कहीं इंज़माम-उल-हक़ के दबाव से दबी तो नहीं है पाकिस्तानी टीम

  • 19 जून 2019
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विश्व कप में पाकिस्तान क्रिकेट टीम का एक चेहरा हर मौक़े पर आगे दिखता है. इंग्लैंड के टॉन्टन में ऑस्ट्रेलिया के साथ मैच से पहले की तैयारियों में वो चेहरा बिल्कुल मोर्चे पर था.

यहां तक कि वो व्यक्ति पाकिस्तानी क्रिकेट टीम की हरे रंग की पोशाक भी नहीं पहनता है. यह चेहरा मैनचेस्टर में भारत-पाकिस्तान के मैच से पहले भी मैदान पर पिच के मुआयने में कप्तान और कोच से बातचीत करता दिखा. वो चेहरा नेट में प्रैक्टिस के वक़्त अपने खिलाड़ियों को गुरु मंत्र देता दिखता है.

चेहरे पर बड़ी दाढ़ी और पहनावा पारंपरिक शलवार कमीज़. इसी तेवर और कलेवर में इंज़माम हर जगह वर्ल्ड कप में पाकिस्तान की टीम के साथ दिखते हैं.

अगर कोई इंज़माम-उल-हक को नहीं पहचानता हो तो वो धोखा खा सकता है कि मैदान में एक मौलवी कहां से आ गया.

ऐसा ही एक वाकया टि्वटर पर सक्रिय रहने वाले तारेक फतेह के साथ भी हुआ, जब वो खुद उनकी वेश- भूषा से घोखा खा गए.

इज़माम अपनी मौजूदगी का अहसास हमेशा कराते हैं लेकिन सवाल ये है कि मुख्य चयनकर्ता के तौर पर पाकिस्तान की टीम को उनका कितना फायदा मिल रहा है.

पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि मुख्य चयनकर्ता के तौर पर इंज़माम का वर्ल्ड कप की टीम में काफ़ी दख़ल रहा है.

जब भारत से हार के बाद पाकिस्तान में कप्तान सरफ़राज़ अहमद, कोच मिकी आर्थर और कई खिलाड़ियों के लिए अपमानजनक बातें कही जा रही हैं ऐसे में अब इंज़माम की भूमिका पर भी उंगली उठने लगी है.

ज़ाहिर है पाकिस्तान की हार में कप्तान सरफ़राज़, कोच अर्थर और शोएब मलिक जैसे खिलाड़ियों की भी जवाबदेही है लेकिन इंज़माम की भूमिका भी निशाने पर आ गई है. पाकिस्तानी मीडिया में पूछा जा रहा है कि इंज़माम ने मुख्य चयनकर्ता के तौर पर कैसे लोगों को टीम में रख लिया है.

पाकिस्तान के चैनलों की टीवी रिपोर्ट में सवाल पूछे जा रहे हैं कि इंज़माम को जवाब देना चाहिए कि बुरी तरह से फ्लॉप रहे शोयब मलिक को वर्ल्ड कप के लिए क्यों चुना? वो इंग्लैंड में पाकिस्तान की टीम के साथ हैं और अहम फ़ैसलों में उनका दख़ल है. जियो टीवी की रिपोर्ट के अनुसार सरफ़राज़ और मिकी ऑर्थर में वैसी दंबगई नहीं है कि इंज़माम को नियंत्रण में रख पाएं.

पाकिस्तानी मीडिया में कहा जा रहा है कि इंज़माम-उल-हक़ 2006-07 में जब पाकिस्तान की टीम के कप्तान थे, कुछ वैसी ही स्थिति आज है. पाकिस्तानी अख़बार द न्यूज़ से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के एक पूर्व अधिकारी ने कहा है कि जब वो कप्तान थे तब न केवल पूरी टीम पर उनका नियंत्रण था बल्कि हर फ़ैसले भी उनके मन मुताबिक़ होते थे.

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पाकिस्तानी मीडिया में कहा जा रहा है कि वर्ल्ड कप के लिए पाकिस्तान के प्लेइंग इलेवन में जिन लोगों को शामिल किया है उससे लोग नाख़ुश हैं. इस टीम में इंज़माम-उल-हक़ के भतीजे इमाम-उल-हक़ भी शामिल हैं जो भारत के ख़िलाफ़ वो बुरी तरह से फ्लॉप रहे.

भारत से 89 रनों की हार के बाद उस अधिकारी ने द न्यूज़ कहा, ''इंज़माम दबंग किस्म के आदमी हैं. वो निरंकुश हैं और पसंद नापंसद को लेकर अड़ जाते हैं. जब शहरयार ख़ान बोर्ड के चेयरमैन थे, तब पीसीबी में इंज़माम की ही चलता था. ऐसा लग रहा है कि इतिहास एक बार फिर से ख़ुद को दोहरा रहा है.''

