भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सिरीज़: वो बीमारी जिससे ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ बिखरा भारतीय टॉप ऑर्डर

  • 6 दिसंबर 2018
ऑस्ट्रेलिया-भारत टेस्ट सिरीज़, एडिलेड टेस्ट इमेज कॉपीरइट Getty Images

ऑस्ट्रेलियाई धरती पर जब भारतीय टीम पहुंची तो इस बार न मीडिया में और न ही किसी पूर्व खिलाड़ी का कटाक्ष आया तो लगा कि इस बार के सिरीज़ में कुछ अलग ही होना है.

कई पूर्व भारतीय क्रिकेटर्स ने भी कहा कि कंगारुओं को हराने का यह भारतीय टीम के पास सबसे अच्छा मौक़ा है, स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर जो टीम में नहीं हैं.

फिर एडिलेड में जब कप्तान विराट कोहली ने टॉस जीता तो लगा कि चलो आग़ाज़ तो अच्छा है.

लेकिन जैसे ही टीम बल्लेबाज़ी के लिए उतरी तो एक बार फिर वही पुरानी कहानी दोहरा दी गई.

एक छोर पर चेतेश्वर पुजारा जमे रहे लेकिन दूसरे छोर से एक-एक कर विकेट गिरते गए.

भारत का स्कोर 86 रन पहुँचने तक कप्तान कोहली, उप-कप्तान आजिंक्य रहाणे समेत आधी टीम पवेलियन लौट चुकी थी.

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Image caption मुरली विजय

द गॉड ऑफ़ स्टंप्स

एक बार फिर तेज़ गेंदबाज़ी के आगे भारतीय शीर्ष क्रम का नतमस्तक होना क्रिकेट प्रशंसकों को निराश कर गया. साथ ही यह चर्चा भी शुरू हो गई कि आख़िर ऑस्ट्रेलियाई धरती पर भारतीय टीम के लड़खड़ाने की वजह क्या है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह भारतीय टीम की लापरवाह बल्लेबाज़ी का नतीजा है जिसकी वजह से एडिलेड में शीर्ष क्रम बिखर गया. साथ ही उनका यह भी मानना है कि बल्लेबाज़ों का शॉट सेलेक्शन ख़राब था और इसके साथ ही एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है भारतीय बल्लेबाज़ों की ऑफ़ स्टंप्स से बाहर जाती गेंदों को छेड़ने की आदत की.

ये वो आदत है जिससे भारतीय पिचों पर तो ड्राइव कर बल्लेबाज़ रन बनाने में कामयाब रहते हैं, लेकिन तेज़ पिचों पर ऐसा करना आत्महत्या कहा जा सकता है.

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आख़िर क्यों भारतीय बल्लेबाज़ों के लिए ऑफ़ स्टंप्स से बाहर जाती गेंद को छोड़ना इतना मुश्किल हो जाता है.

मज़ेदार तो यह है कि भारतीय खिलाड़ी रन बनाने की कोशिश में आउट नहीं हुए. बल्कि बाहर जाती गेंद पर एक ग़लत शॉट खेलने के क्रम में उनके बल्ले के बाहरी किनारे से गेंद छूती है और वो कैच आउट हो जाते हैं.

यह सिलसिला दक्षिण अफ़्रीका की तेज़ पिचों पर भी था और एडिलेड में भी यही हुआ. पिच रिव्यू के मुताबिक़ एडिलेड की पिच पर घास नहीं है, मतलब यह कि यह बल्लेबाज़ी के लिए बहुत मुश्किल पिच नहीं है.

लेकिन लगता है कि भारतीय बल्लेबाज़ों के लिए ऑफ़ स्टंप्स की गेंद को छोड़ने का नेट्स पर अभी और अभ्यास करने की ज़रूरत है.

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एकाग्रता में कमी

ऑस्ट्रेलिया में दो बार खेल चुके पूर्व क्रिकेटर मदन लाल कहते हैं कि भारतीय खिलाड़ी ख़राब शॉट खेलने की वजह से आउट हुए. उनके एकाग्रता में कमी थी.

उन्होंने कहा, "रोहित शर्मा ने ख़राब शॉट खेली. उन्हें अगर टेस्ट क्रिकेट में बने रहना है तो चेतेश्वर पुजारा की तरह एकाग्र होकर खेलना होगा."

"लापरवाह शॉट खेलने की वजह से भारतीय क्रिकेटर आउट हुए. यदि लंच तक एक ही विकेट गिरा होता तो मैच का रुख़ कुछ और ही होता."

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तुम्हारा ऑफ़ स्टंप्स कहां है?

क्रिकेट में यह हमेशा कहा जाता है कि एक अच्छे बल्लेबाज़ को यह पता होता है कि उसका ऑफ़ स्टंप कहां है. और पिच पर बल्लेबाज़ को किस गेंद को छोड़ना है इसकी स्थिति भी जानने के लिए यह मालूम होना बेहद ज़रूरी है कि उसका ऑफ़ स्टंप कहां है. एक बड़े बल्लेबाज़ में इस गुण का होना अनिवार्य माना जाता है.

