INDvsNZ: विराट कोहली एंड कंपनी से सिरीज़ बचा पाएगा न्यूज़ीलैंड?

  • 27 जनवरी 2019
विराट कोहली इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption विराट कोहली

जीत के रथ पर सवार भारत सोमवार को उसी बे-ओवल मैदान में मेज़बान न्यूजीलैंड से पांच एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की सिरीज़ की तीसरा मैच खेलेगा, जहां उसने दूसरे मैच में 90 रन से बड़ी जीत हासिल की.

भारत ने पहला मैच भी बड़ी आसानी से आठ विकेट से जीता था.

इसके साथ भी भारत दूसरी बार न्यूज़ीलैंड से उसी की ज़मीन पर कोई एकदिवसीय सिरीज़ जीतने कि स्थिति में पहुंच गया है, और वह भी बेहद मज़बूती से.

इससे पहले साल 2009 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने न्यूज़ीलैंड को पांच एकदिवसीय मैचों की सिरीज़ में 3-1 से हराया था.

तब भारत की टीम में कप्तान धोनी के अलावा सचिन तेंदुलकर, गौतम गंभीर, वीरेंद्र सहवाग, रोहित शर्मा, सुरेश रैना, युवराज सिंह, युसूफ पठान, हरभजन सिंह, ज़हीर खान, मुनाफ पटेल, प्रवीण कुमार और इंशात शर्मा शामिल थे.

यानी तब की टीम से महेंद्र सिंह धोनी और रोहित शर्मा ही अब भारतीय टीम का हिस्सा हैं.

वहीं न्यूज़ीलैंड की ओर से भी तब की टीम का हिस्सा रहे केवल दो खिलाड़ी रॉस टेलर और मार्टिन गप्टिल वर्तमान टीम में शामिल हैं.

न्यूजीलैंड ने टेके घुटने

लगातार दो जीत से भारत के कप्तान विराट कोहली न्यूज़ीलैंड की धरती पर टेस्ट के बाद वनडे में भी अपनी कप्तानी की परीक्षा में कामयाब हो गए है.

दरअसल न्यूज़ीलैंड की टीम ने जितनी आसानी से पहले दोनों मैचों में घुटने टेके हैं उससे क्रिकेट पंडित भी हैरान होंगे.

पहले ऑस्ट्रेलिया और फिर न्यूज़ीलैंड की ज़मीन पर जीत से विराट का कद और ऊंचा हुआ है.

वह बेहतरीन बल्लेबाज़ तो हैं, अब एक परिपक्कव कप्तान भी साबित हो रहे हैं.

बे-ओवल पर खेले गए दूसरे वनडे में टॉस जीतकर भारत ने पहले बल्लेबाज़ी का फ़ैसला किया.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

रोहित शर्मा और शिखर धवन की सलामी जोड़ी ने पहले विकेट के लिए 154 रन जोड़कर भारतीय टीम का काम आसान किया.

दोनों ने 14वीं बार वनडे में शतकीय साझेदारी की. रोहित ने 87 तो धवन ने 66 रन बनाए.

वहीं विराट कोहली ने 43, अंबाती रायडू ने 47 और महेंद्र सिंह धोनी ने नाबाद 48 रन बनाए.

इन सबके योगदान से भारत ने निर्धारित 50 ओवर में 4 विकेट खोकर 324 रन बनाए.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

वह तो न्यूज़ीलैंड के गेंदबाज़ों ने बाद में कुछ संभलकर गेंदबाज़ी की वर्ना तो एक समय स्कोर 350 रन से अधिक बनता हुआ लग रहा था.

ओवल के मैदान का असर?

न्यूज़ीलैंड के तमाम गेंदबाज़ भारतीय बल्लेबाज़ी के सामने कुछ ख़ास साबित नहीं हुए. वैसे भी बे-ओवल का मैदान काफी छोटा है.

इसका पूरा फ़ायदा पहले तो शिखर धवन और रोहित शर्मा और बाद में कोहली और धोनी ने उठाया.

रोहित शुरू में ऑफ़ स्टंप के बाहर की गेंदों पर परेशान दिखे और बाहर जाती गेंदों को छोड़ना ही बेहतर समझा. लेकिन एक बार जमने के बाद उन्होंने चिर परिचित अंदाज में ड्राइव, पुल और हुक शॉट खेले.

धोनी ने भी अपनी पारी के दौरान पांच चौके और एक छक्का जड़ा. इससे उनका आत्मविश्वास और पक्का हुआ होगा. आख़िरकार उनके प्रशंसक भी तो यही चाहते हैं.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

इसी दौरान धोनी एक दिलचस्प मोड़ पर भी पहुंच गए. वो वनडे क्रिकेट में विराट कोहली के कुल स्कोर के बहुत पास पहुंच गए हैं.

उनके नाम 337 एकदिवसीय मैचों में 10,414 रन हैं. वहीं कोहली के नाम 221 एकदिवसीय मैचों में 10,473 रन हैं.

धोनी पर सबकी नज़र

इत्तेफ़ाक से एकदिवसीय क्रिकेट में कोहली का सर्वाधिक स्कोर 183 रन है तो धोनी का भी नाबाद 183.

ख़ैर कोहली तो अभी काफ़ी क्रिकेट खेलेंगे जबकि धोनी विश्व कप के बाद कितना खेलते हैं इस पर सबकी नज़र है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

भारतीय पारी के बाद जब न्यूज़ीलैंड की टीम 325 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी तो उसके विकेट लगातार गिरते रहे और भारत ने उनका पुलिंदा 40.2 ओवर में 234 रनों पर ही बांध दिया.

