वर्ल्ड कप 2019: इंग्लैंड जाते ही टीम इंडिया पर नंबर चार' का भूत हावी

  • 26 मई 2019
महेंद्र सिंह धोनी, केएल राहुल इमेज कॉपीरइट Getty Images

इंग्लैंड में इसी महीने की 30 तारीख से आईसीसीसी विश्व कप क्रिकेट का बिगुल बज उठेगा.

पहले मैच में मेज़बान इंग्लैंड का सामना दक्षिण अफ्रीका से होगा, और दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ ही दो बार की विश्व चैपियन भारतीय टीम 5 जून से अपने अभियान का आगाज़ करेगी.

लेकिन इससे पहले शनिवार को खेले गए पहले अभ्यास मैच में न्यूज़ीलैंड ने भारत को बेहद आसानी से छह विकेट से मात देकर टीम की बल्लेबाज़ी की पोल खोल दी.

इस मुक़ाबले में भारत के कप्तान विराट कोहली ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया.

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Image caption केन विलियमसन

यह फ़ैसला ग़लत साबित हुआ क्योंकि पूरी भारतीय टीम 39.2 ओवर में ही महज़ 179 रनों पर ढेर हो गई.

रविंद्र जडेजा ने 54 और हार्दिक पांड्या ने 30 रन बनाए.

जवाब में न्यूज़ीलैंड ने जीत का लक्ष्य कप्तान केन विलियमसन के 67 और बेहद अनुभवी रॉस टेलर के 71 रनों की मदद से 37.1 ओवर में चार विकेट खोकर हासिल कर लिया.

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Image caption रविंद्र जडेजा

नंबर चार का सवाल

इस अभ्यास मैच में अगर एकाध खिलाड़ी को छोड़ दिया जाए तो लगभग वही भारतीय टीम खेली जो विश्व कप में खेलती नज़र आएगी.

इस अभ्यास मैच में अगर भारतीय बल्लेबाज़ नाकाम रहे तो गेंदबाज़ भी कुछ ख़ास नही कर सके.

हालांकि इस मैच के परिणाम को लेकर क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली ज़्यादा परेशान नही है, लेकिन जिस चार नम्बर को लेकर पूरे साल भर चर्चा होती रही उसे लेकर अब भी सवाल जस के तस है.

न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ नम्बर चार पर उतरे केएल राहुल केवल छह रन ही बना सके.

इसे लेकर विजय लोकपल्ली कहते है कि विजय शंकर शायद पूरी तरह फिट नही है, रविंद्र जडेजा ने अर्धशतक जमाकर टीम को भरोसा दिया है कि वह रन बना सकते हैं.

लेकिन दिनेश कार्तिक का फॉर्म एक ही मैच से नहीं आंका जा सकता लेकिन ऊपर के चार बल्लेबाज़ 20 रन पार नही कर सके.

धोनी तक इसमें शामिल है. वैसे जब भारत बल्लेबाज़ी कर रहा था तब पिच गेंदबाज़ो का साथ दे रही थी जिसका फ़ायदा ट्रेंट बोल्ट ने चार विकेट लेकर उठाया.

रही बात केएल राहुल की तो उनका फॉर्म में आना बेहद ज़रूरी है लेकिन उसी तरह रोहित शर्मा और शिखर धवन भी कुछ रन बनाएं.

इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा. नम्बर चार को लेकर बहुत चर्चा हो चुकी है.

नम्बर चार अकेला खिलाड़ी नहीं होता है जो मैच जिता सके.

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Image caption केएल राहुल और हार्दिक पांड्या

धोनी बेहतर विकल्प?

अब ऐसा भी नहीं है कि अगर भारत के पास चार नम्बर पर अच्छा खिलाड़ी नहीं है तो टीम लड़खड़ा जाएगी.

अभ्यास मैच में मुख्य समस्या यह थी कि शुरुआत बेहद ख़राब रही. रोहित शर्मा और शिखर धवन जिस मैच में अच्छी शुरुआत देंगे वहां नम्बर चार के बल्लेबाज़ पर दबाव कम होगा और उसके लिए हालात अनुकूल होंगे.

इसका एक कारण यह है कि कप्तान विराट कोहली नम्बर तीन पर हैं.

नीचे के क्रम में महेंद्र सिंह धोनी है और विजय लोकपल्ली यह भी मानते हैं कि धोनी को ही नम्बर चार पर आना चाहिए.

अगर धोनी नम्बर चार पर आते है तो उन्हें सबसे अधिक गेंदें खेलने का अवसर मिलेगा.

विजय लोकपल्ली कहते हैं कि इससे उन्हें अपने रन बनाने का मौक़ा तो मिलेगा और वह साथी बल्लेबाज़ के रन बनवाने में भी मदद करेंगे.

ऐसे में धोनी ही नम्बर चार के लिए ठीक हैं, इसे लेकर सोचना पड़ेगा लेकिन केएल राहुल पर यह कहकर दबाव नहीं बनाया जा सकता कि चार नम्बर पर जाइए और रन बनाइए.

वैसे पिछले दिनों सचिन तेंदुलकर ने कहा कि धोनी को नम्बर पांच पर आना चाहिए.

इसे लेकर विजय लोकपल्ली का मानना है कि वह बहुत बड़े खिलाड़ी है उनकी बात पर टिप्पणी नही की जा सकती लेकिन वह कहते हैं कि कई बार नम्बर चार की बल्लेबाज़ी तो बहुत जल्दी आ जाती है.

वह कहते हैं, "मान लीजिए नम्बर चार पांच या दस ओवर तक आ जाता है तो भी उसके पास चालीस ओवर होंगे."

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ऐसे हालात में विजय लोकपल्ली धोनी के साथ जाना चाहते हैं.

उनके अनुसार तब तक शायद विराट कोहली आउट हो चुके होंगे और अगर वह विकेट पर हों तो फ़िर तो कहना ही क्या.

अगर धोनी और विराट की साझेदारी बचे हुए चालीस ओवर तक चले तो भारत के रन 300 से अधिक होंगे.

विजय लोकपल्ली यह भी कहते है कि टीम मैनेजमैंट यह समझता है कि किसे नंबर चार पर आना चाहिए और किसे पांच पर, लेकिन उसे परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने होते हैं.

ऐसे में क्रिकेट प्रेमियों को थोड़ा इंतज़ार करना चाहिए कि नम्बर चार पर क्या केएल राहुल आते हैं या फिर धोनी या विजय शंकर.

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Image caption महेंद्र सिंह धोनी

आख़िर में लाख टके का सवाल कि अगर बाकी बल्लेबाज़ कुछ ना करें तो हार का ठीकरा नम्बर चार के सिर ना फोड़ा जाए.

इसे लेकर विजय लोकपल्ली मानते हैं कि सलामी बल्लेबाज़ भी तो उतने ही ज़िम्मेदार हैं.

नम्बर तीन महत्वपूर्ण है, नम्बर पांच को आकर नीचे के बल्लेबाज़ों को सहयोग करना पड़ता है.

चार नम्बर ठीक है लेकिन उसी पर पूरी टीम का दारोमदार नहीं हो सकता.

और फिर ऐसा कौन सा खिलाड़ी पूरी दुनिया में है जो लगातार नम्बर चार पर आकर इतने दबाव का सामना करता रहे. क्रिकेट के इतिहास में ऐसे खिलाड़ी बहुत कम रहे हैं.

सबसे बड़ी बात टीम गेम से किसी एक खिलाड़ी को इतनी अहमियत भी ना दी जाए.

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