टीम इंडिया के नेतृत्व में बदलाव की कितनी ज़रूरत

  • 18 जुलाई 2019
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वर्ल्ड कप 2019 के सेमीफ़ाइनल में भारत हार गया. हर हार की समीक्षा होती है और उस समीक्षा के बाद कुछ कड़े फ़ैसले लिए जाते हैं.

क्या भारतीय क्रिकेट को भी आने वाले समय में कुछ सख़्त बदलावों का सामना करना पड़ सकता है? भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं लेकिन यह सवाल इस वक़्त सोशल मीडिया और गली-नुक्कड़ों पर चर्चा का विषय बना हुआ है.

क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 में भारतीय बल्लेबाज़ 240 रनों का लक्ष्य हासिल नहीं कर सके और हार कर टूर्नामेंट से बाहर हो गये.

तो क्या आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट टीम के नेतृत्व में बदलाव के आसार हैं?

वरिष्ठ खेल पत्रकार प्रदीप मैगज़ीन मानते हैं कि कप्तान के संबंध में बदलाव की ज़रूरत और आसार नहीं है लेकिन कोच बदलने पर विचार ज़रूर किया जा सकता है.

वह कहते हैं, "विराट कोहली की अगुवाई में भारतीय टीम नियंत्रण में है. यह दुनिया का बेहतरीन बल्लेबाज़ी क्रम है. टीम सही दिशा में बढ़ रही है और कप्तान बदलने का कोई कारण नहीं है. लेकिन कोच के संबंध में कुछ बातें ज़रूर हैं. यह इस पर निर्भर करता है कि ख़ुद रवि शास्त्री कोच बने रहना चाहते हैं या नहीं और बोर्ड क्या सोचता है और कप्तान कोहली क्या सोचते हैं."

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रोहित को मिले अच्छे प्रदर्शन का ईनाम?

हालांकि सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इच्छा जताई है कि उपकप्तान रोहित शर्मा को वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन का ईनाम मिलना चाहिए और उन्हें वनडे और टी-20 मैचों की कप्तानी सौंप दी जानी चाहिए, भले ही टेस्ट की कप्तानी कोहली के पास ही रखी जानी चाहिए.

प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं, "रोहित शर्मा में एक कप्तान की कुशाग्रता ज़रूर है. वह समझदार हैं और बतौर कप्तान उनका रिकॉर्ड भी अच्छा है. लेकिन जिन देशों की टीमों में टेस्ट और वनडे में अलग कप्तान हैं, उनमें से कई मामलों में टेस्ट कप्तान वनडे मैच नहीं खेलता है. लेकिन यहां अगर विराट टेस्ट में कप्तान होंगे और वनडे में किसी और की कप्तानी में खेलेंगे तो यह खेल के लिए ठीक नहीं होगा. भारतीय सेटअप में यह प्रयोग नहीं चलेगा."

हालांकि अतीत में ऐसा रहा है जब अनिल कुम्बले टेस्ट कप्तान थे और महेंद्र सिंह धोनी वनडे की कमान संभाल रहे थे. उसके बाद धोनी टेस्ट कप्तान रहे और वनडे कप्तानी विराट कोहली को सौंप दी गई.

बतौर कप्तान रिकॉर्ड देखें तो 70 से ज़्यादा मैचों में कप्तानी करने वालों में विराट कोहली की सफलता दर सबसे ज़्यादा है. उन्होंने 77 मैचों में से 56 मैच जीते हैं. उनकी कप्तानी में भारत 74.34 फ़ीसदी की दर से मैच जीत रहा है जो महेंद्र सिंह धोनी और अज़हरुद्दीन से कहीं ज़्यादा है.

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लेकिन क्या कोहली से कोई चूक हुई?

लेकिन बतौर कप्तान रोहित शर्मा का प्रदर्शन भी शानदार रहा है. विराट को आराम दिए जाने पर रोहित शर्मा ने जिन 10 वनडे मैचों में कप्तानी की उनमें से 8 मैच भारत जीता है. 2018 में उनकी कप्तानी में भारत एशिया कप और बांग्लादेश के ख़िलाफ़ निधास ट्रॉफ़ी जीत चुका है.

आईपीएल में रोहित शर्मा मुंबई इंडियंस की कप्तानी करते हैं जो सबसे ज़्यादा चार बार आईपीएल विजेता बन चुकी है. रोहित ने कई बार ज़िम्मेदारी को गंभीरता से स्वीकार किया है और अपनी इंद्रियों पर भरोसा रखते हुए समझदार फ़ैसले किए हैं.

आईपीएल में उन्होंने काफ़ी स्मार्ट कप्तानी मूव्स दिखाए हैं, चाहे वह एबी डिविलियर्स के ख़िलाफ़ क्रुणाल पंड्या का इस्तेमाल हो या फिर हार्दिक पंड्या को बीच के ओवरों में पूरे ओवर कराना ताकि बल्लेबाज़ों को तेज़ी से रन बनाने का लालच दिया जा सके.

हालांकि प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं कि इस वर्ल्ड कप में हार की वजह विराट कोहली की ख़राब कप्तानी नहीं है कि उन्हें सज़ा दी जाए.

वह कहते हैं, "रणनीति के लिहाज़ से आप कह सकते हैं कि सेमीफ़ाइनल में धोनी को देर से भेजना एक ग़लती थी और ऋषभ और हार्दिक को उनके बाद भेजना चाहिए था. लेकिन उस पर सबकी अपनी-अपनी व्याख्याएं हैं. कप्तानी के स्तर पर उनकी एक चूक यही है कि वह समय रहते अपने मध्यक्रम को मज़बूत नहीं कर सके. पर इसकी ज़िम्मेदारी सबकी है और यह कोई ऐसी चूक नहीं कि कप्तान को हटा दिया जाए."

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लेकिन कोच का क्या?

भारतीय टीम के मुख्य कोच समेत बाकी सपोर्ट स्टाफ़ का कार्यकाल ख़त्म हो रहा है और बीसीसीआई ने नए आवेदन मंगाए हैं. आवेदन की आख़िरी तारीख़ 30 जुलाई है.

अभी रवि शास्त्री मुख्य कोच हैं जबकि बल्लेबाज़ी कोच संजय बांगर, गेंदबाज़ी कोच भरत अरुण और फील्डिंग कोच आर श्रीधर हैं. अभी सपोर्ट स्टाफ़ को 45 दिनों का एक्सटेंशन दिया गया है ताकि वे 3 अगस्त से शुरू हो रहे वेस्टइंडीज़ दौरे तक बने रहें.

लेकिन वेस्टइंडीज़ दौरे के बाद भारतीय टीम के सपोर्ट स्टाफ़ में कुछ बदलाव हो सकते हैं.

प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं, "मौजूदा हालात में कप्तान विराट कोहली को हटाने का कोई कारण नहीं है. चूंकि किसी पर तो गाज़ गिरनी है, इसलिए लोग कहेंगे कि कोच को हटाना चाहिए और टीम के मार्गदर्शन के लिए एक ताज़े दिमाग वाले आदमी की ज़रूरत है."

"लेकिन मेरा मानना है कि बोर्ड को विराट कोहली की राय का सम्मान करना होगा. अगर कोहली रवि शास्त्री को हटाने के पक्ष में नहीं है तो बोर्ड के लिए चाहकर भी उन्हें हटाना आसान नहीं होगा."

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टीम संयोजन में बदलाव?

भारतीय टीम इस वर्ल्ड कप में मध्यक्रम में बल्लेबाज़ी की अस्थिरता से जूझती रही. ख़ास तौर से नंबर चार को लेकर सबसे ज़्यादा शिकायती स्वर रहे.

प्रदीप मैगज़ीन मानते हैं कि कोहली और शास्त्री की सबसे बड़ी चूक यही रही कि वे नंबर चार का बल्लेबाज़ तैयार नहीं कर पाए.

वह कहते हैं, "उन्होंने जिन बल्लेबाज़ों को नंबर चार के लिए चिह्नित किया, उन्हें पर्याप्त समय तक खेलने का मौक़ा नहीं दिया और यह भारत की हार का एक अहम कारण रहा. वहां बदलाव तो ज़रूर आएंगे."

वर्ल्ड कप में पहले विजय शंकर, फिर केएल राहुल और फिर ऋषभ पंत ने नंबर चार पर बल्लेबाज़ी की थी. प्रदीप मैगज़ीन ऋषभ पंत की टीम में जगह ज़रूर देखते हैं लेकिन नंबर चार पर नहीं.

वह कहते हैं, "महेंद्र सिंह धोनी अगर वर्ल्ड कप के तुरंत बाद भी संन्यास ले लें. यह भी हो सकता है कि उन्हें एक विदाई सिरीज़ मिल जाए और उसके बाद वह संन्यास लें. ऋषभ पंत उनके प्राकृतिक उत्तराधिकारी हैं और वो एक आक्रामक विकेटकीपर बल्लेबाज़ के तौर पर टीम में होंगे. नंबर चार की ज़िम्मेदारी किसी और को देनी होगी. और जिसे भी यह ज़िम्मेदारी दी जाए, उसे खेलने के लिए पर्याप्त समय भी दिया जाए."

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