Australia vs India: विराट कोहली बोले, मैं कौन हूं, बताने की ज़रूरत नहीं

  • 25 दिसंबर 2018
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''नेट प्रैक्टिस को गोली मारो. खिलाड़ियों को आराम की ज़रूरत है.''

ये शब्द थे भारतीय क्रिकेट टीम के कोच रवि शास्त्री के. मौका था एडिलेड टेस्ट में भारत के ऑस्ट्रेलिया को पहले मैच में हराने के बाद का.

लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने पर्थ में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में पलटवार करते हुए भारत के 146 रन के बड़े अंतर से हरा दिया और 1-1 की बराबरी हासिल कर ली.

अब दोनों टीमें बॉक्सिंग डे यानी बुधवार 26 दिसंबर से मेलबर्न में तीसरे टेस्ट मैच में आमने-सामने होंगी. मैच से पहले टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने मीडिया से बात की.

कोहली ने कहा, ''ये बहुत ज़रूरी है कि मैदान पर बल्लेबाज़ टिके रहें. क्योंकि जैसा कि सब देख सकते हैं कि हमारी गेंदबाज़ी लगातार बेहतर हुई है. अगर हमने बाद में बल्लेबाज़ी की तो हम लीड लेने की कोशिश करेंगे. सभी बल्लेबाज़ों को अच्छा परफॉर्म करने की ज़रूरत है.''

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और क्या बोले कोहली?

आम लोगों के बीच अपनी छवि को लेकर जब विराट कोहली से सवाल पूछा गया तो वो बोले, ''मैं क्या करता हूं और क्या सोचता हूं. इस बारे में बैनर लेकर मैं लोगों को बताने नहीं जाऊंगा. मैं लोगों को ये नहीं समझाऊंगा कि मैं ऐसा हूं और आपको मुझे ऐसे पसंद करने की ज़रूरत है. मेरा इस पर कोई ज़ोर नहीं है. ये हर किसी की अपनी पसंद है. मेरा ध्यान सिर्फ़ मैच पर है.''

कोहली ने कहा, ''लोग मेरे बारे में क्या लिख रहे हैं, इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है.''

कमाल की बात है कि इतनी बड़ी हार के बावजूद कप्तान विराट कोहली ने कहा कि हम अच्छी क्रिकेट खेल रहे हैं. अगर टीम एकाग्रता दिखाएगी तो जो टीम ने एडिलेड में किया वही दोबारा कर सकती है.

अब भला जिस टीम के सामने जीत के लिए 287 रनों का लक्ष्य हो और वह 140 रनों पर ढेर हो जाए तो उसके खेल को अच्छा कैसे कह सकते हैं.

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Image caption रवि शास्त्री

बड़बोले शास्त्री?

कोच रवि शास्त्री के बयान भी इस सिरीज़ में छाए हुए हैं.

उनके 'बड़बोलेपन' को लेकर क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन कहते हैं कि अगर आपको इतना ही भरोसा है तो परिणाम भी देने होंगे.

''अगर परिणाम नहीं आएंगे तो लोग मज़ाक तो उड़ाएंगे ही, साथ ही विरोधी टीम भी फ़ायदा उठाएगी.''

''रवि शास्त्री को अपने आपको नियंत्रण में रखना चाहिए. जीत हो या हार, खेल से बड़ा कोई नहीं.''

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मेलबर्न में दबाव भारत पर

अब जो होना था सो हुआ लेकिन, क्या भारतीय टीम बॉक्सिंग डे से शुरू हो रहे मेलबर्न टेस्ट में जीत का पंच लगा सकती है.

इसे लेकर अयाज़ मेमन मानते हैं कि चांस तो है लेकिन परिस्थितियां ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में हैं.

ऑस्ट्रेलिया ने लड़ाई करते हुए वापसी की और बड़े अंतर से भारत को हराया.

अब भारत को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. उसने 1-0 की बढ़त गंवा दी, ऐसे में दबाव भारत पर ही होगा.

दूसरे टेस्ट मैच में भारतीय टीम के चयन पर भी सवाल उठे. बिना किसी स्पिनर के पर्थ में उतरना भारत को भारी पड़ा.

