विराट कोहली को वर्ल्ड कप के लिए क्यों चाहिए धोनी का साथ

  • 12 मार्च 2019
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मोहाली में ऑस्ट्रेलिया ने भारत के साढ़े तीन सौ से अधिक रनों के पहाड़ को बौना साबित कर न केवल सिरीज़ में वापसी की, बल्कि अक्सर भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली की आलोचना में कुछ न कह पाने वालों को भी कुछ कहने का मौक़ा दे दिया.

भारत के वनडे इतिहास में ये पहला मौक़ा था जब टीम इंडिया को 350 रनों का लक्ष्य खड़ा करने के बाद हार का सामना करना पड़ा. इससे पहले इतने रन बनाने पर भारत को हमेशा जीत ही मिली थी.

आलोचकों को मौक़ा मिल गया कि इतना बड़े स्कोर का बचाव न कर पाने पर क्या कप्तान विराट कोहली की टीम इंडिया की विश्व कप की तैयारियां पूरी हैं. और क्या बतौर कप्तान कोहली अभी परिपक्व नहीं हुए हैं?

मोहाली में जब ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भारतीय टीम किसी तरह मैच बचाने के लिए जूझ रही थी और भारतीय फ़ील्डर मैदान में रन रोकने के लिए पसीना बहा रहे थे. यहाँ तक कि आम तौर पर क्लोजिंग फ़ील्ड में नज़र आने वाले कप्तान विराट कोहली बाउंड्री लाइन पर फील्डिंग कर रहे थे, ऐसे संकट के लम्हों में अक्सर पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से सलाह मशविरा करने वाले कोहली मुक़ाबले के दौरान अलग-थलग से दिखाई दिए.

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धोनी महत्वपूर्ण हैं?

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पाँच मैचों की वनडे सिरीज़ के आख़िरी दो मुक़ाबलों में पूर्व कप्तान और विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी को आराम दिया गया है. क्रिकेट के कई जानकार कई बार ये बात अलग-अलग मौक़ों पर दोहरा चुके हैं कि अगर धोनी टीम में रहते हैं तो विराट का काम आसान हो जाता है.

धोनी विकेट के पीछे खड़े होकर लगातार रणनीति तैयार करते हैं. वह गेंदबाज़ों से लगातार बातचीत करते रहते हैं. वह उनका हौसला बढ़ाते हैं. इसके अलावा विकेटकीपिंग करते हुए धोनी विरोधी बल्लेबाज़ों को अपने माइंड गेम से भी परेशान करते हैं.

जब कोहली के हाथों में बल्ला होता है तब उन्हें किसी की सलाह की ज़रूरत नहीं होती. वह अपनी बल्लेबाज़ी के दम पर किसी भी वक़्त मैच का नक्शा बदलने की कूव्वत रखते हैं, लेकिन उन हालात पर कोहली का बस नहीं चलता जब उनके गेंदबाज़ विरोधियों के सामने बेहद साधारण से लगने लगते हैं और विपक्षी बल्लेबाज़ों को काबू करने के उनके दांव काम नहीं आते.

उस्मान ख़्वाजा लगातार शतक की ओर बढ़ रहे थे. तभी जसप्रीत बुमराह ने उन्हें 91 के स्कोर पर आउट कर दिया. लेकिन विराट ने अगले ओवर में बुमराह को गेंदबाजी के मोर्चे से हटा लिया.

बुमराह के इस ओवर में ग्लेन मैक्सवेल ने दो चौके लगाए थे. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि अहम विकेट लेने वाले गेंदबाज़ को अगला ओवर न दिया जाए. इसके बाद जब तक विराट कोहली एक बार फिर से बुमराह को गेंदबाज़ी के मोर्चे पर लेकर आए तब तक काफ़ी देर हो चुकी थी.

मोहाली में टीम इंडिया को विकेटों की सख़्त दरकार थी. इसके बावजूद कोहली ने पार्ट टाइम गेंदबाज़ों को बहुत जल्द ही गेंद थमा दी. विजय शंकर को 10वें ओवर में ही मोर्चे पर लगा दिया और केदार जाधव को 15वें ओवर में गेंद थमा दी.

तो क्या कोहली पार्ट टाइम गेंदबाज़ों का कोटा जल्द से जल्द समाप्त करना चाहते थे. ये रणनीति इसलिए भी कई एक्सपर्ट के गले नहीं उतरी क्योंकि उस वक़्त एरोन फ़िंच और उस्मान ख़्वाजा बड़े आराम से रन बना रहे थे.

युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव को इस मैच में विकेट के पीछे से ख़ास दिशानिर्देश नहीं मिली और वे बिना धोनी की सलाह के बेअसर नज़र आए. शुरुआत के 12 ओवरों में इन दोनों ने 72 रन ख़र्च कर दिए और इन्हें कोई विकेट नहीं मिला.

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कोहली 'आधे कप्तान'

पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी ने भी सोमवार को कहा कि महेंद्र सिंह धोनी भारतीय टीम के आधे कप्तान हैं. उन्होंने कहा कि उनकी ग़ैर-मौजूदगी में कप्तान विराट कोहली ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ चौथे वनडे में असहज नज़र आ रहे थे.

पूर्व स्पिनर बेदी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "मैं टिप्पणी करने वाला कौन होता हूं लेकिन हम सभी हैरान थे कि धोनी को आराम क्यों दिया गया और विकेट के पीछे, बल्लेबाज़ी और फ़ील्डिंग में उनकी कमी खली. वह (कोहली) एक तरह से आधा कप्तान है."

उन्होंने कहा, "धोनी अब युवा नहीं होने जा रहे हैं और वह पहले जैसे फ़ुर्तीले भी नहीं हैं लेकिन टीम को उनकी ज़रूरत है."

मोहाली में धोनी की जगह ऋषभ पंत को बतौर विकेटकीपर खिलाया गया था.

पंत पर दबाव उस समय और बढ़ गया जब 44वें ओवर में चहल ने एक वाइड गेंद फेंकी और ऐसा लगा कि गेंद पर टर्नर के बल्ले का किनारा लगकर पंत ने कैच लपका है.

पंत ने कप्तान कोहली को डीआरएस लेने के लिए कहा और कोहली ने तुरंत डीआरएस ले भी लिया, लेकिन बाद में फ़ैसला ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में गया.

पंत की एक और ग़लती से कोहली और दर्शक नाख़ुश नज़र आए. जब-जब पंत विकेट के पीछे गेंद छोड़ रहे थे, तब-तब दर्शकों ने स्टेडियम में धोनी-धोनी चिल्लाना शुरू कर दिया था.

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धोनी के पास शांत भाव है

बेदी ने कहा, "पंत जंगली घोड़ा है. किसी को उन पर लगाम लगानी होगी. ऐसा कौन करेगा? शायद सपोर्ट स्टाफ़ ऐसा करने में सक्षम हो. वह बार-बार ग़लतियां दोहरा रहे हैं और स्टंप के पीछे भी उन्हें काफ़ी काम करने की ज़रूरत है. आपकी चयन समिति के अध्यक्ष (एमएसके प्रसाद) विकेटकीपर हैं, आपको कम से कम उनसे बात करनी चाहिए."

बेदी ने कहा कि धोनी की मौजूदगी से टीम शांत भाव से खेलती है. कप्तान को भी उनकी ज़रूरत महसूस होती है और उनके बिना वह असहज नज़र आते हैं, यह अच्छे संकेत नहीं हैं. बेदी ने इसके साथ ही कहा कि भारतीय टीम को विश्व कप से पहले वनडे टीम में प्रयोग नहीं करने चाहिए थे.

बेदी ने कहा, "मैं निजी तौर पर चाहता हूं कि वह वर्तमान में जियें. विश्व कप में अब भी ढाई महीने का वक्त है. केवल अपना खेल खेलो. विश्व कप के लिये हम पिछले डेढ़ साल से प्रयोग कर रहे हैं और मैं इससे कतई ख़ुश नहीं हूं."

बेदी ने इसके साथ ही कहा कि 23 मार्च से शुरू होने वाला आईपीएल विश्व कप से पहले टीम के लिये गंभीर समस्या पैदा कर सकता है.

उन्होंने कहा, "इनमें से कोई भी आईपीएल के दौरान चोटिल हो सकता है. आप ऐसी उम्मीद नहीं कर सकते हैं कि खिलाड़ी फ्रेंचाइजी की तरफ़ से खेलते हुए अपना सौ फीसदी न दें."

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