INDvsWI : वेस्टइंडीज के ख़िलाफ़ सिरीज़ मे भारत ने कितना खोया कितना पाया?

  • आदेश कुमार गुप्त
  • बीबीसी हिंदी के लिए
विराट कोहली

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भारत ने वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ तीन मैचों की एकदिवसीय सिरीज़ के अंतिम और निर्णायक मुक़ाबले में 4 विकेट से जीत हासिल की है. इस जीत के साथ ही भारत ने सिरीज़ 2-1 से अपने नाम कर ली.

कटक के बाराबती स्टेडियम में खेले गए मैच में 316 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने 48.4 ओवर में लक्ष्य हासिल किया. भारत के लिए कप्तान विराट कोहली ने सर्वाधिक 85 रनों की पारी खेली.

इसके अलावा टीम इंडिया के ओपनर रोहित शर्मा (63 रन) और के एल राहुल (77 रन) ने भी अर्धशतक जमाए.

भारत की शुरुआत बेहतरीन रही और रोहित-राहुल की सलामी जोड़ी ने पहले विकेट के लिए 122 रन जोड़े. हालांकि बीच के ओवरों में टीम को जल्दी-जल्दी विकेट गंवाने पड़े जिसके चलते एक वक़्त के लिए मुक़ाबला बेहद रोमांचक स्थिति में पहुंच गया.

बाद में विराट कोहली और रविंद्र जडेजा ने मिलकर पारी को संभाला और भारत को लक्ष्य के करीब लेकर गए. लेकिन जब भारत जीत से महज़ 30 रन दूर था तभी विराट कोहली आउट हो गए. उनके आउट होते ही स्टेडियम में एक तरह का सन्नाटा सा छा गया.

इसी मुश्किल घड़ी में जडेजा ने ज़िम्मेदारी से बल्लेबाज़ी करते हुए रन बनाने जारी रखे. उन्होंने नाबाद 39 रनों की पारी खेली. वहीं दूसरी तरफ से नए बल्लेबाज़ शर्दुल ठाकुर ने भी छोटी मगर तेज़-तर्रार पारी खेली. उन्होंने महज़ 6 गेंदों पर नाबाद 17 रन बनाए जिसमें दो चौके और एक छक्का शामिल रहा.

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विराट कोहली और रविंद्र जडेजा

वेस्ट इंडीज़ की पारी

इससे पहले टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए वेस्टइंडीज़ की टीम ने पांच विकेट पर 315 रन बनाए. मेहमान टीम के लिए सबसे ज़्यादा रन निकोलस पूरन ने बनाए. उन्होंने महज़ 64 गेंदों पर 89 रनों की पारी खेली.

वहीं टीम के कप्तान केरोन पोलार्ड ने भी तेज़ी से रन बटोरते हुए 51 गेंदों पर 74 रनों की पारी खेली. इन दोनों ही बल्लेबाज़ों ने उस समय टीम को संभाला जब वेस्टइंडीज़ का स्कोर 32 ओवर में 144 रन पर चार विकेट हो गया था.

वेस्टइंडीज़ ने अंतिम 10 ओवर में 118 रन बटोरे.

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केरोन पोलार्ड

इस मुक़ाबले में मैन ऑफ़ द मैच टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली चुने गए जबकि प्लेयर ऑफ़ द सिरीज़ रोहित शर्मा को चुना गया. यह साल 2019 में भारत का अंतिम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच भी था.

इससे पहले भारत ने वेस्ट इंडीज़ से तीन मैचों की टी-20 सिरीज़ भी 2-1 से जीती थी. यह परिणाम बताता है कि भारत को यह दोनों सिरीज़ जीतने के लिए कितना पसीना बहाना पड़ा.

वैसे एकदिवसीय सिरीज़ कई मायनों में भारत के लिए शानदार और आंखे खोलने वाली भी रही.

इस सिरीज़ में रोहित शर्मा, केएल राहुल, श्रेयस अय्यर, ऋषभ पंत और विराट कोहली बल्ले से चमके. कप्तान विराट कोहली ने भी तीसरे मैच में शानदार बल्लेबाज़ी का नमूना पेश किया तो रविंद्र जडेजा ने दिखाया कि कठिन परिस्थितियों में भी मैच कैसे जीताया जाता है.

अगर जडेजा ने एक छोर पर मोर्चा ना संभाला होता तो शायद एकदिवसीय सिरीज़ वेस्ट इंडीज़ के नाम होती.

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सिरीज़ की ख़ास बातें

रोहित शर्मा की बल्लेबाजी

सलामी बल्लेबाज़ रोहित शर्मा अगर फॉर्म में हो तो वह क्या कर सकते है, यह विरोधी गेंदबाज़ों से बेहतर कोई नहीं जानता. जब वेस्ट इंडीज़ ने पहले मैच में भारत को आठ विकेट से हराया तो लगा जैसे इस सिरीज़ में उसे हराने के लिए नाको चने चबाने पड़ेगे. लेकिन अगले ही यानि दूसरे मुक़ाबले में रोहित शर्मा का बल्ला गरजा.

हांलाकि पहले मैच में भी उन्होंने ठीक-ठाक 36 रन बनाए थे.

लेकिन विशाखापत्तनम में तो उन्होंने वेस्ट इंडीज़ के गेंदबाज़ों की जमकर ख़बर लेते हुए 138 गेंदों पर 17 चौके और पांच छक्के जमाते हुए 159 रन बना दिए. उनकी इस विशाल पारी की बदौलत भारत ने पांच विकेट पर 387 रन जैसा पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया और 107 रन से जीत हासिल करते हुए सिरीज़ में 1-1 की बराबरी हासिल की.

रविवार को जब वह कटक में बल्लेबाज़ी करने उतरे तो रोहित शर्मा के सामने एक रिकॉर्ड था जिसे तोड़ने से उन्हें अधिक समय नहीं लगा. जैसे ही उन्होंने नौ रन पूरे किए वैसे ही उन्होंने श्रीलंका के सनत जयसूर्या के एक साल में बनाए गए 2387 रन के रिकॉर्ड को तोड़ दिया. रोहित शर्मा ने वैसे 63 रनों की पारी खेली. उन्होंने तीन मैचों में 288 रन बनाए.

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केएल राहुल ने की शानदार वापसी

केएल राहुल को एक बेहतरीन बल्लेबाज़ माना जाता है लेकिन प्रदर्शन में निरतंरता के अभाव के कारण कई बार वह भारतीय टीम में अपनी जगह गंवा चुके हैं. लेकिन सलामी बल्लेबाज़ शिखर धवन के चोटिल होकर टीम से बाहर होने का फ़ायदा केएल राहुल ने ख़ूब उठाया.

उन्होंने एकदिवसीय सिरीज़ से पहले टी-20 सिरीज़ में वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ पहले मैच में 62 और दूसरे मैच में 91 रन बनाकर अपनी खोई फॉर्म वापस हासिल की, और उसे बरक़रार रखते हुए एकदिवसीय सिरीज़ के दूसरे मैच में 102 और तीसरे मैच में 77 रन बनाकर भारत की जीत में अपना अहम योगदान दिया.

उनकी इन पारियों ने भारतीय टीम को शिखर धवन की कमी बिलकुल भी नहीं खलने दी. यहां तक कहा जाने लगा है कि अब शिखर धवन की टीम इंडिया में वापसी शायद पहले से ज़्यादा मुश्किल हो जाए.

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श्रेयस अय्यर ने चौथे नंबर का हल निकाला

पिछले लम्बे समय से एकदिवसीय क्रिकेट में भारतीय टीम नंबर चार की पहेली में उलझी रही है, विश्व कप के दौरान भी टीम इंडिया को अपनी इस समस्या से निजात नहीं मिल पाई थी.

बीते एक साल में भारत ने इन पोजीशन पर कई खिलाड़ियों को आजमाया है लेकिन अब लगता है कि श्रेयस अय्यर के रूप में इसका हल निकल गया है.

श्रेयस अय्यर ने पहले मैच में 70 और दूसरे मैच में 53 रन बनाकर दिखा दिया कि अब उन पर भरोसा किया जा सकता है.

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ऋषभ पंत ने दिखाई ज़िम्मेदारी

ऋषभ पंत जब से भारतीय टीम में आए है उनके बारे में जितनी बातें हुई है उससे अधिक शायद ही किसी खिलाड़ी को लेकर हुई हो.