राहुल द्रविड़ को वक़ार युनूस जैसे गेंदबाज़ ने अपने दौर का सबसे बेहतरीन बल्लेबाज़ बताया था. इसके पीछे उन्होंने यह वजह दी थी कि पिच पर बतौर बल्लेबाज़ द्रविड़ अपने ऑफ़ स्टंप की स्थिति बहुत अच्छी तरह जानते थे.

यही बात इमरान ख़ान ने कभी सुनील गावस्कर के बारे में कही थी.

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वन मैन ऑर्मी

वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप मैगज़ीन कुछ ऐसा ही विराट कोहली के बारे में कहते हैं. वो कहते हैं कि कोहली निश्चित ही अपनी तकनीक के लिहाज़ से बहुत बेहतर बल्लेबाज़ हैं.

एडिलेट टेस्ट से पहले सोशल मीडिया पर विराट कोहली के प्रैक्टिस सेशन का वीडियो शेयर करके कई पूर्व खिलाड़ी प्रशंसा करते दिखे थे.

प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं, ''पुजारा को छोड़ कर एडिलेड टेस्ट के पहले दिन टीम ने बहुत नासमझ बल्लेबाज़ी की है. विकेट में कुछ ऐसा लग नहीं रहा है. टॉस जीतने का जो लाभ था उसे गंवा दिया. विकेट में ऐसा दम नहीं था. लापरवाही से खेले गए शॉट और कोहली के लिए गए शानदार कैच की वजह से टीम लड़खड़ा गई.''

पिछले कुछ टेस्ट मैचों की बात करें तो भारतीय टीम बहुत हद तक विराट कोहली की बल्लेबाज़ी पर पूरी तरह निर्भर दिखती है, ठीक वैसे ही जैसा द्रविड़, गांगुली, लक्ष्मण से पहले सचिन तेंदुलकर के शुरुआती करियर के दौरान हुआ करता था.

प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं कि यह साफ़ दिखता है कि कोहली अगर रन नहीं करते हैं तो पूरी टीम दबाव में आ जाती है.

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रोहित शर्मा जब पिच पर जम गए थे तो उन्हें लापरवाही से गेंद नहीं खेलना चाहिए था.

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Image caption रोहित शर्मा

37 रन बना कर भी रोहित नाकाम

टेस्ट मैचों में जब भी रोहित शर्मा को मौक़ा मिलता है वो उतनी ज़िम्मेदारी से बल्लेबाज़ी करते नज़र नहीं आते जितनी उनसे अपेक्षा की जाती है.

एडिलेड में उन्होंने 37 रन बनाए. इस दौरान तीन छक्के भी जड़े लेकिन जब वो पिच पर जमते हुए दिखने लगे तो नॉथन लॉयन की गेंद पर उन्होंने एक गैरज़िम्मेदाराना शॉट खेला और आउट हो गए.

एक बार फिर जब उनसे एक बड़ी पारी की उम्मीदें थी तो उन्होंने निराश किया.

सोशल मीडिया पर रोहित के आउट होने के बाद मैसेज की बाढ़ आ गई.

पूर्व टेस्ट क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने लिखा कि रोहित को टेस्ट में मिले एक-एक मौक़े को अवसर के रूप में देखना चाहिए.

रोहित के आउट होने पर कमेंटेटर हर्षा भोगले ने लिखा कि मैंने प्रॉड्यूसर को रिप्ले नहीं दिखाने का आग्रह किया है.

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ऑस्ट्रेलिया में भारत

ऑस्ट्रेलिया में भारतीय टीम 12वीं बार टेस्ट सिरीज़ खेल रही है. अब तक भारत का ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर टेस्ट सिरीज़ जीतने का सपना पूरा नहीं हो सका है.

बात अगर रिकॉर्ड की करें तो भारत को ऑस्ट्रेलियाई धरती पर खेले गए 44 टेस्ट में से महज़ पांच में जीत मिली है.

भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर भारतीय टीम इंग्लैंड, वेस्टइंडीज़ और न्यूज़ीलैंड में सिरीज़ जीत चुकी है. वहीं दक्षिण अफ़्रीका और ऑस्ट्रेलिया की धरती पर उसे टेस्ट सिरीज़ में जीत नसीब नहीं हुई है.

ऑस्ट्रेलियाई टीम में स्मिथ और वार्नर जैसे खिलाड़ियों के नहीं होने से भारतीय टीम के लिए इस बार वहां जीतना कुछ हद तक आसान माना जा रहा था, लेकिन भारतीय शीर्ष क्रम की लचर बल्लेबाज़ी ने एडिलेड टेस्ट में टॉस जीतने के बावजूद निराश किया.

इसके बावजूद मदन लाल कहते हैं, "एडिलेड टेस्ट में उम्मीद अभी भी बाक़ी है."

वो कहते हैं, "बल्लेबाज़ी के लिहाज़ से पिच आसान दिख रही है. इस पर चौथी पारी ऑस्ट्रेलिया को खेलनी है. और यह अभी से दिख रहा है कि गेंद घूम रही है. ऐसे में भारतीय टीम ने अगर ऑस्ट्रेलिया को 40-50 रन के लीड लेने तक रोक दिया तो नतीजा सकारात्मक हो सकता है."

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