क्रिकेट विश्वकप 2019: भारत के अजेय रहने की ख़ुमारी इंग्लैंड ने उतारी

  • 1 जुलाई 2019
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''हर टीम यहां पर हारी है हालांकि कोई हारना नहीं चाहता, लेकिन यह भी स्वीकार करना होगा कि विरोधी टीम अपने दिन पर शानदार खेली. इस हार से सीखने को मिलेगा और हम आगे की तरफ देख रहे हैं.''

यह कहना है भारत के कप्तान विराट कोहली का जो रविवार को विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट में मेज़बान इंग्लैंड के हाथों 31 रन से मिली हार से परेशान दिखे.

सबसे बड़ी बात इस हार से भारतीय टीम का विश्व कप में चला आ रहा अजेय टीम का अभियान भी टूट गया.

इंग्लैंड ने ज़ोरदार अंदाज़ में खेल दिखाते हुए टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए निर्धारित 50 ओवर में सात विकेट खोकर 337 रन बनाए. उसके बाद उनके गेंदबाज़ों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय बल्लेबाज़ों को पांच विकेट पर 306 रन पर रोका.

अब भला जो टीम कुछ दिन पहले ही आईसीसी एकदिवसीय रैंकिंग में इंग्लैंड को ही पीछे छोड़कर नम्बर एक बनी थीं, उसके लिए तो यह दोहरा झटका है.

इस हार के बाद सवाल उठ रहे है कि आखिर भारत को क्या हुआ. क्या भारत इतने बड़े स्कोर का पीछा नहीं कर सकता.

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बाद में ख़ुद विराट कोहली ने माना कि एक तो सपाट पिच और उसके बाद छोटी बाउंड्री ने उन्हें पहली बार ऐसा अनुभव कराया.

विराट ने यह भी माना कि एक समय भारत भी अच्छी बल्लेबाज़ी कर रहा था और उनके स्कोर के नज़दीक पहुंचा लेकिन गेंदबाज़ों ने शानदार गेंदबाज़ी की.

दूसरी तरफ क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली मानते है कि रैंकिंग तो बदलती रहेगी लेकिन यह हार भारत के लिए बहुत मायने रखती है.

इंग्लैंड से हारने के बाद भारत पर दबाव तो बन ही गया है. ऐसे में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ होने वाला मैच बेहद महत्वपूर्ण हो गया है. मान लीजिए कहीं अगर भारत बांग्लादेश से हार गया तो क्या होगा, क्योंकि बांग्लादेश बहुत अच्छा खेल रही है.

बांग्लादेश से हार के बाद श्रीलंका के ख़िलाफ़ होने वाला आखिरी मैच तो भारत के लिए करो या मरो जैसा हो जाएगा.

श्रीलंका एक ऐसी टीम है जो ख़ुद तो डूब गई है लेकिन कहीं जीतकर भारत को भी ना डूबा दे. अगर भारत जीत जाता तो पूरे हालात ही बदल जाते लेकिन भारत पर जीत से इंग्लैंड ने एक बार फिर अपने आप को मज़बूत दावेदार के रूप में पेश कर दिया है.

भारतीय गेंदबाज़ों को क्या हुआ

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Image caption जेसन रॉय और बेयरस्टो

अब सवाल यह भी उठता है कि पूरे विश्व कप में शानदार गेंदबाज़ी करते आ रहे भारतीय गेंदबाज़ों को क्या हुआ.

इसके जवाब में विजय लोकपल्ली मानते है कि इंग्लैंड के जेसन रॉय और बेयरस्टो ने जिस अंदाज़ में ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी की, तब एक समय तो ऐसा लगा जैसे इंग्लैंड 400 रन भी पार कर जाएगा.

उनके बीच 160 रन की पहले विकेट की साझेदारी ने पूरे मैच का रुख ही बदल दिया.

