मेरी जीत में मेरे पैरेंट्स की भी मेहनतः पीवी सिंधु

  • 29 अगस्त 2019
पीवी सिंधु इमेज कॉपीरइट EPA

बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप का ख़िताब जीतकर ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बन गई हैं.

सिंधु ने वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में जापान की नोज़ोमी ओकुहारा को ख़िताबी मुक़ाबले में हराकर गोल्ड मेडल हासिल किया. इसके पहले सिंधु क़रीबी अंतर से दो बार गोल्ड मेडल से चूक गई थीं.

साल 2017 और 2018 में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था. वहीं साल 2013 और 2014 में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था.

महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने उन्हें इस उपलब्धि पर बधाई दी है.

पीवी सिंधु से बीबीसी संवाददाता दीप्ति बथीनी ने बात की. पढ़ें बातचीत का संक्षिप्त ब्योरा.

गोल्ड मेडल जीतने के बाद अब आगे की क्या योजना है?

आगे अभी कुछ टूर्नामेंट और हैं और ओलंपिक क्वालीफ़िकेशन भी है. मुझे उम्मीद है कि मैं अपना बेहतर प्रदर्शन करूंगी. इस जीत ने जो आत्मविश्वास पैदा किया है, मुझे उम्मीद है मैं उसे आगे ले जाउंगी.

महिलाएं अधिक से अधिक खेल की ओर आएं इसके लिए समाज और खेल प्रशासन की ओर से और क्या कोशिशें करनी चाहिए?

पहले महिलाओं को बाहर आने और काम करने से रोका जाता था लेकिन अभी काफ़ी बदलाव आया आया है. सरकार भी काफ़ी मदद दे रही है और महिला सशक्तिकरण के अभियान भी बहुत चल रहे हैं. मैं समझती हूं कि हम महिलाएं सिर्फ़ खेल में ही नहीं बल्कि बिज़नेस में भी काफ़ी अच्छा कर रही हैं और मैं समझती हूं कि हमें इस पर गर्व होना चाहिए. हमें भरोसा होना चाहिए हम कुछ भी कर सकती हैं आगे बढ़ सकती हैं. इसलिए आने वाले समय में और महिलाएं आगे आएंगी.

कुछ दिन पहले खेल में वेतन को लेकर लैंगिक आधार पर भेदभाव को लेकर काफ़ी विवाद हुआ था. कई खिलाड़ियों ने इस पर आगे आकर बोला भी था. आपका क्या मानना है?

मैं दूसरे खेलों को लेकर टिप्पणी नहीं करना चाहती लेकिन जहां तक बैडमिंटन की बात है, इसमें ऐसा कभी भी नहीं था. ये अच्छा है कि वे पुरुष और महिला को बराबर अहमियत देते हैं. ये बहुत ज़रूरी है कि दोनों को बराबर अहमियत मिले.

आम तौर पर खिलाड़ी अपना मेडल देश के नाम डेडिकेट करते हैं, लेकिन आपने बहुत साफ़गोई से इसे अपनी मां को समर्पित किया. इसके पीछे कोई ख़ास वजह थी?

उस दिन मेरी मम्मी का जन्मदिन था इसीलिए मैंने उन्हें ये मेडल समर्पित किया था. क्योंकि इसमें सिर्फ़ मेरी मेहनत नहीं है बल्कि मां बाप की भी मेहनत है. मेरे पैरेंट्स ने बहुत त्याग और कड़ी मेहनत की थी. मैं समझती हूं कि मैं उनकी वजह से ही आज यहां पर हूं. मैं वाक़ई बहुत भाग्यशाली हूं कि मुझे उनके जैसे पैरेंट्स मिले. मैं उनकी बहुत शुक्रगुज़ार हूं.

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