जसप्रीत बुमराह: इस कोच की नज़र नहीं पड़ती तब कहां होता करियर?

  • 28 दिसंबर 2018
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मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड के तीसरे दिन का खेल ख़त्म होने तक भारतीय टीम सिरीज़ में बढ़त बनाने की स्थिति में दिख रही है तो इसकी सबसे बड़ी वजह जसप्रीत बुमराह हैं.

बुमराह ने ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में 15.5 ओवरों की गेंदबाज़ी में 33 रन देकर छह विकेट चटकाए. उनके इस छह विकेट में एक ओर शीर्षक्रम के तीन बल्लेबाज़ हैं तो दूसरी ओर आख़िरी के तीन विकेट.

ख़ास बात ये है कि बुमराह ने ऑस्ट्रेलियाई पारी में चार स्पैल में गेंदबाज़ी की और चारों स्पैल में उन्होंने भारतीय कप्तान विराट कोहली को कामयाबी दिलाई.

ऐसी कामयाबी कि उनके तीसरे स्पैल के दौरान ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क कमेंट्री करते हए बोल गए कि बुमराह उन्हें रेयान हैरिस की याद दिला रहे हैं, जिन्हें वे तब गेंद थमाते थे, जब उन्हें विकेट हासिल करने की ज़रूरत होती थी.

बहरहाल, उससे पहले बुमराह जिस तरह से एक 142 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के ठीक बाद 115 किलोमीटर की रफ़्तार वाली स्लो यॉर्कर फेंक कर शॉन मार्श को आउट किया, उस गेंद को देख कर क्रिकेट के विश्लेषक बुमराह की तारीफ़ करते नहीं थक रहे हैं.

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ग़ज़ब का नियंत्रण

ये कहा जा रहा है कि बुमराह का अपनी गेंदों पर ग़ज़ब का नियंत्रण है.

25 साल के बुमराह ने अपनी इस खासियत को समय समय पर ज़ाहिर किया है. लेकिन इसका पहला पाठ उन्होंने अपनी मां से सीखा था. गुजरात के अहमदाबाद में, 6 दिसंबर 1993 को अहमदाबाद के एक बिजनेस करने वाले परिवार में जन्मे बुमराह की जिंदगी ने उतार चढ़ाव झेले हैं.

महज सात साल के बुमराह थे, जब उनके पिता का निधन हो गया. उसके उनकी मां दलजीत बुमराह जो प्राइमरी स्कूल की प्रिंसिपल थीं और उन्होंने सिंगल पैरेंट को तौर पर अपने बच्चों को बड़ा किया.

बुमराह बचपन से टीवी पर तेज गेंदबाजों की नकल करने लगे थे और अपनी घर की दीवार के सहारे तेज गेंदबाज़ी की प्रैक्टिस करने लगे थे. गेंद के लगातार दीवार से टकराने वाली आवाज़ की शोर ने एक दिन शिक्षिका मां को इतना परेशान किया कि उन्होंने कह दिया कि आवाज़ कम हो तभी खेल सकते हो नहीं तो खेलना बंद.

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बुमराह का वो नायाब तरीका

बुमराह ने इसका नायाब तरीका निकाला, वे लगातार कोशिश करके गेंद वहां फेंकने लगे जहां से दीवार शुरू होती थी, यानी उस कोन पर जहां फर्श और दीवार मिलते थे, इसके चलते गेंद से होने वाली आवाज़ बेहद कम हो गई और बुमराह की प्रैक्टिस जारी रही.

बचपन से तेज़ गेंदबाज़ों की नकल करते करते बुमराह का एक्शन कब अनोखा बन गया है, ये उनको भी नहीं पता. लेकिन अगर आप उनके एक्शन को देखें तो लगता है कुछ अलग है. ये कुछ अलग है ही बुमराह के जीवन की पहचान बनने वाली थी.

उनकी अजीबोगरीब एक्शन के चलते बल्लेबाज़ अमूमन चकमा खाते रहे और स्कूली क्रिकेट से बुमराह की पहचान ऐसी बनी कि उन्हें गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के कैंप में चुन लिया गया, फिर वे एमआरएफ़ फाउंडेशन भी पहुंचे और देखते देखते गुजरात अंडर-19 की टीम के लिए भी चुन लिए गए.

