. तमाम आलोचनाओं के बीच वे भारत लौटे और यहां उन्होंने सामान्यतः कमज़ोर मानी जाने वाली श्रीलंका और वेस्ट इंडीज के ख़िलाफ़ बेहतर प्रदर्शन किया.

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Image caption विराट कोहली और अनुष्का शर्मा

अचानक मिली कप्तानी

ऑस्ट्रेलिया का दौरा विराट के लिए बड़ी चुनौती था. ऑस्ट्रेलिया की तेज़ पिचों पर वे ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों के सामने संघर्ष करते दिख रहे थे. कुछ विशेषज्ञ तो यहां तक सोचने लगे थे कि विराट को अंतिम एकादश में जगह दी भी जाए या नहीं.

लेकिन शायद क़िस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था. इसी सिरीज़ के बीच टीम के नियमित कप्तान महेंद्र सिंह धोनी चोटिल हो गए और कोहली को अचानक ही कप्तानी सौंप दी गई.

हालांकि विराट के लिए यह कप्तानी एक कांटों भरा ताज था. वे अपनी ख़राब बल्लेबाज़ी की वजह से पहले ही आलोचना झेल रहे थे और अब उनके कंधों पर कप्तानी का बोझ भी पड़ गया था.

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने भी विराट को टारगेट करना शुरू कर दिया. लेकिन कहते हैं कि खरा सोना आग में तपकर ही चमकता है.

विराट इन विकट परिस्थितियों में जब एडिलेड में खेलने उतरे तो उन्होंने इंग्लैंड दौरे पर की गई अपनी ग़लतियों पर बहुत काम किया और आख़िरकार इस टेस्ट की दोनों पारियों में शानदार शतक जमाया.

भारत भले ही एडिलेड टेस्ट हार गया लेकिन विराट ने अपने आलोचकों को मुंहतोड़ जवाब दिया. उन्होंने साबित किया कि वे तेज़ पिचों पर भी भारतीय पिचों जैसा प्रदर्शन कर सकते हैं. उन्होंने दिखाया कि वे बाउंस और पेस के सामने घबराते नहीं हैं और ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की स्लेजिंग का भी डटकर सामना करते हैं.

इस टेस्ट सिरीज़ के चार मैचों में विराट ने 692 रन बनाए. भारत वह टेस्ट सिरीज़ हार गया लेकिन विराट ने ऑस्ट्रेलिया में ख़ुद को साबित कर दिखाया.

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ज़बान का जवाब ज़बान से

ऑस्ट्रेलियाई टीम खेल के मैदान में गेंद और बल्ले के अलावा एक और चीज़ के ज़रिए मैच जीतने की कोशिश करती है और वह है उनकी स्लेजिंग यानी सामने वाली टीम के खिलाड़ियों को उकसाना और परेशान करना.

स्लेजिंग करने का मुख्य मकसद होता है विपक्षी खिलाड़ी का ध्यान भंग किया जाए. कई अनुभवी खिलाड़ी स्लेजिंग के शिकार होते रहे हैं. यही एक वजह है कि ऑस्ट्रेलिया को उसके घर में हराना हमेशा से बहुत मुश्किल काम रहा.

लेकिन विराट ने ऑस्ट्रेलिया के इस हथियार का जवाब अपने ही तरीके से दिया. जब कभी कोई ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी उन्हें परेशान करने वाला कमेंट पास करता तो विराट उसे वैसा ही जवाब देते. इसी दौरान वे बल्ले से भी अपना बेहतरीन जवाब देने में पीछे नहीं रहते.

विराट ने ऑस्ट्रेलियाई मैदानों, वहां की पिचों और उनके गेंदबाजों पर बहुत अच्छे से होमवर्क किया. उन्होंने हालात के अनुसार अपनी बल्लेबाजी को ढालना शुरू किया.

विराट को ऑस्ट्रेलिया की स्लेजिंग पसंद आने लगी, वे इससे परेशान होने की जगह से नई ऊर्जा प्राप्त करने लगे.

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बिगड़ैल लड़के की लड़ाई

साल 2014-15 के दौरे में विराट को एक 'बिगड़ैल लड़के' के तौर पर बुलाया जाने लगा. इस दौरे का एक वाकया तो हमेशा याद किया जाता है.

विराट मिचेल जॉनसन की तेज़ गेंद का सामना कर रहे थे. विराट ने गेंद को डिफेंड किया और जैसे ही वे रन के लिए थोड़ा सा आगे बढ़े, जॉनसन ने गेंद उठाकर उनकी ओर फेंक दी. यह गेंद विराट को लगी और वे ज़मीन पर गिर पड़े. विराट ने बेहद गुस्से में जॉनसन की ओर देखा जिसके तुरंत बाद जॉनसन ने उनसे माफ़ी मांगी.

इस घटना के कुछ मिनट बाद विराट ने जॉनसन की गेंद पर शानदार शॉट लगाया. दोनों खिलाड़ियों के बीच कहासुनी हो गई. दोनों खिलाड़ियों के बीच थोड़ी-थोड़ी देर में और भी बहसबाजी होती रही, जिसके चलते अंपायर रिचर्ड केटेलबर्ग को बीच में आना पड़ा और दोनों खिलाड़ियों को शांत रहने की हिदायत देनी पड़ी.

