धोनी का वर्ल्डकप 2019 खेलना क्यों ज़रूरी है

  • 19 जनवरी 2019
महेंद्र सिंह धोनी इमेज कॉपीरइट Reuters

लोगों ने कहा, वह खत्म हो गया है.

लोगों ने कहा, वह अब बूढ़ा हो गया है.

लोगों ने कहा, वो अब टीम पर बोझ बन गया है.

लोगों ने कहा, उसे अब नए खिलाड़ी के लिए जगह देनी चाहिए.

लेकिन भारत को आईसीसी की तीन-तीन ट्रॉफ़ियां जिताने वाले महेंद्र सिंह धोनी ने हर बार की तरह एक बार फिर अपने आलोचकों को अपने बैट से जवाब दिया.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

ऑस्ट्रेलिया को उसकी ही धरती पर पहली बार वनडे सिरीज़ में हराने वाली टीम इंडिया में धोनी का योगदान अहम रहा. उन्होंने तीनों वनडे मैचों में हाफ़ सेंचुरी जड़ी और आख़िरी के दो वनडे मुक़ाबलों में वही फ़िनिशर धोनी दिखा, जिसके तमाम क्रिकेट प्रशंसक दीवाने हैं.

धोनी को वनडे मैचों में उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए 'मैन ऑफ़ द सिरीज़' चुना गया. उन्होंने सिरीज़ में कुल मिलाकर 193 रन बनाए और दो बार भारतीय टीम की जीत पक्की करने के बाद ही वापस पवेलियन लौटे.

वैसे धोनी की टीम इंडिया के लिए अहमियत क्या है, इसे टीम के कोच रवि शास्त्री के इस बयान से बखूबी समझा जा सकता है.

इमेज कॉपीरइट AFP

टेलीग्राफ़ के लिए इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन को दिए एक इंटरव्यू में शास्त्री ने कहा था, "आप धोनी की जगह किसी और से नहीं बदल सकते. ऐसे खिलाड़ी 30-40 साल में एक बार आते हैं. मैं भारतीयों से भी यही कहता हूँ. जब तक वो खेल रहा है, इसका मज़ा उठाओ. जब वो जाएंगे तो आप एक खाली जगह देखेंगे, जिसे भर पाना बेहद-बेहद मुश्किल होगा."

37 साल के धोनी टीम इंडिया के सबसे अनुभवी खिलाड़ी हैं और कप्तान विराट कोहली को समय-समय पर सलाह देते हुए भी दिखते हैं. डिसीज़न रिव्यू सिस्टम यानी डीआरएस लेने में कई बार विराट कोहली को धोनी से सलाह लेते हुए देखा गया है.

इमेज कॉपीरइट AFP

कप्तान न होने के बावजूद फील्ड प्लेसमेंट और डीआरएस में धोनी की सलाह पर रवि शास्त्री ने कहा था, "वो इसलिए क्योंकि जिस जगह धोनी होते हैं, वे चीज़ों को बेहतर तरीके से देख पाते हैं. खिलाड़ियों के साथ उनके रिश्ते बेहतरीन हैं, वे सभी धोनी को बहुत मानते हैं. ये पूरी टीम उन्हीं की खड़ी की हुई है क्योंकि वो 10 साल तक इसके कप्तान रहे हैं. ड्रेसिंग रूम में इस तरह का सम्मान पाना और इसका अनुभव होना बहुत बड़ा है."

ऑस्ट्रेलिया में इतिहास रचने के बाद भारतीय टीम को मई में इंग्लैंड में होने जा रहे वर्ल्ड कप 2019 का बड़ा दावेदार माना जाने लगा है. और हो भी क्यों ना ऑस्ट्रेलिया में टीम ने न केवल बल्ले और गेंद से बल्कि फ़ील्ड पर रन बचाकर और कुछ बेहतरीन कैच लेकर जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उससे उसका ये दावा और पुख़्ता हो गया है.

हालाँकि इंग्लैंड में विराट और उनके साथियों का प्रदर्शन बहुत ख़राब रहा था और वर्ल्ड कप की टीम की तैयारियों पर भी सवाल उठने लगे थे. यहाँ तक कि एशिया कप में भी हालाँकि भारत ने रिकॉर्ड आठवीं बार चैंपियनशिप पर कब्जा किया, लेकिन मध्य क्रम के बल्लेबाज़ों का प्रदर्शन आलोचकों को संतुष्ट नहीं कर पाया था.

