आईपीएल 2019: दो अलग-अलग टीमों के लिए खेलेंगे पटियाला के सिंह ब्रदर्स

  • 22 दिसंबर 2018
प्रभसिमरन सिंह, आईपीएल
Image caption प्रभसिमरन सिंह और उनके पिता

मंगलवार को प्रभसिमरन सिंह और उनके ताऊ (पिता के बड़े भाई) के बेटे अनमोलप्रीत सिंह जब अपने घर पहुंचे तो देखा कि दोनों के माता-पिता टीवी पर टकटकी लगाए बैठे थे.

आईपीएल की नीलामी चल रही थी. पिछले साल बड़ी उम्मीद थी कि अनमोल को कोई टीम ख़रीद लेगी और क्रिकेट की इस बड़ी लीग में खेलने का मौका मिलेगा. लेकिन, तब बड़ी निराशा हुई थी क्योंकि किसी ने उसे नहीं ख़रीदा था.

हालांकि, इस बार सारे परिवार की खुशी का ठिकाना न रहा जब अस्सी लाख में मुंबई ने उन्हें ख़रीद लिया.

प्रभसिमरन बताते हैं कि भगवान ने उनके परिवार की सुन ही ली. लेकिन, परिवार टीवी पर नज़रे गड़ाए बैठा रहा क्योंकि प्रभसिमरन की नीलामी नंबर पर थी. परिवार को कुछ उम्मीद उनसे भी थी.

लेकिन, जब नीलामी शुरू हुई तो ऐसा लगने लगा जैसे एक नहीं सभी टीमें प्रभ को चाहती हों. 20 लाख से शुरू हुई नीलामी 4 करोड़ 80 लाख पर जाकर रुकी.

मेरे मां बाप की आंखों में खुशी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे.

नीलामी के दो दिन बाद भी उसके पिता का यही हाल है.

Image caption मुख्य कोच तरमिंदर सिंह

संयुक्त परिवार का फ़ायदा

प्रभसिमरन की बात करते ही पंजाब मंडी बोर्ड में बतौर सेवादार कार्यरत उनके पिता सुरजीत सिंह की आंखों में आंसू भर आते हैं. कहते हैं कि कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसे होगा.

सुरजीत सिंह कहते हैं, ''दफ़्तर में मैं चिट्ठियां या फाइलों को यहां से वहां ले जाने का काम करता हूं. कई सालों से यही काम करता रहा हूं. नीलामी के बाद जब यह ख़बर फ़ैली तो मेरे अफ़सर सहित सभी मुझे बधाइयां दे रहे हैं. इससे बड़ी बात मेरे लिए क्या हो सकती है?''

सुरजीत इसका सारा श्रेय अपने बड़े भाई सतिंदर गोरा को देते हैं. प्रभसिमरन भी इस बात को मानते हैं. बताते हैं कि कैसे वो एक नहीं तीन-तीन बल्ले लाते थे.

भले ही प्रभसिमरन के पिता किसी ऊंचे ओहदे पर कार्यरत न हों लेकिन संयुक्त परिवार में रहने की वजह से परिवार को कोई खास आर्थिक तंगी नहीं देखनी पड़ी. ताऊ सतिंदर पुलिस में इंस्पेक्टर हैं. दो बड़ीं बहने हैं.

प्रभसिमरन कहते हैं कि अगर मुश्किल हुई भी तो परिवार के लोगों ने कभी महसूस नहीं होने दी.

Image caption प्रभसिमरन सिंह

घर पर लगाई है बॉलिंग मशीन

पटियाला के भीड़भाड़ वाले बाज़ार के बीच तंग गलियों से होते हुए आप गुरबक्श कालोनी की उस गली में पहुंचते हैं जहां प्रभसिमरन का घर है. गलियां इतनी तंग हैं कि वहां से दो गाड़ियां निकाल पाना एक बड़ी चुनौती है.

पर प्रभसिमरन भले ही अभी 18 साल के हैं लेकिन गाड़ी काफ़ी अच्छा चला लेते हैं. बड़ी सफ़ाई से अपनी कार को उन्होंने घर के बाहर लगाया.

उनका घर काफ़ी बड़ा है. घर में एक बॉलिंग मशीन भी लगाई है जिस पर प्रभ और उनके भाई प्रैक्टिस करते हैं. ताया सतिंदर बताते हैं कि यह बैंगलुरू से ख़रीदी थी, लगभग तीन लाख रुपये में.

पर असली प्रैक्टिस तो वो क़रीब तीन किलोमीटर दूर ध्रुव पांडव स्टेडियम में करते हैं.

Image caption राजिंदर पांडव

कैसे हुआ आईपीएल में चयन

ध्रुव पांडव स्टेडियम के सचिव राजिंदर पांडव बताते हैं कि प्रभ का खेल उन्हें भारत के पुराने दिनों के मशहूर विकेटकीपर फ़ारूख़ इंजीनियर की याद दिलाते हैं.

उन्हीं की तरह यह भी ओपनिंग बल्लेबाज़ भी हैं और विकेटकीपर भी. और उन्हीं की तरह आते ही धुआंधार खेलते हैं.

यहां मुख्य कोच तरमिंदर सिंह कहते हैं कि पुल और स्क्वॉयर ड्राइव उनके खास शाट हैं और वो पूर्व सलामी बल्लेबाज़ श्रीकांत की तरह खेलते हैं.

तरमिंदर कहते हैं, "कुछ ऐसे ही अंदाज़ में प्रभ ने किंग्स इलेवन के लिए दो ट्रायल मैचों में एक में 29 गेंदों में 50 और दूसरे में 32 गेंदों में अर्धशतक जमाया."

एशिया कप के अंडर 19 में कप्तान की गैर मौजूदगी में टीम का नेतृत्व करने का मौका मिला और विजय दिलाई. प्रदर्शन भी बेहतरीन रहा.

शायद यह सारी चीज़ें किंग्स इलेवन के मालिकों को काफ़ी जम गई.

Image caption प्रभसिमरन सिंह

'पांव ज़मीन पर टिके रहें'

18 साल के प्रभ ने अभी बारहवीं पूरी की है और कहते हैं कि आगे भी पढ़ाई करना चाहते हैं.

लेकिन सपना तो भारत के लिए खेलने का है और कुछ कर दिखाने का है.

प्रभ के परिवार वालों और कोच की तरह मुहल्ले के लोग भी काफ़ी खुश हैं. कहते हैं कि दिन-रात की मेहनत रंग लाई है और किस्मत ने भी खूब साथ दिया है.

एक पड़ोसी का कहना है कि बस एक दुख है कि अब यह बड़े लोग बन जाएंगे और बाकी लोगों की तरह इस गली से शायद दूर घर ले लेंगे. "मीडिया वाले और बड़े लोग आएंगे तो तंग गली शायद कुछ और तंग लगे."

इसमें कोई शक भी नहीं है क्योंकि प्रभ की मां जसबीर कौर का कहना है कि बच्चे भी ऐसी बात कर रहे हैं पर वो इस पुराने घर को छोड़ कर जाना नहीं चाहते.

पड़ोसी एक और बात कहते हैं कि प्रभ और अनमोल को एक बेहतरीन शुरुआत तो मिल गई है, अब ज़रूरी है कि उनके पांव ज़मीन पर टिके रहें. सचमुच. यह बात बहुत अहम है.

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