इसमें भी पुछल्ले बल्लेबाज़ डग ब्रेसबैल के 57 रनों का योगदान रहा. कमाल की बात है कि उन्होंने जिस तरह पांच चौके और तीन छक्के उड़ाए उससे तो ऐसा लगा कि यह पूर्ण बल्लेबाज़ है. जबकि यह उनका पहला एकदिवसीय अर्धशतक था. वह 27 टेस्ट मैच और 18 एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेल चुके हैं.

अब सोमवार को भारत अगर बे-ओवल में तीसरा मैच भी जीत जाता है तो कप्तान कोहली बेफ्रिक होकर वापस भारत लौट सकते हैं क्योंकि बीसीसीआई ने उन्हें अंतिम दो मैचों में आराम देने का फ़ैसला करते हुए टीम की बागडोर रोहित शर्मा को सौंपी है, जो टी-20 सिरीज़ में भी कप्तानी करेंगे.

धारदार भारतीय गेंदबाज़ी

अगर न्यूज़ीलैंड ने कोई बड़ा पलटवार नहीं किया तो ही ऐसा होगा, क्योंकि भारत ने उसके हौंसले इतने पस्त कर दिये हैं कि उसकी वापसी अब बेहद मुश्किल लग रही है.

इसमें सबसे बड़ा योगदान भारतीय गेंदबाज़ी का है.

पिछले एक साल में दो-चार अवसरों को छोड़ कर भारतीय गेंदबाज़ी विपक्षी टीम में ख़ौफ़ पैदा कर रही है, वो भी अपने स्पिनर के दम पर.

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption यजुवेंद्र चहल

फिर चाहे कुलदीप यादव हो या यजुवेंद्र चहल या रविंद्र जडेजा. सभी अच्छी गेंदबाज़ी कर रहे हैं.

कुलदीप यादव मानते हैं कि जब स्कोरबोर्ड पर बड़ा स्कोर टंगा हो तो खुलकर गेंदबाज़ी की जा सकती है.

उनका यह भी मानना है कि छक्के खाने के डर से तेज़-तेज़ गेंद डालकर बचा नहीं जा सकता. अब उन्हें विदेशी बल्लेबाज़ों के ख़िलाफ़ कोई दबाव महसूस नहीं होता.

उनका मानना है कि पारी में बीच के ओवर यानी 25 से 35 ओवर के बीच विकेट लेना बहुत ज़रूरी है. इस काम में चहल का साथ भी उन्हें ख़ूब मिला है.

न्यूज़ीलैंड की ज़मीन पर एकदिवसीय क्रिकेट में लगातार दो बार चार विकेट लेने वाले कुलदीप यादव दुनिया के पहले ख़ब्बू स्पिनर हैं.

पिछले पांच मैच में वह 15 विकेट झटक चुके हैं. दूसरी तरफ तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी और भुवनेश्वर कुमार भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.

तीसरे मैच में यह देखना भी दिलचस्प होगा कि क्या भारत आलराउंडर हार्दिक पांड्या को अंतिम एकादश में जगह देता है या नहीं.

अपने बयान को लेकर विवाद में फंसे हार्दिक पांड्या को कप्तान विराट कोहली भी बेहद महत्वपूर्ण खिलाड़ी मानते हैं.

उनके आने से पुछल्ले बल्लेबाज़ों की समस्या हल होती है.

दूसरे वनडे में बे-ओवल के मैदान पर न्यूज़ीलैंड के मार्टिन गप्टिल, कोलिन मुनरो, रॉस टेलर, कप्तान केन विलियम्सन और टॉम लैथम के अलावा निकोलस को भी अच्छी शुरुआत मिली. लेकिन इनमें से कोई भी बल्लेबाज़ इसे बड़ी पारी में नहीं बदल सका.

भारत को हराना आसान नहीं

न्यूज़ीलैंड के कप्तान केन विलियम्सन यह भी नहीं समझ पा रहे होंगे कि उनके गेंदबाज़ भी क्यों नाकाम हो रहे हैं. आख़िरकार अपनी ही विकेट पर टीम की कामयाबी में उनका ही तो योगदान था.

तेज़ गेंदबाज़ ट्रैंट बोल्ट ख़ुद झटके खा रहे हैं. उन्होंने दो विकेट तो लिए लेकिन तब तक भारत बेहद मज़बूत स्थिति में पहुंच चुका था. बाक़ी गेंदबाज़ भी बेअसर ही रहे.

इमेज कॉपीरइट Inpho
Image caption केन विलियमसन कप्तान न्यूज़ीलैंड

वहीं पहले तो गेंदबाज़ों और उसके बाद भारतीय बल्लेबाज़ों ने दिखा दिया है कि अब भारत को मात देना आसान नहीं है.

इस प्रदर्शन से बड़बोले ही सही पर टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री ने भी चैन की सांस ली होगी. वह भी अपनी लगातार आलोचना से परेशान होकर काफ़ी कुछ कह चुके हैं. अब टीम की कामयाबी में उनके योगदान को नकारना मुश्किल होगा.

सबसे बड़ी बात टीम इंडिया ने दिखा दिया है कि विश्व कप की दिशा में वह मज़बूती से बढ़ रही है.

अब तो बस इस बात पर नज़र है कि क्या तीसरे वनडे में पलटवार कर न्यूज़ीलैंड सिरीज़ में रोमांच बरक़रार रखने में कामयाब होता है या नहीं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे

संबंधित समाचार