इमेज कॉपीरइट Reuters

ज़्यादातर आलोचनाएं महेंद्र सिंह धोनी के प्रदर्शन को लेकर थी और सवाल पूछे जाने लगे थे कि क्या धोनी को टीम इंडिया का हिस्सा होना चाहिए? कहा जा रहा था कि अब जबकि वर्ल्डकप में एक साल से भी कम समय बचा है, धोनी को किसी युवा खिलाड़ी के लिए जगह खाली कर देनी चाहिए. क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन ने भी कहा था जिस तरह के फॉर्म में धोनी हैं, वो टीम पर बोझ से लगते हैं. उन्होंने कहा था आज के क्रिकेट में धोनी को बदलना होगा क्योंकि बेहतर रन रेट अब चलन या मापदंड बन चुका है. अगर ऐसा ना हो तो टीम को नुकसान होता है.

इसमें कोई शक़ नहीं कि धोनी के बल्ले में अब वो धार नहीं है, जैसा कि उनके स्वर्णिम दौर में हुआ करता था, लेकिन ये कहना भी ग़लत होगा कि अब टीम में उनकी जगह ही नहीं बची है.

इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल 2018 में चेन्नई सुपर किंग्स में लौटने के बाद धोनी ने 75 से अधिक के औसत के साथ रन बनाए थे और उनका स्ट्राइक रेट 150 के आस-पास था. यही नहीं, धोनी ने एक बार फिर अपनी कप्तानी में चेन्नई सुपर किंग्स को चैंपियन भी बनाया था.

लेकिन आईपीएल के बाद जो दो वनडे सिरीज़ खेली गई, उनमें धोनी का प्रदर्शन उनके रूतबे के हिसाब से नहीं है. इंग्लैंड के ख़िलाफ़ वनडे सिरीज़ में उनका औसत 39.50 का रहा और उनका उच्चतम स्कोर था 42 रन. एशिया कप में धोनी ने 19.25 की औसत से महज 77 रन बनाए और उनका अधिकतम स्कोर रहा 36 रन. वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ सिरीज़ में भी धोनी रंग में नहीं लौटे और 16.66 की औसत से वे केवल 50 रन ही जुटा सके और अधिकतम स्कोर रहा 23 रन.

इमेज कॉपीरइट TWITTER/BCCI

लेकिन 335 वनडे मुक़ाबलों का अनुभव रखने वाले और 10 हज़ार से अधिक रन बनाने वाले धोनी आलोचनाओं का जवाब देना अच्छी तरह जानते हैं और वो भी अपने प्रदर्शन से. टीम मेंबर्स में माही के नाम से मशहूर धोनी जानते हैं कि बुरी और अच्छी फॉर्म का फ़ासला महज एक उम्दा पारी का होता है और ऑस्ट्रेलिया पहुँचने के साथ ही धोनी ने जो किया उससे क्रिकेट समीक्षक फिर उनकी प्रतिभा के कसीदे पढ़ने लगे हैं.

बेशक, ऋषभ पंत ने ऑस्ट्रेलिया दौरे में टेस्ट सिरीज़ में धमाकेदार प्रदर्शन किया, लेकिन अब भी वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट के लिए टीम प्रबंधन को अगर धोनी या ऋषभ पंत में से किसी पर दांव लगाना होगा तो वो धोनी ही होंगे.

मेलबर्न में जीत के बाद कप्तान कोहली ने कहा भी, "टीम इंडिया में धोनी से अधिक समर्पित खिलाड़ी कोई नहीं है और पांचवें नंबर का बल्लेबाज़ी क्रम उनके लिए आदर्श है."

टीम इंडिया के कप्तान कोहली और कोच रवि शास्त्री को अच्छी तरह पता है कि 2019 के वर्ल्ड कप की क्या अहमियत है. शायद आलोचक भी जल्द ही इस अहमियत को समझ पाएंगे.

ये भी पढ़ें...

सिडनी से शुरू होगा टीम इंडिया का विश्व कप सफ़र

वो 5 चीज़, जो इस टेस्ट सिरीज़ में पहली बार हुई

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार