रवि शास्त्री को वर्ल्ड कप में हार के बाद भी क्यों बनाया गया कोच

  • 17 अगस्त 2019
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जो बात पहले से ही तय थी, उसी पर शुक्रवार को मोहर लग गई. रवि शास्त्री ही टीम इंडिया के कोच बने रहेंगे. इसमें चौंकाने वाला कुछ भी नहीं.

दरअसल, जिस तरह की स्थितियां थीं उसमें अगर रवि शास्त्री के अलावा किसी और को कोच बनाया जाता तो बात चौंकाने वाली होती. बीसीसीआई ने कोच के एलान के तय समय से क़रीब चालीस मिनट पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करके रवि शास्त्री के नाम की जानकारी दे दी.

इससे ये बात समझ आती है कि चयन समिति में किसी तरह का कोई मतभेद या भ्रम नहीं था. हर किसी की सहमति से 2021 में भारत में होने वाले वर्ल्ड टी-20 तक के लिए रवि शास्त्री का क़रार बढ़ा दिया गया है. उनके सपोर्ट स्टाफ़ के सदस्यों पर भी जल्दी ही फ़ैसला लिया जाएगा.

रवि शास्त्री के नाम को फ़ाइनल करने वाली कमेटी में कपिल देव, अंशुमान गायकवाड़ और शांता रंगास्वामी मौजूद थे.

इन तीनों सदस्यों ने ये जानकारी भी दी कि माइक हेसन और टॉम मूडी भी कोच की कुर्सी के तगड़े दावेदार थे. लेकिन अंत में हर किसी ने रवि शास्त्री के पक्ष में ही फ़ैसला किया.

इस रेस में लालचंद राजपूत और रॉबिन सिंह जैसे घरेलू नाम भी शामिल थे. लेकिन भारतीय क्रिकेट इस वक्त जिस दिशा में बढ़ रहा है उसमें इन दोनों में से किसी को भी मौक़ा मिलने की उम्मीद ना के बराबर थी.

ये अलग बात है कि रॉबिन सिंह की कोचिंग में मुंबई इंडियंस ने आईपीएल में शानदार प्रदर्शन किया है और लालचंद राजपूत 2007 में वर्ल्ड टी-20 जीतने वाली टीम के साथ जुड़े रहे हैं.

लेकिन इन सारी उपलब्धियों पर विराट कोहली की पसंद ज़्यादा मायने रखती है.

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रवि शास्त्री ही क्यों चुने गए?

इस सवाल का सबसे सीधा जवाब है- विराट कोहली. बतौर कोच रवि शास्त्री विराट कोहली की पहली पसंद थे. उन्होंने हाल ही में बाक़ायदा बयान दिया था कि उन्हें ख़ुशी होगी अगर रवि शास्त्री को ही कोच की ज़िम्मेदारी सौंपी जाती है.

इसके अलावा जब अनिल कुंबले के जाने के बाद रवि शास्त्री आए तब भी उसमें विराट कोहली का बड़ा रोल था. कुंबले जिस तरह से कोच की ज़िम्मेदारी छोड़ कर गए थे उसके बाद विराट कोहली ने काफी आलोचनाएं भी झेली थीं.

बावजूद इसके रवि शास्त्री ही उनकी पसंद बने रहे. अगर आपको आपत्ति इस बात से है कि अगर रवि शास्त्री को ही कोच बनाना था तो इतनी औपचारिकताएं क्यों की गईं?

इसका जवाब भी बहुत सीधा है, बीसीसीआई पर आए दिन पारदर्शिता नहीं रखने का आरोप लगता है. ये सारी औपचारिकताएं इसीलिए की गईं कि पारदर्शिता का सवाल ना उठे.

समझने वाली बात दूसरी है. कोच और कप्तान के तौर पर इस जोड़ी की 'अंडरस्टैंडिग' शानदार है. दोनों आक्रामक हैं. दोनों बिंदास हैं.

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याद कीजिए हाल ही में जब भारतीय टीम वेस्टइंडीज जा रही थी तो प्रेस कॉन्फ्रेंस में विराट कोहली से रोहित शर्मा के साथ उनके विवाद को लेकर सवाल किया गया. बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस में शास्त्री ने माइक अपनी तरफ मोड़ा और आक्रामक जवाब दिया, "खेल से बड़ा कोई नहीं. न मैं ना कोई और."