बुमराह ने जब पहले ही मैच में सौराष्ट्र अंडर-19 के बल्लेबाज़ों को छकाना शुरू किया तो तब के गुजरात के रणजी कोट हितेश मजूमदार और टीम प्रबंधन ने उन्हें सैय्यद मुश्ताक अली टी20 मैच में मौका देने का फ़ैसला कर लिया.

ये साल था 2013 का, इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए बुमराह ने गुजरात की टीम को चैंपियन बनाने में अहम योगदान निभाया, फ़ाइनल में उन्होंने तीन विकेट चटकाए थे. लेकिन उनकी किस्मत दूसरी वजह से चमकी.

तब मुंबई इंडियंस के कोच जान राइट पुणे में चल रही सैय्यद मुश्ताक अली टी-20 टूर्नामेंट देखने पहुंचे थे और उनकी नज़र जसप्रीत बुमराह पर टिक गई थी.

उन्होंने उनका कांट्रैक्ट मुंबई इंडियंस के साथ कराया और देखते देखते हुए जसप्रीत बुमराह पहुंच गए उस ड्रेसिंग रूम में जहां सचिन तेंदुलकर जैसे जीनियस और लसिथ मलिंगा जैसे गेंदबाज़ मौजूद थे.

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सितारों की सोहबत का बुमराह पर असर

इन सितारों की सोहबत क्या असर दिखा सकती है, इसका अंदाजा बुमराह को पहले ही मैच में हो गया. दरअसल मुंबई इंडियंस ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के ख़िलाफ़ बुमराह को आईपीएल मैच में उतार दिया था.

बुमराह की पहली तीन गेंदों पर विराट कोहली ने बाउंड्री जड़कर उनका स्वागत किया था, तब हैरान परेशान और अचानक से लाइम लाइट में पहुंचे बुमराह को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं ऐसे मुश्किल वक्त में सचिन तेंदुलकर ने उन्हें सलाह दी कि केवल एक अच्छी गेंद से तुम्हारा मैच बदल जाएगा, बिलकुल चिंता मत करो. आख़िरकार हुआ भी यही बुमराह ने इसी ओवर में विराट कोहली को एलबीडब्ल्यू कर दिया. डेब्यू मैच में उन्होंने तीन विकेट चटकाए.

उनकी इस कामयाबी पर अमिताभ बच्चन ने भी ट्वीट करके उन्हें बधाई दी थी. लेकिन जसप्रीत बुमराह अचानक से आउट ऑफ़ फॉर्म भी हुए और फ़िटनेस की समस्या भी उन्हें परेशान करने लगी. लेकिन मुंबई इंडियंस की टीम का भरोसा उन पर बना रहा है.

लसिथ मलिंगा के साथ के चलते उन्हें यॉर्कर और स्लो बॉल के गुर सीखने में कोई मुश्किल नहीं हुई. वे इसे अपना घातक हथियार बनाने में कामयाब रहे. लेकिन सबसे बड़ी गुत्थी उनकी गेंदबाज़ी एक्शन ही साबित होता रहा.

इस बारे में मेलबर्न टेस्ट के तीसरे दिन के खेल के बाद बुमराह ने कहा, "बचपन से मैं काफ़ी गेंदबाज़ों को देखकर सीखता था, पर ये एक्शन कैसे डेवलप हुआ, ये नहीं मालूम. लेकिन कहीं भी गया किसी कोच ने इसे बदलने के लिए नहीं कहा. लोगों ने केवल ये कहा कि शरीर को मज़बूत बनाओ क्योंकि उन्हें लगता था कि शरीर पर ज़ोर पड़ने से मेरी स्पीड कम हो सकती है."

बुमराह को अपनी फ़िटनेस संबंधी मुश्किलों का अंदाज़ा भले नहीं रहा हो लेकिन अपने हुनर पर पूरा भरोसा था. इस भरोसे के साथ जब वे नेशनल क्रिकेट एकेडमी में भारत के गेंदबाज़ी कोच भरत अरुण से मिले तो उन्होंने भी उनके अंदाज़ पर अपना भरोसा बनाए रखा.

इन सबने मिलकर ऐसा असर दिखाया कि 2016 वे टी-20 टीम में चुन लिए गए और फिर उसी जनवरी, 2016 में ऑस्ट्रेलिया में वनडे टीम में भी शामिल कर लिए गए. वे देखते देखते भारतीय टीम के सबसे तेज़ गेंदबाज़ के तौर पर स्थापित हो चुके थे.

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कायम रहेगा बुमराह का जादू?

