ऋषभ पंत शरारत करते हैं या करवाई गई

  • 10 दिसंबर 2018
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''कमॉन पैटी, इट्स नॉट ईज़ी टु बैट हियर...समवन इज नॉट सेयिंग...कमॉन'' (पैटी, यहां बैटिंग करना आसान नहीं)

विकेट के पीछे खड़ा 21 साल का एक खिलाड़ी भारतीय ऑफ़ स्पिनर आर.अश्विन की हर गेंद पर लगातार यह बोल रहा था.

अश्विन की गेंद एडिलेड की सूखी पिच पर पांचवे दिन बने रफ़ पैच पर जैसे ही पड़ती, तो गेंद से ज़्यादा टर्न ऋषभ पंत की ज़बान लेती.

अपनी टीम को हार से बचाने के लिए खेल रहे पैट कमिंस कई दफ़ा पंत को देख मुस्कुरा देते, बदले में पंत भी शरारती हंसी बिखेरते और फिर अपने दस्ताने समेटते हुए बोलते "नॉट एवरीवन इ पुजारा हियर...इट्स नॉट ईज़ी टु सर्वाइव मैन'' (यहां हर कोई पुजारा नहीं है...यहां खेलना आसान नहीं)

पंत को भारतीय टेस्ट टीम में आए जुम्मा-जुम्मा कुछ महीने बीते हैं, एडिलेड में वो अपना छठां टेस्ट खेल रहे थे.

जिस अंदाज़ में पंत विकेट के पीछे से अपनी कमेंट्री कर रहे थे उससे एक पल के लिए कमेंट्री बॉक्स में बैठे आशीष नेहरा भी चुप हो गए. उन्होंने कहा, ''शायद लोग हमसे ज़्यादा पंत को सुनना पसंद करेंगे, उन्हें बोलने देते हैं.''

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कप्तान ने दी ये ज़िम्मेदारी?

यह विराट कोहली की टीम इंडिया का अंदाज़ है, जो धोनी युग से बाहर निकलने लगी है. विराट एक ऐसे कप्तान हैं जो मैच को हाथों में आता देख दूर से सुनाई देते ढोल की आवाज़ पर स्लिप्स पर खड़े-खड़े नाचने लगते हैं.

भारतीय टीम में लंबे समय तक विकेट के पीछे की ज़िम्मेदारी धोनी ने संभाली. दुनिया जानती है कि धोनी कितने शांत कप्तान थे. हालांकि कभी-कभार उनकी कुछ आवाज़ें भी स्टंप माइक पर रिकॉर्ड हो जाती थी.

धोनी के बाद टेस्ट में उनकी जगह रिद्धिमान साहा आए. साहा धोनी से भी ज़्यादा शांत निकले. शायद ही कोई पल होगा जब उनकी कोई आवाज़ कहीं रिकॉर्ड हुई हो.

लेकिन धोनी और साहा के बाद पंत जब से विकेट के पीछे आए हैं, वो अपनी ज़बान का खेल ज़बर्दस्त तरीक़े से खेल रहे हैं. आज से पहले शायद ही कोई युवा भारतीय खिलाड़ी इतना खुलकर सामने वाली टीम को स्लेज करता हुआ दिखा हो, वो भी तब जब सामने स्लेजिंग की मास्टर रही टीम ऑस्ट्रेलिया हो.

कमेंट्री बॉक्स में बैठे पूर्व भारतीय खिलाड़ी नेहरा, हरभजन और दीप दास गुप्ता कहते हैं कि शायद कप्तान कोहली ने ही पंत को स्लेज करने की ज़िम्मेदारी दी है, इसीलिए वह इतना खुलकर बोल रहे हैं. हालांकि स्लेजिंग के दौरान पंत कभी भी अपनी सीमाएं पार करते नहीं दिखे.

मैच के बाद पंत ने इस बारे में कहा, ''मैं चाहता था कि बल्लेबाज़ गेंद से ज़्यादा मुझ पर ध्यान दे.''

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ज़बान के साथ ग्लव्स का खेल

ऐसा नहीं है कि पंत ने एडिलेड के मैदान पर सिर्फ़ ज़बानी खेल खेलकर ही ऑस्ट्रेलियाई टीम को परेशान किया. उन्होंने विकेट के पीछे मिली अपनी असल ज़िम्मेदारी भी बख़ूबी निभाई.