विजय लोकपल्ली आगे कहते हैं, ''यह सही है कि पिच बल्लेबाज़ी के अनुकूल थी लेकिन उन्होंने अच्छी गेंदबाज़ी के ख़िलाफ़ रन बनाए. इसका पूरा श्रेय जॉनी बेयरस्टो को जाता है. उन्होंने बेहतरीन अंदाज़ में शतक बनाया. जेसन रॉय फॉर्म में हैं, मोर्गन का विकेट जल्दी मिला तो बेन स्टोक्स के सामने फंस गए.''

''इंग्लैंड के गेंदबाज़ों को थोड़ा सुधार करना होगा लेकिन विकेट से मदद मिलते ही वह खतरनाक हो जाते हैं. कुछ भी हो, इंग्लैंड ने अपनी गज़ब की बल्लेबाज़ी के दम पर मैच जीता.''

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भारतीय गेंदबाज़ी के लिए क्या दिन ही ख़राब था, इसके जवाब में विजय लोकपल्ली मानते हैं कि जब-जब विकेट से मदद नहीं मिलेगी, तब-तब युज़्वेंद्र चहल और कुलदीप यादव को मुश्किल होगी और संघर्ष करेंगे. भारत के पास एक ही भरोसेमंद गेंदबाज़ है और वह है जसप्रीत बुमराह. वह किसी भी विकेट पर अच्छी गेंद कर सकते हैं.

मोहम्मद शमी भी बेहतर गेंदबाज़ हैं. वह भी अपने आलोचकों को बता रहे है कि बार-बार उन्हें टीम से बाहर कर उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया गया.

इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पांच विकेट और वह भी विश्व कप में, इससे बढ़कर वह क्या कर सकते हैं. चहल और यादव जहां अच्छे बल्लेबाज़ सामने हों और पिच से मदद ना हो तो बहुत कमज़ोर नज़र आते हैं. हार्दिक पांड्या भी महंगे साबित हुए और यह भी पता चला कि वह गेंदबाज़ी में विकल्प नहीं हैं. यह भी समझ से बाहर है कि केदार जाधव से क्यों गेंदबाज़ी नहीं कराई गई.

जब-जब सपाट विकेट मिलेंगे, भारतीय गेंदबाज़ साधारण साबित होंगे, उन्हें अपने बचाव के लिए बल्लेबाज़ों के बड़े रन के सहयोग की ज़रूरत पड़ेगी.

भारतीय बल्लेबाज़ों को क्या हुआ

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विजय लोकपल्ली मानते हैं कि विराट कोहली और रोहित शर्मा के बीच जो साझेदारी हुई, वह थोड़ी तेज़ होनी चाहिए थी. अगर इनमें से कोई एक विकेट पर टिक जाता तो नज़दीकी मामला हो सकता था.

यह सोचना कि ऋषभ पंत या हार्दिक पांड्या हर मैच में मध्यम क्रम में तेज़-तर्रार बल्लेबाज़ी कर मैच पलट देंगे, ऐसा नहीं होगा. यहां तक कि एक स्थिति में उन्हें पता भी चल गया था कि रन बनाना मुश्किल हो रहा है.

इसके अलावा बाद में विकेट भी थोड़ा धीमा हो गया था. सबसे बड़ी बात थोड़ा श्रेय इंग्लैंड के गेंदबाज़ों को भी दें. हालांकि, मार्क वुड ने बेहद निराश किया और 73 रन दिए.

जोफ्रा आर्चर और क्रिस वोक्स ने शानदार गेंदबाज़ी की. प्लंकेट ने भी तीन विकेट निकाले.

कुल मिलाकर इंग्लैंड हर हाल में जीत का हक़दार था. पहले उन्होंने शानदार बल्लेबाज़ी की और उसके बाद उनके गेंदबाज़ों ने भारतीय बल्लेबाज़ों को तेज़ी से रन बनाने का मौक़ा नहीं दिया.

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