जॉनसन के साथ हुए उस झगड़े ने कई लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा. विराट ने इसके बाद कहा था, ''अगर आप रनआउट करने की कोशिश कर रहे हैं तो स्टंप्स की तरफ गेंद फेंकिए, मेरे शरीर की तरफ नहीं. जो भी इंसान आपके ख़िलाफ़ कुछ करता है तो उसे संदेश देना ज़रूरी होता है. मैं चुपचाप सुनने वालों में से नहीं हूं. मैं यहां क्रिकेट खेलने आया हूं और वो मैं करूंगा. मैं उन लोगों का सम्मान क्यों करूं जो मेरी इज़्जत नहीं करते?''

विराट ने बताया कि स्लेजिंग करने के भी अपने ही फ़ायदे हैं. उन्होंने कहा था, ''आप मुझे नापसंद कीजिए, मुझे कोई ऐतराज़ नहीं. मुझे मैदान में बहस करने या उकसावे वाले शब्दों से परहेज़ नहीं है. मुझे तो इससे मदद मिलती है. मुझे ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ खेलना पसंद है. क्योंकि वे शांत होकर नहीं खेलते. मुझे शब्दों की जंग बहुत पसंद है. इससे मुझे प्रेरणा मिलती है कि मैं और ज़्यादा बेहतर करूं.''

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ऑस्ट्रेलियाई प्रशंसकों के साथ झगड़ा (5 जनवरी 2012)

ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की तरह उनके प्रशंसक भी बहुत आक्रामक रहते हैं, वे अपनी टीम का समर्थन करने के लिए कई बार हदें पार कर देते हैं.

6 साल पहले साल 2012 में जब भारतीय टीम ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर थी तो भारत को बहुत बुरी हार का सामना करना पड़ा.

इसी दौरे में कोहली एक मैच के दौरान बाउंड्री के पास फील्डिंग कर रहे थे, जब ऑस्ट्रेलियाई प्रशंसकों ने उन्हें कुछ अपशब्द कहे. इसके बाद कोहली ने भी उन प्रशंसकों की तरफ भद्दा इशारा कर दिया.

अपने व्यवहार पर विराट ने कहा था, ''मैं मानता हूं कि खिलाड़ियों को इस तरह से बर्ताव नहीं करना चाहिए. लेकिन अगर दर्शक और प्रशंसक अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं. तो आप बताइए हमें क्या करना चाहिए. जो कुछ भी उन प्रशंसकों ने कहा था वह मैंने अपने जीवन में सुनी सबसे बुरी चीजों में से एक था.''

हालांकि विराट की यह छवि अब ऑस्ट्रेलियाई प्रशंसकों के दिलो दिमाग़ को बदल रही है. ऑस्ट्रेलियाई प्रशंसक विराट की जीवटता को पसंद करने लगे हैं.

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''तुम अपनी ऊर्जा बर्बाद कर रहे हो. तुम्हें इसका कुछ भी फायदा नहीं मिलने वाला. मैंने तुम्हारी इतनी धुलाई कर दी है कि तुम ज़िंदगी भर याद रखोगे. जाओ और गेंदबाजी करो.'' यह बात विराट ने ऑस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाज जेम्स फ़ॉकनर को कही थी.

विराट के गुस्से का शिकार ऑस्ट्रेलियाई ओपनर डेविड वॉर्नर और पूर्व कप्तान स्टीव स्मिथ भी बने हैं. इन सब घटनाओं में सबसे ज़रूरी बात यह है कि विराट के प्रदर्शन पर इनका असर नहीं पड़ा.

रनों का पीछा करने में माहिर

वनडे क्रिकेट में जब कभी भारत को बड़े स्कोर का पीछा करना होता है तो विराट कोहली का प्रदर्शन और भी ज़्यादा निखर जाता है.

रनों का पीछा करने की उनकी इस क्षमता का पहला नज़ारा 6 साल पहले ऑस्ट्रेलिया में ही दिखा था. ऑस्ट्रेलिया में खेली गई त्रिकोणीय सिरीज़ में श्रीलंका के ख़िलाफ़ एक बेहद अहम मैच में उन्होंने 113 रनों की पारी खेली थी.

विराट की इस पारी को वनडे क्रिकेट में रनों का पीछा करने वाली सर्वश्रेष्ठ पारियों में एक माना जाता है. इस मैच में विराट ने श्रीलंका के महान तेज़ गेंदबाज़ लसिथ मलिंगा की खूब ख़बर ली थी.

ऑस्ट्रेलिया में पिच पर बहुत अधिक बाउंस होता है. अगर बल्लेबाज़ तकनीकी तौर पर पूरी तरह सक्षम नहीं है तो यह बाउंस उसे बहुत अधिक परेशान करता है.

विराट ने इन्हीं बाउंस करती गेंदों पर महारत हासिल की है. वे इन गेंदों को पुल या हुक कर बाउंड्री में तब्दील करते हैं.

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हालांकि जिन शॉट्स पर भारत में चार रन मिल जाते हैं उन्ही शॉट पर ऑस्ट्रेलिया के विशाल मैदानों पर दो या तीन रन मिलते हैं. इसलिए यहां बेहतर फिटनेस और विकटों के बीच दौड़ का बेहतर होना बहुत ज़रूरी है. विराट इस बात का बहुत अधिक ख्याल रखते हैं.

विराट ऑफ़-स्टंम्प से थोड़ा हटकर बल्लेबाजी करते हैं. इससे उनके आउट होने का ख़तरा थोड़ा सा कम हो जाता है. यही वजह है कि वे पिछले 10 सालों में ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में टॉप-5 में शामिल हैं.

देखना होगा कि विराट की यह तमाम क्षमताएं भारत के लिए कितनी कारगर साबित होती हैं.

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