अंबाती रायुडू के साथ क्या ज़्यादती हुई है?

  • 3 जुलाई 2019
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'अंबाती रायुडू को मैंने हमेशा एक ऐसा बल्लेबाज़ माना जो तेज़ गेंदबाज़ों और स्पिनरों दोनों को बहुत अच्छे से खेल सकता है.'

आईपीएल-2018 में चेन्नई सुपरकिंग्स के लिए अंबाती रायुडू की बल्लेबाज़ी की प्रशंसा में यह बात अपने 'क्रिकेट जजमेंट' के लिए मशहूर महेंद्र सिंह धोनी ने कही थी.

चार महीने पहले तक रायुडू टीम इंडिया में नंबर चार पर अच्छी बल्लेबाज़ी कर रहे थे. अचानक उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है. वह भी, महज़ 33 साल की उम्र में.

दो दिन पहले जब चयनकर्ताओं ने चोटिल विजय शंकर की जगह मयंक अग्रवाल को इंग्लैंड बुलाने का फ़ैसला लिया तो सोशल मीडिया पर अंबाती रायुडू की ट्रोलिंग शुरू हो गई थी.

फिर एक और अजीबोग़रीब ट्वीट में आइसलैंड क्रिकेट के ट्विटर अकाउंट से रायुडू को अपने देश में स्थायी नागरिकता का प्रस्ताव दिया ताकि वे 'अपना थ्रीडी चश्मा' और भारत छोड़कर आइसलैंड में बस जाएं और वहां क्रिकेट खेलें.

ये स्थितियां किसी भी ऐसे बल्लेबाज़ के लिए सुखद नहीं थीं जिसका विश्व कप में खेलने का सपना चंद दिनों पहले पूरा होने की दहलीज़ पर था.

आख़िरी ट्वीट में उन्होंने टीम से बाहर किए जाने पर 'थ्रीडी चश्मे' वाला बहुचर्चित तंज़ किया था. लेकिन संन्यास के ऐलान पर उन्होंने अब तक कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है और इसका एक अर्थ यह भी समझा जा सकता है कि उनके लिए बात अब तंज़ो-लतीफ़ से आगे निकल गई है.

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समाचार वेबसाइटों पर हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन को लिखी गई उनकी चिट्ठी के जो अंश प्रकाशित किए गए हैं, उसमें भी रायुडू ने किसी नाराज़गी का इज़हार नहीं किया है. संन्यास का कोई विशेष कारण नहीं बताया है और सबको शुक्रिया कहा है.

लेकिन उनका अनकहा दर्द समझा जा सकता है. क्रिकेट जगत की वे हस्तियां जो पहले नहीं बोलीं, अब बोल रही हैं.

पूर्व भारतीय बल्लेबाज़ वीरेंद्र सहवाग ने ट्विटर पर लिखा है कि विश्व कप में अनदेखा किया जाना अंबाती रायुडू के लिए निश्चित रूप से दर्दनाक रहा होगा.

ऐसे स्वर कई जगहों से उठे हैं कि अच्छे प्रदर्शन के बावजूद चयनकर्ताओं ने रायुडू की अनदेखी की और अनुभवहीन बल्लेबाज़ों को मौक़े दिए.

पूर्व बल्लेबाज़ गौतम गंभीर ने बहुत तीखे शब्दों में चयनकर्ताओं की आलोचना की है. उन्होंने कहा, "मेरे हिसाब से इस विश्व कप में चयनकर्ताओं ने पूरी तरह निराश किया. उनकी वजह से ही रायुडू ने संन्यास लिया और उनके फ़ैसले लेने की क्षमता को ही इसका दोष दिया जाना चाहिए."

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स्टैंड-बाय में भी अनदेखी

अंबाती रायडू विश्व कप के लिए 'स्टैंड बाय' रखे गए तीन खिलाड़ियों में शामिल थे. किसी खिलाड़ी के चोटिल होने की स्थिति में स्टैंड-बाय खिलाड़ी को मौक़ा दिया जाता है.

