लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान, जहां भारत ने जीता था पहला वर्ल्ड कप

  • 25 जून 2019
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लंदन का लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान. यानी क्रिकेट का मक्का. यही वो मैदान है जहां भारत ने 36 साल पहले 1983 में 25 जून को पहली बार क्रिकेट वर्ल्ड कप जीता था.

कपिल देव के हाथ में लॉर्ड्स पर वर्ल्ड कप ट्रॉफ़ी - ये तस्वीर भारत के इतिहास में सबसे यादगार तस्वीरों में से होगी.

विजेता टीम का हिस्सा रहे क्रिकेटर मदन लाल की वो लाइन हमेशा याद आती है जो उन्होंने मुझसे एक बार इंटरव्यू में कही थी, "आख़िरी विकेट लेने के बाद हम ख़ुशी के मारे ऐसे भागे थे मानो कोई हमारी जान के पीछे पड़ा हो."

सारे नियम क़ायदों को तोड़ते पिच पर भागते भारतीय दर्शकों वाली वो मशहूर तस्वीर देखकर अंदाज़ा ही लगाया जा सकता है कि क्रिकेट प्रेमी किस उन्माद से भर उठे होंगे.

उस वक़्त क्रिकेट के बेताज बादशाह रहे वेस्टइंडीज़ के सामने भारत 183 पर ढेर हो गया था. लेकिन अंडरडॉग मानी जाने वाली भारतीय टीम ने सबसे बड़ा उल्टफेर कर वर्ल्ड कप 43 रनों से जीत लिया था और मोहिंदर अमरनाथ तीन विकेट लेकर बने थे मैन ऑफ़ द मैच.

भारतीय टीम के जीत के समय पत्रकार मार्क टली भारत में ही थे और तुरंत पुरानी दिल्ली गए थे. मार्क टली ने मुझे बताया था कि वे दौड़ भागकर जब पुरानी दिल्ली पहुँचे तो इतने लोग जश्न मनाने गलियों में निकल आए थे कि पैर रखने तक की जगह नहीं थी.

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इंग्लैंड में पहली भारतीय टीम की तस्वीर

वैसे भारत के पहले वर्ल्ड कप के अलावा लॉर्ड्स कई मायनों में भारतीय क्रिकेट फ़ैन्स के लिए ख़ास है. लॉर्ड्स म्यूज़िम में बहुत सी बेशक़ीमती चीज़ें रखी हैं जिन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं.

इंग्लैंड में किसी भी भारतीय दल का पहला क्रिकेट दौरा 1886 की यहां रखी तस्वीर और पोस्टर में क़ैद है जब पारसियों का एक दल भारत से इंग्लैंड आया था.

भारतीय क्रिकेट के सुपरहीरो सीके नायडू का साइन किया हुआ बल्ला यहां दर्शकों के लिए रखा गया है. सीके नायडू भारत की उस पहली टेस्ट टीम के पहले कप्तान थे जो 1932 में लॉर्ड्स पर खेली थी.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायर होने के बाद भी वो 60 साल की उम्र में रणजी खेल रहे थे और आख़िरी चैरिटी मैच 69 की उम्र में खेला.

तेंदुलकर की साइन की हुई टी-शर्ट

1946 में भारत के इंग्लैंड दौरे का गवाह रहा पोस्टर हो, शेन वॉर्न के 300वीं विकेट की यादगार, तेंदुलकर की साइन की हुई ख़ास टीशर्ट, या द्रविड़ का साइन किया हुआ बल्ला. क्रिकेट के इतिहास का गवाह रहीं तमाम निशानियाँ लॉर्ड्स म्यूज़ियम में मौजूद हैं.

रविवार को लॉर्ड्स पर मैच देखने आने वालों में शायद कोई दर्शक ऐसा भी हो जिसने 1983 की ऐतिहासिक जीत देखी होगी.

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1983 की जीत मैंने भले न देखी हो लेकिन लॉर्ड्स में मुझे उस पल का गवाह बनने का मौका ज़रूर मिला था जब 1983 की पूरी की टीम जीत की 25वीं सालगिरह पर 2008 में लॉर्ड्स में इक्ट्ठा हुई थी.

हू ब हू वैसा ही दृश्य लॉर्ड्स पर दोबारा. बालकनी में शैंपेन की बोतल खोली गई थी, 1983 में लॉर्ड्स की जीत को महसूस करने का इससे बढ़िया दिन नहीं हो सकता था मेरे जैसे फ़ैन्स के लिए.

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वैसे इस बार क्रिकेट वर्ल्ड कप का फ़ाइनल लॉर्ड्स पर ही होना है.

1983 में तो इंग्लैंड में सट्टा लगाने वाली मशहूर कंपनी लैडब्रोक्स ने भारत को ज़िम्बॉब्वे से बस थोड़ी ही ऊपर जगह दी थी. लेकिन 2019 में हालात ऐसे नहीं हैं.

भारतीय क्रिकेट फ़ैन्स को उम्मीद होगी कि 1983 और 2011 की मधुर यादों में एक और याद और एक ट्रॉफ़ी शायद फिर जुड़ जाए.

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