दानिश कनेरिया और शोएब अख़्तर के दावों को इंज़माम उल हक़ ने बताया ग़लत

  • 29 दिसंबर 2019
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पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान इंज़माम उल हक़ ने ग़ैर-मुस्लिम खिलाड़ियों के साथ भेदभाव होने के दावों को ग़लत बताया है. उन्होंने कहा, "मैं उस वक़्त कप्तान रहा हूं, ये सुनकर अफ़सोस हुआ कि हमें लेकर ऐसी बात कही गई है."

इंज़माम ने कहा कि दानिश कनेरिया के साथ टीम के सदस्यों द्वारा धर्म के आधार पर भेदभाव होने की बातों को वो सच नहीं मानते. उन्होंने कहा कि जब वो कप्तान थे तो ऐसी कोई बात उन्होंने महसूस नहीं की और न ही उनकी टीम का कोई सदस्य ऐसा कर सकता था.

यह पूरा मामला पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शोएब अख़्तर के उस दावे से जुड़ा है, जो उन्होंने एक टीवी कार्यक्रम में चर्चा में हिस्सा लेते हुए किया था. शोएब का कहना था कि टीम के कुछ खिलाड़ी क्षेत्रवाद पर बात करते थे और दानिश कनेरिया के साथ खाना खाने में भी हिचकते थे.

बाद में दानिश कनेरिया ने भी बयान जारी करके शोएब अख़्तर के दावे का समर्थन किया था. हालांकि, अब शोएब अख़्तर का कहना है कि उनके बयान को ग़लत तरह से लिया जा रहा है. बकौल शोएब, 'ये बर्ताव टीम का नहीं बल्कि एक-दो खिलाड़ियों का था.'

अब इस पूरे विवाद पर इंज़माम उल हक़ ने भी प्रतिक्रिया दी है. इंज़माम ने कहा कि उन्हें यह सब इसलिए कहना पड़ रहा है क्योंकि जिस समय दानिश पाकिस्तान के लिए क्रिकेट खेल रहे थे, अधिकतर समय वही टीम के कप्तान थे.

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Image caption दानिश कनेरिया

क्या बोले इंज़माम

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान इंज़माम ने अपने यूट्यूब चैनल 'इंज़माम उल हक़- द मैच विनर' में वीडियो जारी करके दानिश के साथ भेदभाव की बातों को निराधार बताया.

इस वीडियो में इंज़माम ने कुछ उदाहरण भी दिए हैं और कहा है कि उनके खिलाड़ियों का न सिर्फ़ पाकिस्तानी टीम के अंदर बल्कि पड़ोसी देश भारत की क्रिकेट टीम के साथ भी अच्छा बर्ताव था.

पूर्व क्रिकेटर ने कहा, "दानिश सबसे अधिक मेरी कप्तानी में खेले. मैंने कभी यह बात महसूस नहीं की कि हमारी टीम का कोई भी लड़का ऐसा सुलूक करता है कि कोई ग़ैर मुस्लिम है. यूसुफ़ योहाना भी ग़ैर-मुस्लिम था जो अब मुसलमान बन गया है. उसने भी कभी ऐसी चीज़ महसूस नहीं की. यूसुफ़ अगर ईसाई रहते हुए ऐसा कुछ महसूस करते तो मोहम्मद यूसुफ़ न बनते."

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक ईसाई पंजाब में जन्मे यूसुफ़ योहाना ने इस्लाम धर्म अपना लिया था. वह पाकिस्तान क्रिकेट टीम के एकमात्र अल्पसंख्यक कप्तान रहे हैं. इस पूरे विवाद पर उन्होंने भी शोएब और दानिश के दावों को ग़लत बताया है और कहा है कि 'मुझे हमेशा सबका प्यार और समर्थन मिला है.'

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इंज़माम ने दिए कई उदाहरण

इंज़माम उल हक़ ने कहा कि वह इस बात को मान ही नहीं सकते कि टीम में किसी के साथ भेदभाव हुआ. उन्होंने कहा, "मैं इस बात को मान ही नहीं सकता कि हम पाकिस्तानियों के दिल इतने छोटे हैं कि किसी को स्वीकार न करें. हमारे दिल बहुत बड़े हैं."

पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर ने कहा, "दूसरी मिसाल यह दूं कि 2004 में भारतीय टीम जब 15 साल बाद पाकिस्तान आई थी यहां पाकिस्तानियों ने अपने दिल खोलकर रख दिए थे. भारतीय खिलाड़ी जहां भी गए, उनके रेस्तरां, दुकान, टैक्सी वालों ने पैसे नहीं लिए. एक साल बाद जब पाकिस्तान की टीम भारत गई तो वहां भी ऐसा हुआ. उन्होंने अपने घरों के दरवाज़े खोल दिए कि आप हमारे मेहमान हैं, यहां ठहरिए."

"दोनों देशों की आवाम के के बीच इस तरह की मोहब्बतें हैं. ऐसा नहीं हो सकता कि किसी प्लेयर के लिए हमारा दिल इतना तंग हो जाएग. मैं उस समय पाकिस्तानी टीम का कप्तान था और यक़ीन मानें, यह बात सही नहीं है."

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Image caption शोएब अख़्तर के बयान से शुरू हुआ है पूरा विवाद

कुछ खिलाड़ियों द्वारा दानिश के साथ खाना खाने से हिकचने के शोएब अख़्तर के दावे को लेकर इंज़माम ने अपना और सौरव गांगुली का उदाहरण दिया.

"2005 में पाकिस्तानी टीम के भारत दौरे से पहले मैं एक शूट के लिए कलकत्ता गया था. मैं पाकिस्तान का कप्तान था और सौरव भारत का. उससे पहले सौरव के एक रेस्तरां का उद्घाटन मैंने और सचिन ने किया था. तो वहां दोनों समय का खाना सौरव मुझे अपने रेस्तरां से भिजवाता था और मैं खाता था."

"जिस समय हम टूर पर होते थे, जैसे कि शारजाह में; दोनों देशों की टीमें एक ही होटल में ठहरती थीं. भारत और पाकिस्तान के प्लेयर एक-दूसरे के कमरे में होते थे, गप्पे मारते थे और साथ खाना खाते थे. ऐसी कोई बात नहीं थी."

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Image caption इंज़माम उल हक़

'दानिश के साथ भेदभाव नहीं किया'

इंज़माम ने कहा कि उन्होंने प्रतिभा देखते हुए ही दानिश कनेरिया को सक़लैन मुश्ताक की जगह टीम में जगह दी थी.

उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ हुई बातचीत के बारे में भी बताया, "मुशर्रफ़ साहब जब राष्ट्रपति थे तो एक बार उन्होंने मुझे बुलाया और कहने लगे- मैंने सुना है कि जो लड़का नमाज़ पढ़ता है और जिसकी दाढ़ी है, उसी को तुम टीम में चुनते हो. मैं हंस पड़ा. मुशर्रफ़ साहब ने कहा कि तुम बताओ, तुम्हारा क्या कहना है इस पर."

"मैंने कहा कि दीन अपनी जगह है, खेल अपनी जगह है. दोनों को मिक्स करने में मैं यक़ीन नहीं रखता. अगर आपको लगता है कि मैं दीन पर चल रहा हूं तो हमारा दीन कहता है कि इंसाफ़ की बात हो तो सामने मुसलमान हो या ग़ैर-मुसलमान, आपको बस इंसाफ़ करना है."

आख़िर में दानिश को टीम में लिए जाने के बारे में इंज़माम ने कहा, "मुश्ताक़ मेरा बेहतरीन दोस्त है. बचपन से ही हम साथ क्रिकेट खेले और आज भी हमारी वैसी ही दोस्ती है. मगर मुश्ताक़ मेरी कप्तानी में टीम से ड्रॉप हुआ. मैंने मुश्ताक़ पर दानिश कनेरिया को तरजीह दी कि ये पाकिस्तान का भविष्य है. तो हमारी टीम में कभी ऐसी चीज़ नहीं रही."

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