इस विश्व कप में भारत के दो खिलाड़ी चोटिल हुए लेकिन दोनों बार रायुडू को निराशा हाथ लगी.

पहले शिखर धवन की जगह ऋषभ पंत और फिर विजय शंकर की जगह मयंक अग्रवाल को इंग्लैंड बुला लिया गया और रायुडू के लिए उम्मीद की आख़िरी खिड़की भी बंद हो गई.

जबकि वह विजय शंकर, ऋषभ पंत और मयंक अग्रवाल तीनों से ज़्यादा अनुभवी क्रिकेटर हैं.

रायुडू ने 55 अंतरराष्ट्रीय वनडे मैचों में 1694 रन बनाए. उनका औसत 47.05 और स्ट्राइक रेट 79 का रहा. विजय शंकर और ऋषभ पंत का औसत क्रमश: 31.85 और 28.8 का है. मयंक अग्रवाल को अभी किसी भी अंतरराष्ट्रीय वनडे मैच में पहली बार बल्ला पकड़ना है.

रायुडू ने अपने वनडे करियर में 10 अर्धशतक और तीन शतक लगाए हैं और उनका उच्चतम स्कोर 124 रन है. पिछले साल अक्टूबर में जब उन्होंने शतक लगाया तो बीते डेढ़ साल में किसी भारतीय बल्लेबाज़ का यह पहला ऐसा शतक था जो टॉप थ्री बल्लेबाज़ों के अलावा किसी ने जमाया था.

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चार नंबर पर प्रदर्शन

रायुडू ने पिछले सितंबर में एशिया कप से टीम में वापसी की थी और तब से अप्रैल तक वो टीम के चौथे सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी थे. सितंबर 2018 से 2019 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सिरीज़ तक भारत ने 24 मैच खेले, जिसमें रायुडू 21 बार बल्लेबाज़ी करने उतरे. इन 21 मैचों में उन्होंने एक शतक और चार अर्धशतक जमाए.

अक्टूबर 2018 में जब उन्होंने वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ शतक जड़ा तो उनकी प्रशंसा में मैच के दूसरे शतकवीर और भारतीय टीम के उपकप्तान रोहित शर्मा ने कहा, "उम्मीद है कि उन्होंने चार नंबर की सारी गुत्थियों को हल कर दिया है. मुझे लगता है कि विश्व कप तक नंबर चार को लेकर कोई सवाल नहीं होंगे. उन्हें जो भी मौक़े मिले हैं उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है. एशिया कप के बाद से उन्होंने दोनों हाथों से अवसर भुनाए हैं."

न्यूज़ीलैंड दौरे पर रायुडू भारत के सफलतम बल्लेबाज़ थे. पांच पारियों में 63.33 की औसत से उन्होंने 190 रन बनाए थे.

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सिर्फ़ नंबर चार पर बल्लेबाज़ी की बात करें तो उन्होंने सितंबर 2018 से विश्व कप से पहले तक 14 बार चार नंबर पर बल्लेबाज़ी की, जिसमें 42.18 के औसत से 464 रन बनाए.

वो जैसा प्रदर्शन कर रहे थे, कहा जा रहा था कि उन्होंने टीम इंडिया के लिए नंबर चार का सूखा ख़त्म कर दिया है. कहा गया कि वह अति-आक्रामक नहीं हैं और चार नंबर पर टीम को ज़रूरी संतुलन और अनुभव मुहैया करा सकते हैं. खेल पत्रकारों ने लिखा कि उनमें भले ही 'एक्स फ़ैक्टर' न हो लेकिन वो अपना काम करना जानते हैं.

लेकिन जनवरी में कप्तान विराट कोहली ने कहा कि वह नंबर चार को 'और मज़बूत' करना चाहते हैं. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ घरेलू सिरीज़ के कुछ मैचों में रायुडू को बाहर बैठा दिया गया.