मेलबर्न में भारतीय टीम का कॉम्बिनेशन क्या होना चाहिए. इस सवाल के जवाब में अयाज़ मेमन का मानना है कि अभी कहना बेहद मुश्किल है, टीम का चयन तो पिच देखने के बाद ही होगा.

अयाज़ मेमन आगे कहते हैं कि चार गेंदबाज़ों को पर्थ में खेलाना कोई ग़लत निर्णय नहीं था.

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बल्लेबाज़ों के कंधे पर ज़िम्मेदारी

कुछ जानकारों का यह भी मानना था कि भारत के पुछल्ले बैट्समैन या आख़िरी बल्लेबाज़ों की नाकामी बढ़ गई है. लेकिन अगर पुछल्ले बल्लेबाज़ों से 140 रनों के अंतर को कम करने की उम्मीद की जाए और वही जीत भी दिला दें, तो फिर फ्रंट लाइन बल्लेबाज़ों की ज़रूरत ही क्या है.

अयाज़ मेमन मानते हैं कि रन बनाने की ज़िम्मेदारी शुरुआती पांच-छह बल्लेबाज़ों की होती है.

अगर वह 300 या 350 रन नहीं दे सकते तो फिर टेल यानी पुछल्ले से उम्मीद करना तो मूर्खतापूर्ण ही है.

दूसरा यह कि क्या स्पिनर को टीम में जगह देनी चाहिए थी या तेज़ गेंदबाज़ के तौर पर भुवनेश्वर कुमार को लेना चाहिए था.

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Image caption रविंद्र जडेजा, भुवनेश्वर कुमार, मोहम्मद शमी और उमेश यादव

कहां हुई ग़लती?

अब रविंद्र जडेजा या भुवनेश्वर कुमार खेलते तो शायद बल्लेबाज़ी मज़बूत हो जाती. लेकिन जिस पिच पर अधिकतम स्कोर (ऑस्ट्रेलिया के बनाए) 326 रन थे वहां इनसे कुछ अधिक असर नहीं होता.

अयाज़ मेमन मानते है कि उमेश यादव को रखना ग़लत साबित हो गया. लेकिन अगर उमेश यादव भारतीय टीम में है तो वह टेस्ट मैच खेलने के लिए ही हैं. इसे लेकर इतनी आलोचना नहीं होनी चाहिए.

भारतीय टीम की हार की एकमात्र वजह बल्लेबाज़ों की नाकामी है.

ख़ासकर दोनों ही सलामी बल्लेबाज़ तो दोनों ही पारियों में नाकाम रहे.

दस-बारह रन की भी शुरुआत नहीं मिली. दूसरी तरफ़ ऑस्ट्रेलिया की जीत इसलिए हुई क्योंकि उनके गेंदबाज़ों ने शानदार प्रदर्शन किया ही साथ ही सलामी जोड़ी फिंच और हैरिस ने पहली पारी में सौ से अधिक रन की साझेदारी की.

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लचर स्पिन डिपार्टमेंट

ऑस्ट्रेलिया के स्पिनर नाथन लॉयन की बात चलने पर अयाज़ मेमन कहते हैं कि उनकी तुलना रविंद्र जडेजा या कुलदीप यादव से नहीं हो सकती. आज वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ऑफ़ स्पिनर हैं.

अयाज़ मेमन आगे मानते हैं कि अगर भारत के आर अश्विन चोटिल थे तो यह एक दुविधा थी.

यह ठीक है कि टीम में एक ही स्पिनर की जगह थी लेकिन पिच को देखते हुए गेंदबाज़ों ने ख़राब गेंदबाज़ी नहीं की.

अगर विदेशी धरती पर भारत के साल भर के प्रदर्शन को देखा जाए तो 13 टेस्ट मैच में से 11 मैचों में भारत ने विरोधी टीम को दोनों पारी में ऑल आउट किया है.

सच बात तो यह है कि अगर बल्लेबाज़ 325 या 350 रन नहीं बनाते हैं तो गेंदबाज़ कितना बचाव करेंगे.

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पंत, रहाणे समेत टॉप ऑर्डर क्यों नाकाम?