लेकिन एक सवाल बना हुआ था कि क्या टेस्ट मैचों में बुमराह का जादू ऐसे ही कायम रहेगा.

इस सवाल जवाब भारतीय क्रिकेट को 2018 के साल ने दिया. जनवरी में टेस्ट मैचों में डेब्यू करने वाले बुमराह लगातार अपनी गेंदबाज़ी से टीम इंडिया के लिए भरोसेमंद गेंदबाज़ साबित हुए हैं.

मेलबर्न टेस्ट की पहली पारी तक बुमराह नौ टेस्ट मैचों में 45 विकेट चटका चुके हैं. ये किसी भी भारतीय गेंदबाज़ के लिए रिकॉर्ड है. उनसे पहले डेब्यू साल में भारत के दिलीप दोषी ने सबसे ज्यादा 40 विकेट चटकाए थे.

हालांकि दुनिया भर के गेंदबाज़ों बुमराह अभी चौथे पायदान पर हैं, 1981 में डेब्यू करते हुए ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ टैरी एल्डरमैन ने 54 विकेट लिए थे. उनका रिकॉर्ड आज तक अटूट है.

इसके बाद 1988 में कर्टनी एम्ब्रोज ने 49 विकेट चटकाए थे. जबकि 2010 में डेब्यू करते हुए इंग्लैंड के स्टीवन फिन ने 46 विकेट लिए थे. ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में बुमराह स्टीवन फिन और एम्ब्रोज के रिकॉर्ड को तो पीछे छोड़ने का दमखम रखते ही हैं.

इतना ही नहीं मेलबर्न टेस्ट की पहली पारी में छह विकेट चटकाने वाले बुमराह ने वो कारनामा भी कर दिखाया जो उनसे पहले भारत का क्या कोई एशियाई गेंदबाज़ भी नहीं कर पाया था.

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एक ही कैलेंडर साल में बुमराह ने ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका में पारी में पांच विकेट चटकाने का कारनामा कर दिखाया. इसी साल जोहानिसबर्ग में 54 रन देकर पांच विकेट लेने के बाद बुमराह ने ट्रेंट ब्रिज में 85 रन देकर पांच विकेट लिए थे. अब मेलबर्न में 33 रन देकर छह विकेट.

बुमराह ने वाक़ई भारतीय क्रिकेट को एक नई पहचान दी है, वो मौजूदा समय में लगातार 140 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ़्तार से गेंद फेंक सकते हैं. अपनी वेरिएशन से दुनिया के किसी भी बल्लेबाज़ी क्रम को बिखेर सकते हैं.

उन्होंने समय के साथ ना केवल अपनी फ़िटनेस को बेहतर किया है बल्कि गेंदबाज़ी में इन स्विंगर और बाउंसर जैसे हथियारों को बेहतर बनाया है. उन्हें इस बात का बख़ूबी एहसास होगा कि केवल अनोखे एक्शन के सहारे इंटरनेशनल क्रिकेट में लंबे समय तक कामयाबी नहीं मिली सकती.

टेस्ट मैचों में अपनी शानदार गेंदबाज़ी पर बुमराह ने मेलबर्न में तीसरे दिन का खेल समाप्त होने के बाद कहा, ''मैंने अब तक भारत में टेस्ट नहीं खेला है, लेकिन दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में खेला हूं तो मुझे काफ़ी कुछ सीखने को मिला है, शुरुआत अच्छी रही है देखते हैं ये आगे कैसा रहता है.''

बुमराह ने अब तक के सफ़र में हर वो बात शामिल रही है, जो किसी खिलाड़ी को चैंपियन बनाती है, मसलन जीवन के शुरुआती सालों का संघर्ष, संघर्ष के दौर में बिखरे बिना अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखना, लक्ष्य को हासिल करने के लिए दिन रात की मेहनत और फिर हर पल नए प्रयोगों को अपनाने का कौशल.

यानी बुमराह खुद को टिकाए रख पाए तो भारतीय क्रिकेट के लिए उनकी कामयाबियों का ग्राफ़ आसमान तक पहुंच सकता है.

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बुमराह के सामने असली चुनौती यही है कि उन्होंने शुरुआत से जो उम्मीद जगाई है, उसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए उन्हें लंबे समय तक क्रिकेट के मैदान पर बने रहना होगा.

ये तभी हो पाएगा जब अपनी फ़िटनेस के साथ बुमराह अपने पल पल सीखने वाले जज़्बे और हुनर को साधने की कोशिश को ज़िंदा रख पाएंगे.

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