विश्व कप 2019: भारत या ऑस्ट्रेलिया किसकी वर्ल्ड कप टीम ज़्यादा मजबूत

  • 17 अप्रैल 2019
एरॉन फिंच, विराट कोहली इमेज कॉपीरइट Getty Images

आईसीसी क्रिकेट विश्व कप 2019 के लिए भारत के साथ ही पांच बार की वर्तमान विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया ने भी अपनी टीम की घोषणा कर दी है.

टीम में स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर की वापसी हुई. हालांकि टीम की कमान यानी कप्तानी एरॉन फिंच को ही दी गई है जिन्होंने हाल ही में भारत और पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सिरीज़ में अपनी टीम को जीत दिलाई थी.

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प्रतिबंध से लौटने के बाद से जहां स्टीव स्मिथ कुछ खास रंग नहीं दिखा सके हैं और आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए सात मैचों में 37.20 की औसत से महज 186 रन ही बना सके हैं. वहीं डेविड वार्नर अपने चिर परिचित अंदाज में दिख रहे हैं और फिलहाल आईपीएल 2019 में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ हैं. अब तक खेले गए आठ मैचों में वार्नर 80 की औसत से 400 रन बना चुके हैं.

यानी विश्व कप में यदि वार्नर इसी अंदाज में खेलते रहे तो वो कितने ख़तरनाक साबित हो सकते हैं यह कयास लगाना मुश्किल नहीं होगा.

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Image caption एरॉन फिंच की कप्तानी में लगातार आठ वनडे जीत चुका है ऑस्ट्रेलिया

फिंच के आठ कमाल

इंग्लैंड के ख़िलाफ़ वनडे सिरीज़ में टिम पेन की कप्तानी में मिली 0-5 से हार के बाद फ़रवरी 2017 के बाद एरॉन फिंच को कप्तानी दी गई थी.

फिंच की कप्तानी में ऑस्ट्रेलियाई टीम अपनी ही धरती पर पहले दक्षिण अफ़्रीका से फिर भारत के हाथों वनडे सिरीज़ 1-2 से हार गई.

लेकिन चयनकर्ताओं ने उनकी कप्तानी में भरोसा जताते हुए उन्हें भारत के दौरे के लिए भी कप्तान बरकरार रखा और यहा से फिंच ने वो कमाल किया जिसकी बदौलत वो विश्व कप टीम के कप्तान चुने गए हैं.

भारत में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने पहले दो मैच हारने के बाद पांच मैचों की सिरीज पर कब्जा और फिर पाकिस्तान को 5-0 से वनडे सिरीज़ में पछाड़ कर बताया कि आखिर वर्ल्ड चैंपियन खेलते कैसे हैं.

फिंच की कप्तानी में ऑस्ट्रेलियाई टीम पिछले 18 में से 10 मैच जीत चुकी है. और यह तब, जब स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर सरीखे खिलाड़ी उस टीम में शामिल नहीं थे.

अब जबकि विश्व कप की टीम में उनकी वापसी हो गई है और इस दौरान आईपीएल में स्मिथ औसत तो वार्नर अपने अव्वल फॉर्म में नज़र आ रहे हैं तो भारतीय टीम के लिए ऑस्ट्रेलिया को हरा पाना कितना मुश्किल होगा?

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Image caption उस्मान ख्वाजा

फिंच, उस्मान, मैक्सवेल और मार्श की चौकड़ी

ऑस्ट्रेलियाई टीम स्मिथ और वार्नर के बिना ही पिछले आठ मैचों से अपराजित है.

इन जीतों के नायब खुद कप्तान एरॉन फिंच रहे हैं तो उनके साथ ही पिच पर उतरने वाले सलामी बल्लेबाज़ उस्मान ख्वाजा इसके आधार.

इन आठ जीतों में फिंच ने 81.5 की औसत से 571 रन तो केवल 30 वनडे पुराने ख्वाजा ने 70.87 की औसत से 567 रन बनाए हैं.

टीम के मजबूत ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल ने पिछले 7 मैच में 329 रन बना चुके हैं तो शॉन मार्श ने 91 और 61 रनों की पारियां खेली हैं. उन्होंने 2018 से अब तक 18 मैचों में चार शतक भी जड़े हैं.

ये वो दो खिलाड़ी हैं जिनका इंग्लैंड की धरती पर प्रदर्शन गेम चेंजर बन सकता है.

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विराट, धवन और रोहित की तिकड़ी

इधर भारत ने शिखर धवन और रोहित शर्मा पर अपनी अपनी पारी शुरू करवाने में भरोसा जताया है.

रोहित शर्मा ने बीते दो सालों में 53 मैचों में 12 शतकों के साथ 2879 रन तो उनके सलामी जोड़ीदार शिखर धवन ने इस दौरान 54 मैच खेले हैं और 7 शतकों समेत 2277 रन बनाए हैं.

इन दोनों ने जब जब भारत को अच्छी शुरुआत दी है भारतीय टीम ने विपक्षी टीम के ख़िलाफ़ मजबूत लक्ष्य रखे हैं.

भारत के पास ट्रंप कार्ड के रूप में खुद कप्तान विराट कोहली है जिन्होंने न केवल रनों का अंबार लगाने के एक से बढ़ कर एक कारनामें किए हैं बल्कि वनडे में 12 बार 200 रनों के अधिक की साझेदारी का रिकॉर्ड रखते हैं.

विराट ने अपने सलामी बल्लेबाज़ रोहित शर्मा के साथ पांच बार दोहरी शतकीय साझेदारी निभाई है.

विराट बीते दो सालों के दौरान 51 वनडे में 15 शतकों के साथ 3273 रन बनाए हैं तो वहीं 10 बार 'मैन ऑफ़ द मैच' भी बने.

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धोनी- बस नाम ही काफी है

इनके साथ ही टीम के पास महेंद्र धोनी जैसा बेहद अनुभवी क्रिकेटर है जिन्हें वनडे के बेस्ट फिनिशर के रूप में जाना जाता रहा है. हालांकि बढ़ती उम्र के साथ उनके इस स्किल की धार थोड़ी कुंद ज़रूर हुई है लेकिन इस दौरान उन्होंने विकेट के पीछे अपनी चपलता से कई मैचों के रुख मोड़ने का काम बखूबी किया है.

धोनी ने विकेट के पीछे से न केवल अब तक 443 खिलाड़ियों की आउट किया है बल्कि उनकी तरकश में 50 की औसत से 10 हज़ार से अधिक रन भी हैं.

साथ ही उनके पास कप्तानी का वो अनुभव है जिसकी बदौलत उन्हें विराट का डीआरएस यानी 'धोनी रिव्यू सिस्टम' की संज्ञा भी दी जाने लगी.

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Image caption दिनेश कार्तिक

नंबर चार पर कौन उतरेगा?

किसी भी टीम में जिस नंबर चार पर बल्लेबाज़ी को लेकर बेहद चर्चा रहती है वहां कौन उतरेगा इस पर थोड़ा असमंजस अभी भी बना हुआ है.

हालांकि अंबाति रायुडू को मौका नहीं दिया गया है लिहाजा इस पोजीशन पर दिनेश कार्तिक या के राहुल के खेलने की संभावना जताई जा रही है.

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गेंदबाज़ी में अव्वल भारत

जब बात बॉलिंग की करें तो इसमें कोई शक नहीं कि भारतीय तेज़ गेंदबाज़ी इस वक्त दुनिया भर की किसी भी टीम के मुक़ाबले कहीं मजबूत दिखती है.

नई गेंद से जसप्रीत बुमराह, भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी की तिकड़ी इंग्लैंड की धरती पर विपक्षी टीम को बेहद परेशान करेगी इसमें शायद ही किसी को शक हो.

भुवनेश्वर कुमार के पास वनडे में 118 विकेट लेने का अनुभव है. वो 135-140 की स्पीड से गेंद से जितना बेहतर इनस्विंग करते हैं उतनी ही आसानी से आउटस्विग भी डालते हैं और इस साल ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के ख़िलाफ़ 10 मैचों में वो 19 विकेट ले चुके हैं.

वहीं भुवी से आधे से भी कम मैच खेल कर अपनी गुडलेंथ और शॉर्टपिच गेंदों से बीते दो सालों के दौरान 37 मैचों में 68 विकेट ले चुके बुमराह जितने खतरनाक हैं वहीं किसी भी वक्त अपनी यार्कर गेंद से वो बल्लेबाज़ की गिल्लियां बिखेरने में महारथ रखते हैं, खास कर डेथ ओवर्स में.

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Image caption मिशेल स्टार्क

दूसरी ओर पैट कमिंस, मिशेल स्टार्क, मार्कस स्टोइनिस ऑस्ट्रेलियाई टीम की से सुसज्जित ऑस्ट्रेलियाई पेस बैटरी कहीं कमतर नहीं दिखती. मिशेल स्टार्क 2015 विश्व कप के प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट रहे थे. लेकिन तब से कई बार फिटनेस की वजह से टीम से बाहर भी रहे.

ऑस्ट्रेलिया को स्टार्क की फिटनेस का जितना साथ मिलेगा, टीम की जीत की रथ उतनी ही तेज़ी से आगे बढ़ेगी.

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रिकॉर्ड में ऑस्ट्रेलिया कहीं आगे

बात यदि विश्व कप में दोनों टीमों के बीच खेले गए मैचों की करें तो कंगारू टीम का पलड़ा भारत से कहीं भारी दिखता है. विश्व कप में दोनों टीमें 11 बार भिड़ी हैं और इनमें से केवल तीन में भारत को जीत मिली है जबकि ऑस्ट्रेलिया 8 मैच जीत चुका है.

अब तक दोनों देशों के बीच 98 मुक़ाबले हुए हैं और यहां भी ऑस्ट्रेलिया के पलड़े में 42 जबकि भारत के हिस्से में 28 जीत आई है. 27 मैच ड्रॉ रहे जबकि एक मैच टाई.

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