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Image caption इमाम-उल-हक़

इंज़माम की कप्तानी में पाकिस्तान को टेस्ट मैच के इतिहास में सबसे बड़ी सज़ा भुगतनी पड़ी थी. यह मैच ओवल में 2006 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ था. इस मैच में गेंद के साथ छेड़छाड़ करने में पाकिस्तान की टीम को दोषी माना गया तो इंज़माम ने मैच खेलने से ही इनकार कर दिया था.

2007 में इंज़माम की कप्तानी में ही पाकिस्तान ने वर्ल्ड कप खेला था लेकिन बुरी तरह से शुरुआती दौर में ही उसके अभियान ने दम तोड़ दिया.

भारत से हार के बाद इस तरह की ख़बरें भी सुनाई देने लगीं है पाकिस्तानी टीम में ही कई गुट बन गए हैं और कप्तान सरफ़राज़ बिल्कुल अलग-थलग पड़ गए हैं. हालांकि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इसे महज़ अफ़वाह बताया है और कहा है कि पूरी सरफ़राज़ के साथ खड़ी है.

इंज़माम को इमरान ने टीम में दी थी जगह

इंज़माम-उल-हक़ को 90 के दशक में पाकिस्तानी टीम के तत्कालीन कप्तान इमरान ख़ान ने टीम में शामिल किया था. 22 साल की उम्र में इंज़माम-उल-हक़ तब चर्चा में आए जब उन्होंने 1992 के विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ खेला.

इंज़माम ने न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ 37 गेंद पर 60 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली थी और पाकिस्तान फ़ाइनल में पहुंच गया था. उसके बाद इंज़माम की टीम में जगह पक्की हो गई वो कप्तान तक बने. इंज़माम ने कुल 378 वनडे करियर में 11739 रन बनाए हैं.

भारत से हार के बाद पाकिस्तान के सेमीफ़ाइनल में पहुंचने की राह काफ़ी मुश्किल हो गई है. वर्ल्ड कप 2019 में पाकिस्तान की यह लगातार दूसरी हार थी और वह कुल तीन मैच हार चुका है. पाकिस्तान को अगर सेमीफ़ाइनल में पहुंचना है तो बाक़ी के सभी चार मैच जीतने होंगे.

इन जीतों के बाद पाकिस्तान के 11 अंक होंगे. मुश्किल यह है कि पाकिस्तान का नेट रन रेट यानी एनआरआर बहुत ख़राब है. ऐसे में सेमीफ़ाइल में चार टीमों में एक होने के लिए उस हिसाब से कुल अंक होने चाहिए. पाकिस्तान को सेमीफ़ाइनल में पहुंचना है तो न्यूज़ीलैंड, दक्षिण अफ़्रीका और बांग्लादेश को हारना होगा. इसके साथ ही वेस्टइंडीज़ को भी अपने दो मैचों में हारना होगा. कुल मिलाकर बात यह है कि सेमीफ़ाइनल में पहुँचना अब पाकिस्तान के हाथ में नहीं है बल्कि दूसरे टीमों की हार जीत पर है.

पाकिस्तान के लिए बाक़ी के चार मैच जीतना आसान नहीं है. पाकिस्तान का अगला मैच 23 जून को दक्षिण अफ़्रीका से है. हालांकि दक्षिण अफ़्रीका इस बार कमज़ोर टीम दिख रही है. दक्षिण अफ़्रीका इंग्लैंड, बांग्लादेश और भारत से हार चुका है.

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पाकिस्तान बर्मिंघम में 26 जून को न्यूज़ीलैंड के साथ खेलेगा. पाकिस्तान के लिए यह सबसे मुश्किल मुक़ाबला है. न्यूज़ीलैंड ने अब तक सारे मैच जीते हैं बस भारत से मैच बारिश के कारण नहीं हो पाया था. पाकिस्तान को न्यूज़ीलैंड को हराने के लिए बेहतरीन खेलना होगा.

पाकिस्तान के बाक़ी दो मैच लीड्स में अफ़ग़ानिस्तान से और लॉर्ड्स में बांग्लादेश से है. अफ़ग़ानिस्तान को पाकिस्तान हरा सकता है लेकिन पाकिस्तान वॉर्मअप मैच में अफ़ग़ानिस्तान से हार चुका है. पाकिस्तान का आख़िरी मैच बांग्लादेश से है.

बांग्लादेश की टीम भी बढ़िया खेल रही है और उसने 17 जून को वेस्टइंडीज़ को 322 रन चेज़ करके हराया है. इसलिए पाकिस्तान के लिए बांग्लादेश को हराना भी आसान नहीं होगा.

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