यहां तक कि कोच रवि शास्त्री और कप्तान विराट कोहली के अलावा रोहित शर्मा को कहना पड़ा कि ऋषभ पंत को लेकर कोई सवाल ना करे. दरअसल ऋषभ के टैलेंट की बात तो हर कोई करता है लेकिन उनके प्रदर्शन में ज़िम्मेदारी का अभाव भी हमेशा उठता रहता है.

आखिरकार पंत ने ही उन सवालों का जवाब देते हुए एकदिवसीय सिरीज़ के पहले मैच में 71 और दूसरे मैच में 39 रन बनाकर राहत की सांस ली. उन्हें लेकर पूर्व आलराउंडर और चयमकर्ता रहे मदन लाल कहते हैं कि जो भी हो उन्हें अपना स्वभाविक खेल ही खेलना चाहिए, लेकिन उन्हें अपनी विकेटकीपिंग को भी सुधारना चाहिए.

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कप्तान विराट कोहली का प्रदर्शन और समस्याएं

कप्तान विराट कोहली का बल्ला एकदिवसीय सिरीज़ में पहले दो मैच में तो खामोश रहा लेकिन तीसरे मैच में उन्होंने निर्णायक 85 रन बनाकर दिखा दिया कि अगर भारत को जीत के लिए रनों का पीछा करना है तो उनके रहते कोई चिंता नही.

वैसे कप्तान विराट कोहली भारतीय टीम की ख़राब फिल्डिंग को लेकर ज़रूर चिंतित है. तीन टी-20 और तीन एकदिवसीय मैचों में भारतीय खिलाड़ियों ने 18 कैच छोड़े. भारतीय टीम एकदिवसीय क्रिकेट में अपनी बेहतरीन फिल्ड़िग और तेज़ गेंदबाज़ो के दम पर ही कामयाब हुई है.

कोहली की दूसरी चिंता तेज़ गेंदबाज़ो की फिटनेस को लेकर भी होगी.

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रविंद्र जडेजा ने दिखाया जलवा

भारतीय टीम में जगह बनाना और उसे बचाए रखाना आज कि स्थिति में खालाजी का घर नहीं है, लेकिन रविंद्र जडेजा ने अपने जीवटता के दम पर अपनी जगह ख़ूब पक्की की है.

तीसरे और निर्णायक मैच में जब वेस्ट इंडीज़ के गेंदबाज़ भारत पर हावी थे, ऐसे समय जडेजा ना सिर्फ विकेट पर टिके रहकर 39 रनों की नाबाद पारी खेली बल्की नए बल्लेबाज़ शार्दुल ठाकुर का भी हौसला बढ़ाया .

रविंद्र जडेजा अपने दम पर आज टेस्ट, टी-20 और एकदिवसीय यानि तीनों प्रारूप में जगह बनाने वाले खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं.

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वेस्ट इंडीज़ का दम

रही बात गेंदबाज़ो की तो चाइनामैन कुलदीप यादव ने दूसरे एकदिवसीय मैच में हैट्रिक बनाकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई. यह कारनामा उन्होंने दूसरी बार किया. मोहम्मद शमी ने अपने अनुभव का पूरा लाभ उठाया तो युवा नवदीप सैनी ने भी तीसरे एकदिवसीय मैच में दो विकेट झटके.

लेकिन पूरी सिरीज़ में भारतीय गेंदबाज़ केवल एक बार वेस्ट इंडीज़ का सफाया कर सके, जबकि भारतीय टीम अपने गेंदबाज़ों के दम पर जीत के रथ पर सवार रही है.

दूसरी तरफ वेस्ट इंडीज़ भले ही टी-20 और एकदिवसीय सिरीज़ हार गई लेकिन शिमरोन हेटमायर, शाई होप, निकोलस पूरन, कप्तान किरेन पोलार्ड और रोस्टन चेज़ के दम पर अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपनी खोई हुई साख पाने में कामयाब रही.

इन कैरीबियाई खिलाड़ियों के खेलते हुए देखकर लगा कि कैरिबियन क्रिकेट की सांसें अभी भी बाकि है, शायद यही इस सिरीज़ की सबसे बड़ी ख़ासियत भी रही.

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