पंत ने इस मैच में कुल 11 कैच लपके जो विश्व रिकॉर्ड की बराबरी है. उनसे पहले इंग्लैंड के जैक रसेल ने साल 1995 में और दक्षिण अफ़्रीका के एबी डिविलियर्स ने साल 2013 में 11-11 कैच लपके थे.

हालांकि पंत इस विश्व रिकॉर्ड को तोड़ने के क़रीब भी पहुंचे लेकिन कुछ मौक़ों पर उनके हाथों से गेंद फिसल भी गई.

पंत की विकेटकीपिंग की जहां तक बात करें तो उन्होंने टेस्ट मैच में अभी तक कुल 20 कैच पकड़े हैं जबकि दो स्टंप आउट किए हैं.

एडिलेड टेस्ट की पहली पारी में पंत ने छह कैच लपके थे. इसके साथ ही उन्होंने पूर्व कप्तान धोनी के रिकॉर्ड की बराबरी की थी.

किसी टेस्ट की एक पारी में सबसे ज़्यादा कैच पकड़ने के मामले भारतीय रिकॉर्ड धोनी के नाम था, अब इस मामले में पंत भी धोनी के साथ अपना नाम साझा कर रहे हैं.

हालांकि, जब पंत का टीम इंडिया में चयन हुआ था तब कई क्रिकेट समीक्षक उनकी विकेटकीपिंग के बारे में बहुत अधिक आश्वस्त नहीं थे. कई आलोचकों का कहना था कि पंत अच्छे बल्लेबाज़ हैं लेकिन विकेट के पीछे उनके हाथ धोनी जैसी रफ्तार पैदा नहीं कर पाते.

अब कहा जा सकता है कि कम से कम एडिलेड टेस्ट में तो पंत ने विकेटकीपिंग के मामले में अपने आलोचकों को चुप करवा दिया है.

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Image caption कैच लपकते पंत

टिककर खेलना कब सीखेंगे?

पंत के दस्ताने और ज़बान तो एडिलेड में ख़ूब चले लेकिन इसके अलावा भी उनके कंधों पर एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है और वो है बल्लेबाज़ी की.

पंत एडिलेड टेस्ट की पहली पारी में 25 रन और दूसरी पारी में 28 रन बनाकर आउट हुए.

आंकड़ों के लिहाज़ से भले ये रन उनके अच्छे स्टार्ट को बड़े स्कोर में तब्दील ना करने की कहानी बयान करते हों, लेकिन मैच के जिन हालात में पंत मैदान में उतरे तब उनसे एक ज़िम्मेदाराना पारी की उम्मीद थी.

पहली पारी में पंत जब बैटिंग के लिए आए तो टीम के पांच विकेट महज़ 86 रन पर गिर चुके थे. एक छोर पर चेतेश्वर पुजारा टिके हुए थे, जो अपनी तरह एक साथी की तलाश कर रहे थे. पंत ने आते ही हवाई फायर करना शुरू कर दिया.

उन्होंने 25 रनों की अपनी पारी में एक छक्का और दो चौक्के लगाए. ऐसा लगा कि वो टेस्ट मैच नहीं वनडे खेलने आए हैं.

कुछ यही हाल दूसरी पारी में भी रहा. यहां भी पंत ने महज़ 16 गेंदों पर 28 रन बनाए. इस पारी में वे टी20 अंदाज़ में खेल रहे थे.

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भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने पंत की पहली पारी के बाद कहा था कि उन्हें टेस्ट मैच में अपना बल्ला टिकाना सीखना होगा. उन्हें याद करना होगा कि यह टी20 नहीं है, यहां गेंद को हवा से ज़्यादा ज़मीन पर रोकना होता है.

वैसे पंत इंग्लैंड के ख़िलाफ़ उन्हीं की ज़मीन पर टेस्ट शतक जमा चुके हैं. उनकी बल्लेबाज़ी का करिश्मा लोग आईपीएल में भी देख चुके हैं.

उम्मीद है कि 14 दिसंबर से पर्थ में शुरू होने वाले मैच में पंत के हाथ और ज़बान के साथ-साथ बल्ला भी आग उगलने में कामयाब रहेगा.

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