युवा विकेटकीपर और बल्लेबाज़ ऋषभ पंत जिस तरह अपना विकेट गंवा रहे हैं शायद वह उसकी क़ीमत नहीं जानते हैं.

इस सवाल को लेकर अयाज़ मेमन मानते हैं कि बेशक, यही बड़ी बात है.

वह आक्रामक बल्लेबाज़ हैं. उन्हें कहा गया है कि अपनी तकनीक ना बदले यानी डिफेंसिव ना हो जाए. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि 15-20 रन की अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में ना बदले.

अयाज़ मेमन आगे कहते हैं कि ऋषभ पंत तो चलो नए खिलाड़ी हैं लेकिन अनुभवी अजिंक्य रहाणे जो दो अर्धशतक लगा चुके हैं, वो भी अब तक मैच जिताऊ पारी नहीं खेल सके हैं.

ऐसे में शीर्ष क्रम का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है. इस साल 1,200 के क़रीब रन बनाने वाले कप्तान विराट कोहली के अलावा किसी भी बल्लेबाज़ का योगदान यदा-कदा ही रहा है.

हां, ऑस्ट्रेलियाई पिचों पर चेतेश्वर पुजारा का बल्ला चल रहा है जिन्हें इंग्लैंड में टीम से बाहर रखा गया था. शीर्ष क्रम के और किसी बल्लेबाज़ में निरंतरता नहीं दिख रही.

ऋषभ पंत शरारत करते हैं या करवाई गई

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Image caption बॉबी सिंपसन

कमज़ोर कंगारुओं से भी मिली थी हार

क्रिकेट टीम गेम है लिहाजा सिर्फ़ एक बल्लेबाज़ के रन बनाने से आप नहीं जीत सकते, यह बिल्कुल साफ़ है.

ऐसे में याद आती है साल 1977-78 में बॉबी सिंपसन वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम जो कैरी पैकर सिरीज़ के कारण बेहद कमज़ोर हो गई थी.

तब उनके सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी पैकर सिरीज़ में चले गए थे. इसके बावजूद भारतीय टीम वहां सिरीज़ नहीं जीत सकी. ऑस्ट्रेलियाई टीम ने पांच टेस्ट मैचों की सिरीज़ 3-2 से जीती.

इसे लेकर अयाज़ मेमन का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया में भारत कभी सिरीज़ नहीं जीता है.

तब बिशन सिंह बेदी भारत के कप्तान थे. वह भारत की पूरी ताक़तवर 'ए' टीम थी क्योंकि भारत का एक भी खिलाड़ी कैरी पैकर सिरीज़ खेलने नहीं गया था.

ऑस्ट्रेलिया के पास केवल एक ही स्टार खिलाड़ी था - तेज़ गेंदबाज़ जेफ थॉमसन.

42 साल के बॉबी सिंपसन को रिटायरमेंट के बाद भी कप्तानी के लिए लाना पड़ा. तब बाकी सारे खिलाड़ी युवा थे. इस बार तो तब भी ठीक-ठाक टीम है.

उस्मान ख़वाज़ा और शॉन मार्श के पास अनुभव भी है.

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मौका नहीं गंवा सकते

ऑस्ट्रेलिया के उसी के घर में पहली बार हराने का सुनहरा मौक़ा है. अभी सिरीज़ बराबरी पर है.

लेकिन अगर भारत के बल्लेबाज़ रन से योगदान नहीं देंगे और ऐसे में अगर गेंदबाज़ भी निराश हो गए और उनकी लय खो गई तो फिर तो बहुत भारी पड़ जाएगा.

दूसरी तरफ़ अगर ऑस्ट्रेलिया ने सिरीज़ बराबरी पर रोक लिया तो भी उनकी जीत ही मानी जाएगी.

दुनिया की नम्बर एक टेस्ट टीम के ख़िलाफ़ एक से बढ़कर एक समस्याओं का सामना कर रही ऑस्ट्रेलिया कहीं अगर सिरीज़ जीत गई तो यह भारत की बहुत बड़ी हार होगी.

ऐसे में मेलबर्न टेस्ट मैच दोनों टीमों के लिए महत्वपूर्ण है.

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