और विकल्प के तौर पर हरफ़नमौला विजय शंकर को लाया गया. जिन्होंने विश्व कप में बल्ले से निराश किया और फिर चोट के चलते बाहर हो गए.

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चयनकर्ताओं की महत्वाकांक्षा?

कई क्रिकेट एक्सपर्ट मानते हैं कि चयनकर्ताओं के पास रायुडू को ड्रॉप किए जाने की ठोस वजह नहीं थी और किसी नौजवान में उनका विकल्प तलाशने की कोशिश एक महत्वाकांक्षी और जोखिम भरा फ़ैसला था.

अप्रैल में ही जब भारतीय टीम के मुख्य चयनकर्ता एमसके प्रसाद से रायडू को विश्व कप में न चुने जाने पर पूछा गया था तो उनका जवाब था, "रायुडू के ख़िलाफ़ कुछ नहीं गया. बस बात ये है कि विजय शंकर के पक्ष में कुछ चीज़ें गईं क्योंकि वो फील्डिंग और गेंदबाज़ी से अपनी भूमिका को बहुआयामी (कई डायमेंशन वाला) बनाते हैं."

इसी पर तंज़ करते हुए रायुडू ने ट्वीट किया था कि विश्व कप देखने के लिए उन्होंने थ्रीडी चश्मा ऑर्डर किया है.

रायडू के संन्यास के फ़ैसले से गौतम गंभीर काफ़ी नाराज़ हैं. उन्होंने यहां तक कहा, "पांचों चयनकर्ताओं ने मिलकर उतने रन नहीं बनाए होंगे जितने रायुडू ने बनाए हैं. उनके संन्यास को लेकर मैं बहुत निराश हूं. विश्व कप में खिलाड़ियों के चोटिल होने के बाद ऋषभ पंत और मयंक अग्रवाल को चुन लिया गया. रायुडू की जगह कोई भी होता तो उसे बुरा लगता."

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गंभीर ने इसे भारतीय क्रिकेट के लिए "दुख का क्षण" बताया है. क्रिकेट एक्सपर्ट हर्षा भोगले ने भी इसे एक भावुक क्षण बताया है.

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "अंबाती रायुडू के लिए बुरा लग रहा है. उन्होंने अपना सब कुछ दिया लेकिन कुछ न कुछ ग़लत होता रहा. उम्मीद है कि वो घरेलू क्रिकेट में सफ़ेद गेंद से खेलना जारी रखेंगे और आईपीएल में हम उनका खुला खेल देख सकेंगे. यह एक भावुक क्षण है लेकिन बेहतर कल ज़रूर होगा."

अंबाती के लिए यह निश्चित तौर पर एक भावुक क्षण है. इसीलिए उन्होंने संन्यास के ऐलान के लिए विश्व कप ख़त्म होने का भी इंतज़ार नहीं किया. स्टैंड-बाय में बने रहने से बेहतर उन्होंने क्रिकेट को बाय-बाय कहना समझा.

रायुडू अगर यह विश्व कप खेल रहे होते तो बहुत संभव है कि आख़िरी विश्वकप होता. उन्होंने शायद सबसे लंबे और उतार-चढ़ाव भरे सफ़र के बाद भारतीय टीम में ख़ुद को स्थापित किया था.

पिछले साल अक्टूबर में वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ शतक लगाने के बाद चार नंबर पर बल्लेबाज़ी के सवाल पर रायुडू ने कहा था, "मुझे नहीं लगता कि यह मेरे लिए नया है. मैंने इस पोज़ीशन पर काफ़ी बल्लेबाज़ी की है और मुझसे कुछ भी नया करने को नहीं कहा गया है. उन्होंने कहा है कि बस जाओ और अपना खेल खेलो."

उम्मीद यही है कि अंडर-19 क्रिकेट से चमका यह जुझारू बल्लेबाज़ ताउम्र विश्व कप से ख़ारिज़ किए गए खिलाड़ी के रूप में न याद रखा जाए.

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