पिछले कुछ समय में रवि शास्त्री को चुने या ना चुने जाने को लेकर पूर्व क्रिकेटर्स ने भी अपनी राय रखी थी, जिसमें सौरव गांगुली की राय अहम है क्योंकि उन्होंने साफ़ तौर पर कहा था कि "विराट कोहली को अपनी पसंद बताने का पूरा अधिकार है."

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मोटे तौर पर देखा जाए तो इस फ़ैसले में कोई बुराई भी नहीं है. विराट कोहली और रवि शास्त्री एक दूसरे के साथ 'कंफ़र्टेबल' हैं. टीम ने हाल के दिनों में अच्छे नतीजे दिए हैं.

टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया दुनिया की नंबर एक टीम है. वनडे में वो दूसरे पायदान पर है. हालिया वेस्टइंडीज दौरे में टी-20 सीरीज में 3-0 से जीत दर्ज करके उसने टी-20 रैंकिग्स में भी सुधार किया है.

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ट्रेंड टूटा

इस फ़ैसले के साथ ही पिछले क़रीब दो दशक से चला आ रहा 'ट्रेंड' भी टूटा. पिछले क़रीब बीस साल से भारतीय टीम के कोच के भविष्य का फ़ैसला वर्ल्ड कप के नतीजे से तय होता था.

1999 में जब भारतीय टीम वर्ल्ड कप में हारी तो कुछ समय बाद कोच अंशुमान गायकवाड की छुट्टी हो गई. दिलचस्प बात ये है कि अब बीस साल बाद जब उन्होंने रवि शास्त्री के नाम पर सहमति दी होगी तो उनके जेहन में ये बात ज़रूर आई होगी कि शास्त्री भी तो वर्ल्ड कप में हारे ही हैं.

खैर, 2003 में भारतीय टीम दक्षिण अफ्रीका में खेले गए वर्ल्ड कप के फ़ाइनल तक पहुंची लेकिन इसके बाद भी कोच जॉन राइट का करार नहीं बढ़ा. फिर आए ग्रेग चैपल.

वेस्टइंडीज में खेले गए 2007 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम पहले ही दौर में टूर्नामेंट से बाहर हो गई. इसके बाद ग्रेग चैपल की छुट्टी हुई. ग्रेग चैपल के कार्यकाल में और भी तमाम विवाद हुए.

इसके बाद 2011 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के कोच की ज़िम्मेदारी गैरी कर्स्टन संभाल रहे थे. 28 साल बाद भारत ने वर्ल्ड कप जीता. इसके बावजूद बीबीसीआई गैरी कर्स्टन के साथ क़रार बढ़ाने को तैयार नहीं था.

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Image caption डंकन फ्लेचर के साथ धोनी

लिहाजा कोच की ज़िम्मेदारी कुछ समय बाद डंकन फ्लेचर को दी गई. डंकन फ्लेचर की कोचिंग में टीम इंडिया ने 2015 का वर्ल्ड कप खेला. हार के साथ ही डंकन फ्लेचर को भी रवाना कर दिया गया.

लेकिन 2019 में सेमीफ़ाइनल में हार के बाद भी रवि शास्त्री बच गए. रवि शास्त्री और विराट कोहली क्रिकेट फैंस के एक बहुत बड़े वर्ग को ये बात समझाने में कामयाब रहे कि टीम सिर्फ एक मैच में ख़राब खेली और टूर्नामेंट से बाहर हो गई.

चूंकि सेमीफ़ाइनल से पहले के मैचों के नतीजे टीम इंडिया के साथ थे इसलिए किसी ने ज़्यादा हो-हल्ला नहीं किया.

सच्चाई ये नहीं, सच्चाई यह है कि जिन मैचों में टीम इंडिया जीती उसमें भी उसने तमाम ग़लतियां कीं. इन्हीं ग़लतियों को दूर करने की चुनौती एक बार फिर रवि शास्त्री के सामने है.

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ये सच है कि कप्तान और कोच के तौर पर उनकी और विराट की जोड़ी एक और एक ग्यारह की तरह है. इस जोड़ी के सामने दो देशों की आने वाली तमाम प्रस्तावित सिरीज़ के अलावा फिलहाल अगले साल ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप की चुनौती सबसे बड़ी है.

तब तक टीम इंडिया की हर छोटी-बड़ी कमी को दूर करना होगा.

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